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पीआईएल लगाने वाले वकील से सीजेआई ने कहा- चमत्‍कार की उम्‍मीद ना रखिए, भारत बहुत बड़ा देश

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘चमत्कार की उम्मीद मत रखिए। भारत बहुत विशाल देश है। कई प्राथमिकताएं हैं और निश्चित रूप से, शिक्षा इन प्राथमिकताओं में शामिल है।’

Author Published on: November 17, 2018 12:34 PM
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने करीब साढ़े तीन करोड़ गरीब बच्चों को औपचारिक रूप से स्कूल तक लाने के लिए शिक्षा का अधिकार कानून (आरटीई) को लागू करने की मांग वाली एक जनहित याचिका (पीआईएल) पर आगे सुनवाई से शुक्रवार (16 नवंबर, 2018) को इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि भारत जैसे विशाल देश में चमत्कार की उम्मीद मत रखिए, भारत बहुत विशाल देश है। शीर्ष अदालत ने इससे पहले याचिकाकर्ता एवं पंजीकृत सोसायटी ‘अखिल दिल्ली प्राथमिक शिक्षक संघ’ से बच्चों को मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के क्रियान्वयन पर केन्द्र को ज्ञापन सौंपने को कहा था।

देश में आरटीई कानून के क्रियान्वयन की निगरानी से इनकार करते हुए प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘चमत्कार की उम्मीद मत रखिए। भारत बहुत विशाल देश है। कई प्राथमिकताएं हैं और निश्चित रूप से, शिक्षा इन प्राथमिकताओं में शामिल है।’ पीठ ने इस तथ्य पर संज्ञान लिया कि केन्द्र ने ज्ञापन पर गौर करने के बाद जवाब दिया है। पीठ ने कहा, ‘हमने याचिकाकर्ता के वकील को सुना और संबंधित सामग्री पर गौर किया। हम हस्तक्षेप के इच्छुक नहीं हैं। अत: रिट याचिका खारिज की जाती है।’

‘अखिल दिल्ली प्राथमिक शिक्षक संघ का कहना है कि सरकारी स्कूलों के बंद होने और शिक्षकों के 9.5 लाख पद खाली होने के कारण बड़ी संख्या में बच्चे शिक्षा से वंचित हैं। याचिका में अदालत से राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को छह महीने के भीतर शिक्षा से वंचित रह गए बच्चों की पहचान करने का निर्देश देने की अपील की गई थी।

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