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दिवाली की बिक्री 40% तक प्रभावित

दिवाली में सिर्फ दो दिन बचे हैं लेकिन इस बार देशभर के बाजारों में सन्नाटा छाया हुआ है और त्योहारी माहौल बना ही नहीं है।

Author नई दिल्ली | October 17, 2017 4:19 AM
दिवाली की पूर्व संध्या पर गुवाहाटी में पटाखों की खरीदारी करते स्थानीय लोग। (PTI Photo/28 Oct, 2016)

दिवाली में सिर्फ दो दिन बचे हैं लेकिन इस बार देशभर के बाजारों में सन्नाटा छाया हुआ है और त्योहारी माहौल बना ही नहीं है। जबकि हर वर्ष इस समय खरीदारी अपनी उच्च सीमा पर होती थी। बाजारों में ग्राहकों की आवक बेहद कम है जिसके चलते गत वर्ष के मुकाबले लगभग बिक्री में 40 फीसद की गिरावट है। कैट (कंफडरेशन आॅफ आॅल इंडिया ट्रेडर्स) के अध्यक्ष बीसी भरतिया और महामंत्री प्रवीण खंडेलवाल ने बताया की क्योंकि उपभोक्ताओं की जेब में नकद की तंगी है, इस कारण से बाजारों में मंदी का माहौल है। उपभोक्ता अधिकांश बेहद जरूरी सामान ही खरीद रहे हैं और दिवाली त्योहार की खरीद से बच रहे हैं। लोगों ने बड़ी मात्रा में रियल एस्टेट और सोने में निवेश कर रखा है और इन दोनो क्षेत्रों में मंदी के कारण से उनका पैसा ब्लॉक हो गया है।

दूसरी ओर, व्यापारियों ने अपना पैसा स्टॉक में निवेश कर दिया जिसके कारण उनका पैसा भी ब्लॉक हो गया है। ई-कामर्स कंपनियों के सरकार की नीतियों की धज्जियां उड़ाते हुए बड़ी मात्रा में डिस्काउंट देकर सामान बेचने का भी विपरीत प्रभाव बाजारों के व्यापार पर पड़ा है। ऊपर से जीएसटी से उपजे भ्रम ने बाजारों में अफरा-तफरी फैला रखी है और व्यापारी परेशान है। त्योहार से जुड़े अधिकांश सामान पर कर की दर 28 फीसद होने के कारण उपभोक्ता इतनी ज्यादा कर दर देना नहीं चाहता। बाजारों के माहौल को देखते हुए लगता ही नहीं की देश का इतना बड़ा त्योहार पास है और यदि यही हाल रहा तो इस बार व्यापारियों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ेगा । इलेक्ट्रॉनिक्स, रसोईघर का सामान, घड़ियां, उपहार, मिठाइयां, सूखे मेवे, घर सजाने का सामान, बिजली का सामान, कपड़, फर्नीचर आदि कुछ ऐसे क्षेत्र हैं जो मंदी की सीधी मार झेल रहे हैं। देश में त्योहारी मौसम पहले नवरात्र से शुरू होकर 14 दिसंबर तक चलता है और फिर दोबारा 14 जनवरी से शुरू होकर अप्रैल तक चलता है और इसी बीच दिसंबर में क्रिसमस और नव वर्ष का सीजन भी आता है।

 

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