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पीएफ पर और घट सकता है ब्याज, वित्त मंत्रालय ने 8.65 फीसदी पर उठाया सवाल

बता दें कि फरवरी में वित्त मंत्रालय द्वारा श्रम मंत्रालय से निष्क्रिय खातों में 8.65 प्रतिशत ब्याज दर से किए जाने वाले भुगतान करने की क्षमता से संबंधित स्पष्टीकरण मांगा था।

Author नई दिल्ली | April 6, 2017 11:17 AM
इस तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीक के तौर पर किया गया है।

पीएफ पर जल्द ही और ब्याज घट सकता है इसे लेकर वित्त मंत्रालय ने श्रम मंत्रालय द्वारा ग्राहकों को दिए जाने वाले 8.65 ब्याज दर पर सवाल उठाया है। कर्मचारी भविष्य निधी संगठन (ईपीएफओ) के ग्राहकों के लिए 2016-17 में किए जाने वाले भुगतान के लिए 8.65 प्रतिशत ब्याज दर में कितना स्थायित्व है, इसके बार में वित्त मंत्रालय द्वारा ईपीएफओ से जवाब मांगा गया है। इसके लिए वित्त मंत्रालय ने श्रम मंत्रालय को एक पत्र लिखकर सिफारिश की है कि इस में 50 अंको की संभवत: कटौती की जाए। बता दें कि फरवरी में वित्त मंत्रालय द्वारा श्रम मंत्रालय से निष्क्रिय खातों में 8.65 प्रतिशत ब्याज दर से किए जाने वाले भुगतान करने की क्षमता से संबंधित स्पष्टीकरण मांगा था, जिसके जवाब में श्रम मंत्रालय ने कहा था कि जो भी भुगतान किया जा रहा है वह बिल्कुल ठीक है। इसके बाद यह मामला यहीं खत्म हो गया था।

ईपीएफ ब्याज दर में कटौती की सिफारिश के बाद एक बार फिर वित्त मंत्रालय ने रिटायरमेंट फंड के ब्याज दर के भुगतान के स्थायित्व पर सवाल उठाए हैं। श्रम मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि ब्याज दर में कटौती किए जाने को लेकर वित्त मंत्रालय द्वारा सिफारिश की गई है। उन्होंने कहा कि अगर ईपीएफओ द्वारा ब्याज भुगतान में कुछ चूक होती है तो कानून के अनुसार यह केंद्र सरकार का दायित्व होगा।

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आपको बता दें कि पिछले साल दिसंबर में वर्ष 2016-17 के लिए ईपीएफओ के न्यासी केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीटी) द्वारा अपने लगभग 17 करोड़ ग्राहकों के लिए, 8.65 प्रतिशत ब्याज दर के लिए सिफारिश की गई थी। सामान्य  रूप से सीबीटी, शासी निकाय कि कोष का प्रबंधन और श्रम मंत्री की अध्यक्षता में किया जाता है, जिसका आखिरी निर्णय वित्त मंत्रालय द्वारा लिया जाता है।

श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय ने फरवरी में कहा था कि दोनों मंत्रालय ब्याज दर के मामले में एक ही हैं। देखा जाए तो श्रम मंत्रालय और वित्त मंत्रालय की इस बारे में एक ही राय है। इसके बाद उन्होंने कहा था कि 8.65 प्रतिशत ब्याज की दर में कोई अंतर नहीं है। इसे लेकर सारी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं और जल्द ही इसे व्यक्तिगत रूप से आगे बढ़ा दिया जाएगा।

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