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प्रदर्शनकारियों की रिहाई के लिए किसानों का राजमार्ग जाम, विधानसभा उपाध्यक्ष की कार पर हमले में हुए थे गिरफ्तार

गिरफ्तारी और मुकदमा दर्ज किए जाने के खिलाफ किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा पिछले चार दिन से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं, डॉक्टरों ने उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया।

Edited By Sanjay Dubey सिरसा | July 21, 2021 9:41 PM
तीन कृषि कानूनों के विरोध में नारे लगाते आंदोलनकारी किसान। (पीटीआई फोटो/मानवेंद्र वशिष्ठ)

किसानों ने हरियाणा विधानसभा के उपाध्यक्ष रणबीर गंगवा की कार पर हमले के सिलसिले में पिछले सप्ताह गिरफ्तार किए गए पांच प्रदर्शनकारियों की रिहाई की मांग को लेकर बुधवार को तीन स्थानो पर राष्ट्रीय राजमार्ग जाम कर दिया। संयुक्त किसान मोर्चा ने 11 जुलाई को गंगवा की कार पर हुए हमले के सिलसिले में 100 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने की मांग की है। इसमें राजद्रोह का मामला भी शामिल है।

गौरतलब है कि केन्द्र सरकार द्वारा सितंबर, 2020 में बनाए गए कृषि क्षेत्र के तीन नये कानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन की अगुवायी संयुक्त किसान मोर्चा कर रहा है जो विभिन्न किसान संगठनों का मुखौटा संगठन है। इस बीच, गिरफ्तारी और मुकदमा दर्ज किए जाने के खिलाफ किसान नेता बलदेव सिंह सिरसा के अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का आज चौथा दिन है। स्वास्थ्य विभाग की एक टीम ने प्रदर्शन स्थल पर ही सिरसा के स्वास्थ्य की जांच की। उनकी भूख हड़ताल की वजह से किसानों का आंदोलन और बढ़ने की आशंका बढ़ गई है।

प्रदर्शनकारियों ने खुईयां मलाना टोल प्लाजा और पंजुआना गांव सहित कई जगहों पर राजमार्ग को दो घंटों के लिए अवरुद्ध कर दिया। हालांकि इस दौरान आपात वाहनों को रास्ता दिया गया, लेकिन अन्य वाहनों के कारण लंबा जाम लग गया। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसबल तैनात किया गया है।

गौरतलब है कि गंगवा की कार पर हमले के बाद पुलिस ने 100 से ज्यादा लोगों (ज्यादातर अज्ञात) के खिलाफ राजद्रोह, सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालना, जनप्रतिनिधि के हत्या का प्रयास और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का मामला दर्ज किया है।

उधर, दिल्ली के सिंघू बॉर्डर के पास के गांवों के लोगों ने राजमार्ग के एक हिस्से को खोलने की मांग को लेकर बुधवार को किसानों के प्रदर्शन स्थल पर जाने के लिए मार्च किया लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले साल नवंबर से ही दिल्ली की अलग-अलग सीमाओं पर किसान प्रदर्शन कर रहे हैं। ग्रामीणों ने राजीव गांधी एजुकेशन सिटी से सिंघू बॉर्डर तक मार्च करना शुरू किया लेकिन पुलिस ने उन्हें कुछ दूरी के बाद रोक दिया। पुलिस ने कहा कि कानून-व्यवस्था के मद्देनजर उन्हें अनुमति देने से इनकार कर दिया गया।

प्रदर्शन मार्च में शामिल एक स्थानीय निवासी ने संवाददाताओं से कहा कि किसानों के विरोध प्रदर्शन के कारण उन्हें काफी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि प्रदर्शनकारियों द्वारा सड़क के कम से कम एक हिस्से को खोल दिया जाए। बेहतर होगा कि उन्हें दिल्ली के रामलीला मैदान या जंतर-मंतर पर धरने की अनुमति दी जाए क्योंकि यहां महीनों से चल रहे विरोध प्रदर्शन के कारण हमें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।” स्थानीय निवासी ने कहा कि वह किसानों के प्रदर्शन या उनकी मांगों के खिलाफ नहीं है लेकिन सड़क को खोल देना चाहिए।

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