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ऑफिस जाने वालों के लिए घर से बस सेवा शुरू करेगी डीटीसी

इन बसों में सफर करने वाले यात्रियों से मौजूदा सामान्य एसी बसों का किराया लिया जाएगा।

Author April 28, 2017 9:02 PM
इस सेवा के लिए चुने गए कुछ स्थानों में द्वारका, जनकपुरी, रोहिणी, पटपड़गंज और बदरपुर शामिल हैं।

दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) एक मई से उपनगरीय बस्तियों से दफ्तर के इलाकों के बीच विशेष, वातानुकूलित बसें शुरू करने वाली है। इस सेवा का उद्देश्य दफ्तर आने-जाने के लिए सुगम यात्रा मुहैया कराना है। उपनगरीय आवासीय इलाकों और मध्य, दक्षिण, उत्तर पश्चिम दिल्ली के दफ्तर वाले इलाकों के बीच 20 ‘नॉन स्टॉप’ बसें चलाई जाएंगी। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने इससे पहले दिल्ली सरकार को निजी वाहनों पर निर्भरता घटाने के लिए गंतव्य बस सेवाएं शुरू करने का आदेश दिया था ताकि वायु प्रदूषण पर नियंत्रण लग सके। डीटीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ये बसें आवासीय इलाकों से सुबह आठ बजे से आठ बजकर 50 मिनट के बीच रवाना होंगी और शाम करीब छह बजें लौटेंगी।

यह बसें रास्ते में कहीं नहीं रूकेंगी। इन बसों में सफर करने वाले यात्रियों से मौजूदा सामान्य एसी बसों का किराया लिया जाएगा। इस सेवा के लिए चुने गए कुछ स्थानों में द्वारका, जनकपुरी, रोहिणी, पटपड़गंज और बदरपुर शामिल हैं। बसें इन इलाकों को नेहरू प्लेस, सीजीओ कॉम्पलेक्स, शास्त्री भवन, शिवाजी स्टेडियम (कनॉट प्लेस) से जोड़ेंगी। 20 साल पहले भी इसी तरह की बस सेवा शुरू की गई थी लेकिन यात्रियों की उदासीनता के चलते इसे बंद करना पड़ गया था।

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गौरतलब है कि आने वाले समय में गांवों की सड़कों पर दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) की बसें नहीं दिखाई देंगी। डीटीसी की पुरानी बसों के सड़कों से हटने के बाद उनकी जगह डीटीसी की नई बसें नहीं चलाई जाएंगी। इसके बदले क्लस्टर बसों को ग्रामीण इलाकों में चलाया जाएगा, जिसकी तैयारी में परिवहन विभाग जुटा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, गांवों की आबादी उतनी नहीं रही, जितनी पहले थी। अधिकांश लोगों के पास अपने वाहन हैं। यही वजह है कि ग्रामीण लोगों ने सार्वजनिक वाहनों का उपयोग कम कर दिया, जिससे गांवों में पहले की अपेक्षा बसें कम हो गईं। इस कारण ही अब ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अभी गांवों में ऐसे लोगों की कमी नहीं है, जिनके पास अपने वाहन नहीं हैं। परिवहन विभाग के मुताबिक, अभी तक इलाके में क्लस्टर बसें ही बढ़ाई गई हैं, ये गांवों के अनुकूल हैं। डीटीसी की लो-फ्लोर बसें काफी कम हैं, जिससे इनको ग्रामीण इलाकों में नहीं चलाया जा सकता है।

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