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विकलांगता की वर्तमान सात श्रेणियों को बढ़ा कर 19 करने की तैयारी

विकलांगजन अधिकार विधेयक के अंतर्गत आने वाली विकलांगता की वर्तमान सात श्रेणियों को बढ़ा कर 19 किया जा रहा है। सरकार का इरादा बजट सत्र के दूसरे चरण में इस विधेयक को संसद में पेश करने का है।

Author नई दिल्ली | March 5, 2016 2:33 AM
मंत्री थावरचंद गेहलोत (File PHoto)

विकलांगजन अधिकार विधेयक के अंतर्गत आने वाली विकलांगता की वर्तमान सात श्रेणियों को बढ़ा कर 19 किया जा रहा है। सरकार का इरादा बजट सत्र के दूसरे चरण में इस विधेयक को संसद में पेश करने का है। सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री थावरचंद गेहलोत ने गुरुवार को राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान बताया कि कानून के अंतर्गत डिस्लेक्शिया को वर्गीकृत विकलांगता में शामिल नहीं किया गया है। हमने एक नया मसौदा विधेयक तैयार किया है जिसके अंतर्गत विकलांगता की वर्तमान सात श्रेणियों को बढ़ा कर 19 किया जा रहा है। इन श्रेणियों में डिस्लेक्शिया, डाउन सिन्ड्रोम, आॅटिज्म आदि को शामिल किया जाएगा।

उन्होंने पूरक प्रश्नों के जवाब में बताया, ‘गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक अंतर मंत्रालयी समूह बनाया गया है जिसकी कुछ बैठकें हो चुकी हैं और इस माह के आखिर में एक और बैठक होने की संभावना है। हमारी कोशिश है कि विकलांगता की 19 श्रेणियों को कानून में शामिल किया जाए ताकि सभी पीड़ितों को लाभ मिल सके। हम संसद के वर्तमान बजट सत्र के दूसरे चरण में इस नए विधेयक को लाने के लिए प्रयासरत हैं।’
गेहलोत ने बताया कि सरकार ने बच्चों में डिस्लेक्शिया जैसी विकलांगताओं का शीघ्र पता लगाने और इलाज करने के लिए डाक्टरों और राज्य मंत्रियों की एक समिति गठित की है। उनके पार्टी सहयोगी तरूण विजय ने कहा कि इस मुद्दे पर राजनीतिक नजरिए से अलग हट कर विचार करना चाहिए और डिस्लेक्शिया से पीड़ित बच्चों को मानसिक रूप से मंद बच्चे नहीं समझा जाना चाहिए।

तरूण विजय ने यह भी कहा कि डिस्लेक्शिया से पीड़ित बच्चों की संख्या करीब एक करोड़ है लेकिन उत्तराखंड और कहीं भी उनके लिए शैक्षिक सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने ऐसे बच्चों के लिए विशेष शैक्षिक, चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराए जाने की मांग की। कांग्रेस के आनंद शर्मा और सपा की जया बच्चन ने कहा कि डिस्लेक्शिया से पीड़ित बच्चों को मानसिक मंदता से पीड़ित बच्चे नहीं समझा जाना चाहिए क्योंकि समय रहते समस्या का पता चलने पर इन बच्चों का इलाज किया जा सकता है। शर्मा और जया ने डिस्लेक्शिया पीड़ित बच्चों का पता लगाने के लिए देश व्यापी अभियान चलाए जाने की मांग भी की।

जया ने यह भी कहा कि कुछ सदस्यों को भी डिस्लेक्सिया हो सकता है लेकिन उन्हें इसके बारे में जानकारी नहीं है। ऐसे बच्चों की मैपिंग के बारे में पूछे जाने पर गेहलोत ने कहा कि मंत्रालय ने अलग से कोई मैपिंग नहीं की है लेकिन विकलांगता से पीड़ित सभी बच्चों की अगले तीन साल में मैपिंग के जरिए पहचान करने की पहल की जा चुकी है। ऐसे बच्चों को यूनिवर्सल आइडेंटिटी कार्ड भी मुहैया कराए जा रहे हैं।
डिस्लेक्शिया पीड़ित बच्चों को मानसिक मंदता की श्रेणी में रखने पर कुछ सदस्यों के आपत्ति जताने पर सभापति हामिद अंसारी ने सुझाव दिया कि शब्दावली में सुधार किया जाए और संबद्ध सदस्यों को इस मुद्दे पर ध्यान आकर्षित करने के लिए सरकार को औपचारिक रूप से लिखना भी चाहिए।

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