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डीयू छात्रसंघ चुनावः प्रयोगशाला नजर आई छात्र राजनीति, 2019 पर निशाना

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव ने आखिरी चरण में छात्र नेता व उनके समर्थकों ने लिंग्दोह कमेटी की सिफारिश और स्वच्छता अभियान को तार-तार कर दिया।

Author नई दिल्ली, 12 सितंबर। | September 13, 2018 5:40 AM
वोट देने आए आम छात्रों का मानना है कि बुनियादी मुद्दों से अधिक धनबल और बाहुबल की हावी है।

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव ने आखिरी चरण में छात्र नेता व उनके समर्थकों ने लिंग्दोह कमेटी की सिफारिश और स्वच्छता अभियान को तार-तार कर दिया। बुधवार को उन्होंने अदालत के निर्देश तक की परवाह नहीं की। बाहरी दिल्ली व दक्षिण दिल्ली के कई कॉलेजों के बाहर सैकड़ों की तादात में बाहरी लोग घंटों जमे रहे। गांव-बिरादरी का हवाला देकर वोट की अपील करते बुजुर्ग व युवाओं के जमघट ने विश्वविद्यालय में विधानसभा चुनाव की तस्वीर पेश कर दी। लोगों ने बताया कि लोकसभा चुनाव से ठीक पहले यह चुनाव हो रहा है इसलिए यह महत्त्वपूर्ण है। इतना ही नहीं समर्थकों ने डूसू के परचे-पोस्टरों को सड़कों पर ऐसे खपा डाला कि आधा किलोमीटर दूर से ही सड़कें कॉलेजों का पता बता रही थीं। शायद उम्मीदवारों को यह अहसास था कि अब उनका कुछ नहीं बिगड़ने वाला। लिहाजा देशबंधु कॉलेज, रामानुजन, पीजीडीएवी कॉलेज, जाकिर हुसैन, श्रद्दानंद कॉलेज, सहित कई कॉलेजों के बाहर सारे संकल्प ध्वस्त होते नजर आए।

वोट देने आए आम छात्रों का मानना है कि बुनियादी मुद्दों से अधिक धनबल और बाहुबल की हावी है। सुबह से डूसू चुनाव मतदान को लेकर कॉलेजों में सरगर्मी अपने चरम पर थी। कॉलेजों के बाहर सुरक्षा के बंदोबस्त थे लेकिन बाहरी लोगों के जमघट से वातावरण प्रभावित हो रहा था। रुक-रुककर नारे गूंज रहे थे। मतदान शुरू होने के बाद से संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता व पदाधिकारी विभिन्न जगहों पर 15-20 की संख्या में खड़े होकर अपने पैनल के बैलेट नंबर बताकर छात्रों से वोट करने की अपील कर रहे थे।
डूसू के बहाने 2019 लोकसभा पर पकड़ बनाने की कोशिश

देशबंधु कॉलेज के बाहर जमे लोगों का कहना है कि इस साल का डूसू चुनाव 2019 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले हो रहा है। लिहाजा डूसू चुनाव अहम है। इसके बहाने हर गांव इलाके में पार्टी स्तर पर बैठकें आयोजित की गई हैं। सबको कुछ न कुछ जिम्मेदारी दी गई है। यही वजह है कि नजारा अलग है। कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआइ के एक सदस्य ने कहा कि डूसू चुनाव लोकसभा चुनावों के लिए सेमीफाइनल की तरह है जो यह दिखाएंगा कि युवा, शिक्षित मतदाता क्या चाहते हैं। जबकि संघ की छात्र शाखा एबीवीपी के एक सदस्य ने कहा कि चुनाव के नतीजे आम जनता की मनोदशा समझने में मदद करेंगे। तमाम जगह भाजपा, आप और कांग्रेस सभी के नेताओं को कॉलेज परिसर के पास रहकर छात्र संगठन के पक्ष में छात्रों से वोट करने की अपील की।

लिंग्दोह कमेटी और हाईकोर्ट का आदेश बना मजाक

लिंग्दोह कमेटी की सिफारिशों और दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों की अवहेलना दिखी। एनजीटी ने इस बार पेपरलेस चुनाव कराने के लिए कहा था। कॉलेजों में आचार संहिता की खूब धज्जियां उड़ीं। कॉलेजों के बाद उम्मीदवारों के बैलेट नंबर व नाम वाली पर्चियां खूब उड़ाई गई। इसका नतीजा यह रहा कि कॉलेज के बाहर की सड़कें इन पर्चियों से पटी रही। छात्र लग्जरी गाडिय़ों के काफिले में भी नजर आए। सनद रहे कि बीते साल कैंपस-कॉलेजों के अलावा दिल्ली मेट्रो, फ्लाईओवर, नगर निगम, एनडीएमसी की सपंत्तियों समेत सार्वजनिक जगहों को परचा-पोस्टर लगाकर उसे गंदा करने के मामले में हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। जिसके बाद मुख्य चुनाव अधिकारी ने छात्र संगठनों व नेताओं तक को आगाह किया था।

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