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दूर के रिश्तेदारों पर नहीं चल सकता दहेज उत्पीड़न का मामला: दिल्ली हाईकोर्ट

फैसले के दौरान जज ने सुप्रीम कोर्ट के एक अहम फैसले का हवाला देते हुए कहा, 'अगर कोई व्यक्ति खून के रिश्ते, शादी या गोद लेने से नहीं जुड़ा है तो उसके खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है।'

delhi high courtदिल्ली हाई कोर्ट फोटो सोर्स- जनसत्ता

दिल्ली हाईकोर्ट ने दहेज उत्पीड़न मामले में एक अहम फैसला देते हुए कहा कि दूर के रिश्तेदारों के खिलाफ ऐसे मामलों में मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है। कोर्ट ने करीब छह साल पहले दिल्ली पुलिस द्वारा दो लोगों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न के मुकदमे को रद्द करते हुए यह फैसला दिया। फैसला देते वक्त जस्टिस अनु मल्होत्रा ने ‘रिश्तेदार’ शब्द को भी विस्तार से परिभाषित किया। उन्होंने कहा, ‘दहेज उत्पीड़न का मुकदमा सिर्फ ऐसे रिश्तेदारों के खिलाफ चलाया जा सकता है जिनका संबंध खून से, शादी से या फिर गोद लेने से हो।’ अपने फैसले के दौरान जज ने सुप्रीम कोर्ट के एक अहम फैसले का हवाला देते हुए कहा, ‘अगर कोई व्यक्ति खून के रिश्ते, शादी या गोद लेने से नहीं जुड़ा है तो उसके खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है।’

दहेज उत्पीड़न केस में महिला के पति की भाभी के मामा को आरोपी बनाया गया था। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी बनाए गए हनीफ और अख्तर मलिक शिकायतकर्ता महिला की पती की भाभी के मामा है। लिहाजा दोनों रिश्तेदारों की श्रेणी में नहीं हैं। बता दें कि दिल्ली पुलिस ने साल 2013 में दोनों के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का केस दर्ज किया। इस मामले में निचली अदालत द्वारा आरोप पत्र पर संज्ञान लिया गया था। हालांकि अक्टूबर 2015 में हाईकोर्ट ने निचली अदालत में सुनवाई पर रोक लगा दी। कोर्ट ने दोनों की तरफ से मुकदमा रद्द करने की मांग को लेकर दाखिल की गई याचिका का निपटारा करते हुए निचली अदालत को मुकदमे की सुनवाई तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए।

क्या था मामला-
दिल्ली के गोविंदपुरी थाने में साल 2013 में एक महिला की शिकायत पर उसके पति, दो जेठ, दोनों जेठानी, ननद और अन्य के खिलाफ दहेज उत्पीड़न व अन्य आरोपों में पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। अपनी शिकायत में महिला ने दावा किया कि साल 2005 में उसने बेटे को जन्म दिया तो पति व परिवार के अन्य लोग हॉस्पिटल में ही बच्चे को ननद को गोद देने का दवाब बनाने लगे। इनकर करने पर सभी ने उसकी खूब पिटाई की। बाद में कार की मांग की जाने लगी। मांग पूरी नहीं होने पर उसे खूब प्रताड़ित किया गया।

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