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त्योहारों की खुशियों पर न लगे हादसों का ग्रहण

त्योहारों के दौरान आग लगने व इससे जलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं, लेकिन किसी अनहोनी की वजह से त्योहारों की खुशियां गम में न बदल जाएं, इसलिए बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी विशेषज्ञों ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। इ

Author नई दिल्ली, 13 अक्तूबर। | October 14, 2018 4:03 AM
दिवाली में पटाखे जलाने के दौरान बच्चे भी जल सकते हैं। इसलिए पटाखे जलाने वक्त उनके साथ घर के किसी बड़े सदस्य का होना जरूरी है।

दुर्गा पूजा, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहार बस चंद दिनों की दूरी पर हैं। त्योहारों के दौरान आग लगने व इससे जलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं, लेकिन किसी अनहोनी की वजह से त्योहारों की खुशियां गम में न बदल जाएं, इसलिए बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी विशेषज्ञों ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। इन विशेषज्ञों का कहना है कि त्योहारों के दौरान जलने की घटनाएं ज्यादा होती हैं, इसलिए अगले कुछ महीनों तक बचकर रहें। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि त्योहारों में होने वाले हादसों में महिलाओं के झुलसने की आशंका ज्यादा रहती है, क्योंकि इस दौरान वे कई तरह के पकवान बनाने में व्यस्त रहती हैं और उन्हें दूसरे घरेलू काम भी निपटाने होते हैं। इसी जल्दबाजी और तनाव में दुर्घटनाएं होती हैं। इसके अलावा दिवाली में दीए व पटाखे जलाने के दौरान ढीले-ढाले कपड़े जैसे साड़ी व दुपट्टे महिलाओं को और जोखिम में डालते हैं। जरा सी भी चूक हो तो इनमें तुरंत आग लग जाती है। दिवाली में पटाखे जलाने के दौरान बच्चे भी जल सकते हैं। इसलिए पटाखे जलाने वक्त उनके साथ घर के किसी बड़े सदस्य का होना जरूरी है।

जनरल सर्जन भी कर सकता है शुरुआती इलाज

सोसायटी के सदस्य चिकित्सकों का कहना है कि खाना पकाने के दौरान या पटाखों से मामूली रूप से जलने का इलाज घर में ही हो सकता है। ऐसा होने पर जले हुए अंग को ठंडे पानी में रखना चाहिए और 15-20 मिनट तक उसे पानी में ही रहने देना चाहिए। जलन और दर्द कम होने पर मरीज को किसी बर्न स्पेशलिस्ट से संपर्क करना चाहिए जो मुख्य रूप से प्लास्टिक सर्जन होता है। जलने के बड़े मामलों में सबसे मरीज के शरीर से जले हुए कपड़े हटा देने चाहिए और उसे एक साफ चादर से ढककर अस्पताल ले जाना चाहिए। जली हुई जगह पर कोई भी दवा, क्रीम या अन्य चीज जैसे टूथपेस्ट या स्याही आदि नहीं लगाना चाहिए क्योंकि ऐसी हालत में डॉक्टर के लिए मरीज के घाव की गहराई को समझना मुश्किल हो जाता है। जख्म को साफ करने की प्रक्रिया उसे और खराब कर सकती है। इसलिए जरूरी यह है कि इसका इलाज किसी बर्न स्पेशलिस्ट को ही करने दिया जाए। अगर ऐसा कोई अस्पताल आसपास न हो तो जनरल सर्जन भी शुरुआती इलाज कर सकता है।

लंबा है इलाज

एलएनजेपी अस्पताल के बर्न प्लास्टिक एंड कॉस्मेटिक सर्जरी के पूर्व अध्यक्ष डॉ राजीव बी आहूजा का कहना है जलने का इलाज महीनों चलने वाली प्रक्रिया है और यह बहुत तकलीफदेह भी है। दिवाली के दौरान ज्यादातर लोग पटाखे जलाते वक्त सावधानी नहीं बरतते। कुछ लोग खतरनाक पटाखों का इस्तेमाल करते हैं।

महिलाओं पर प्रभाव

इंटरनेशनल सोसायटी फॉर बर्न इंजरीज (आइएसबीआइ) के एक विश्लेषण में बताया गया है कि समाज के कमजोर आर्थिक वर्ग की महिलाओं में जलने की आशंका ज्यादा रहती है। इस वर्ग की महिलाएं अमूमन जमीन पर खाना बनाती हैं। उनके घर में जगह की कमी होती है और रसोई में सुरक्षा के इंतजाम भी नहीं होते हैं।

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