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सम-विषम के जरिए भविष्य संवार रही सरकार!

यह पहली ऐसी सरकार है जिसने अपने डेढ़ साल के कार्यकाल में एक भी स्थायी या अस्थायी शिक्षक भर्ती नहीं किया और 16 लाख बच्चों के भविष्य को पूरी तरह से अंधकार में धकेल दिया।

Author नई दिल्ली | September 13, 2016 4:30 AM
दिल्ली के उप मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ आप नेता मनीष सिसौदिया। (फाइल फोटो)

दिल्ली सरकार ने सम-विषम योजना से कुछ ज्यादा ही प्रेरणा ले ली है। इसीलिए तो राजधानी की सड़कों के बाद वह शिक्षा प्रणाली में भी इसे लागू कर रही है। मामला कुछ यूं है कि दक्षिण-पूर्वी जिले में सरकारी स्कूलों के 100 से ज्यादा शिक्षकों को 2 से 3 दिनों के लिए दूसरे स्कूलों में प्रतिनियुक्त किया गया है। राजकीय विद्यालय शिक्षक संघ ने इस फैसले का विरोध करते हुए आरोप लगाया है कि सरकार के इशारे पर शिक्षा विभाग के अधिकारी ‘शिक्षकों का आॅड-ईवन’ कर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। शिक्षकों की कमी की अस्थायी भरपाई के लिए पहली बार इतनी बड़ी संख्या में शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति की जा रही है, वह भी हर हफ्ते 2-3 दिनों के लिए।

दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के शिक्षा उपनिदेशक की ओर से 8 सितंबर को जारी आदेश के मुताबिक, 126 शिक्षकों की अस्थायी रूप से प्रतिनियुक्ति की गई है। आदेश में कहा गया है कि यह व्यवस्था जोन-29 के अंदर आंतरिक प्रबंधन के रूप में अस्थायी तौर पर की गई है। गौरतलब है कि कई स्कूलों में कुछ विषय के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं और उस विषय की पढ़ाई के लिए इन शिक्षकों को आदेशानुसार हर हफ्ते 2 से 3 दिनों के लिए दूसरे स्कूल में कक्षाएं लेनी होंगी, वहीं पांच शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति हफ्ते में 6 दिनों के लिए की गई है। शेष दिनों में ये शिक्षक अपनी स्थायी पोस्टिंग के स्कूल में कक्षाएं लेंगे। दिल्ली के सरकारी स्कूलों में 34 हजार शिक्षकों की कमी बताई जा रही है।

राजकीय विद्यालय शिक्षक संघ का कहना है कि शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहा शिक्षा विभाग सरकार के इशारे पर अब शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति कर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहा है। शिक्षक संघ के महासचिव अजय वीर यादव ने कहा, ‘दिल्ली सरकार गेस्ट टीचरों को पक्का करने के चुनावी वादे में उलझकर जानबूझकर स्थायी शिक्षकों की भर्ती नहीं कर रही है।’ शिक्षक संघ के अध्यक्ष सीपी सिंह ने कहा, ‘दिल्ली का शिक्षा विभाग भगवान भरोेसे चल रहा है, लगभग 50 फीसद ही स्थायी शिक्षक हैं जो शिक्षण कार्य की पूरी जिम्मेदारी उठा रहे हैं। ऐसे में पहले ही छात्रों के कोर्स पूरे नहीं हो पा रहे हैं, अब अधिकारियों ने एक विद्यालय के टीचर को हफ्ते में 3 दिन दूसरे विद्यालय में प्रतिनियुक्त करने का फरमान जारी किया है, जिससे दोनों विद्यालयों में छात्रों की पढ़ाई दांव पर लग गई है।’

अजय वीर यादव ने शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया को इसका जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि यह पहली ऐसी सरकार है जिसने अपने डेढ़ साल के कार्यकाल में एक भी स्थायी या अस्थायी शिक्षक भर्ती नहीं किया और 16 लाख बच्चों के भविष्य को पूरी तरह से अंधकार में धकेल दिया। यादव ने कहा कि प्रतिनियुक्ति कोई विकल्प नहीं है, अगर सरकार स्थायी नियुक्तियां नहीं कर पा रही तो कम से कम गेस्ट टीचर्स नियुक्त कर वैकल्पिक व्यवस्था करती तो छात्रों की पढ़ाई का नुकसान तो नहीं होता। राजकीय शिक्षक संघ ने शिक्षा उपनिदेशक की बर्खास्तगी और इस आदेश को रद्द करने की मांग की है।

 

 

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