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दिल्ली/एनसीआर में किराए का मकान मिलना टेढ़ी खीर

राजधानी दिल्ली और एनसीआर में नौकरी की तलाश तो पहले ही मुश्किल थी और अब घर की तलाश भी मुश्किल हो गई है।

Author नई दिल्ली | June 14, 2017 4:29 AM
दिल्‍ली विकास प्राधिकरण द्वारा बनाए गए फ्लैट्स। (Source: Express Archive)

सुमन केशव सिंह

राजधानी दिल्ली और एनसीआर में नौकरी की तलाश तो पहले ही मुश्किल थी और अब घर की तलाश भी मुश्किल हो गई है। नोएडा से सटे दिल्ली के इलाकों जैसे पांडव नगर, लक्ष्मी नगर, मयूर विहार, न्यू अशोक नगर में किराए का मकान खोजने वालों को कई बार लिंग, क्षेत्र, जाति, धर्म, खानपान की आदत, पेशे और वैवाहिक स्थिति के आधार पर मुश्किल पेश आती है। मकान की तलाश करने वाले 50 से ज्यादा लोगों से जब जनसत्ता ने बात की तो यह साफ हुआ कि इनमें से लगभग सभी को किसी न किसी प्रकार के भेदभाव का सामना करना पड़ा है।
देखिए हम नहीं जानते कौन क्या है, कहां से आया है। दिल्ली में आए दिन ऐसे ही घटना होती रहती हैं। मुस्लिमों से समस्या नहीं। लेकिन वे सही हैं इसकी गारंटी कौन लेगा?
-महेंद्र सिरोही, मकान मालिक, न्यू अशोक नगर
विकास, प्रॉपर्टी डीलर

कामकाजी लड़कियां

बिहार से आई सुरभि सिंह को दिल्ली में कई मकान मालिकों ने यह कहकर मना कर दिया कि हम लड़कियों को कमरा नहीं देते हैं। बकौल सुरभि मकान मालिक कभी लड़की होने, तो कभी कामकाजी होने, तो कभी अविवाहित होने की बात कहकर किराए पर कमरा देने से मना कर देते हैं। गोरखपुर की गरिमा सिन्हा को काफी मुश्किलों के बाद किराए पर कमरा मिला। गरिमा को कमरा इसलिए नहीं मिल रहा था कि वे प्रियंका चौहान अपनी मित्र ्के साथ मयूर विहार की पॉश कॉलोनी में किराए कमरा खोज रही हैं। वे एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करती हैं। प्रियंका के अनुसार मकान मालिक उन्हें इसलिए कमरा देने से मना कर रहे हैं क्योंकि वह कामकाजी महिला हैं और शादीशुदा भी नहीं हैं। फिर उन्हें रात्रि पाली में नौकरी करनी पड़ती है। पेशे से परेशानी का एक और उदाहरण तरुण शर्मा हैं। उन्होंने बताया कि नोएडा की सेक्टर 12 की एक कालोनी में उन्हें घर पसंद आया, लेकिन मकान मालिक ने कहा कि वे मीडिया संस्थानों में काम करने वालों को नहीं रखते।
क्षेत्र विशेष व मांसाहार

क्षेत्र विशेष और मांसाहार भी वजह
पेशे से निजी बैंक के एक अधिकारी सुरेश साहू बताते हैं कि दिल्ली के अशोक नगर इलाके में अपने भाई के लिए कमरा तलाश रहे हैं। उन्होंने कहा कि इलाके के कुछ मकान मालिकों ने बिहार का होने की वजह से कमरा देने से मना कर दिया। लक्ष्मी नगर में भी कुछ मकान मालिक बिहार का होने और तो मांसाहारी होने को कारण बताकर मना कर चुके हैं। बिहार के औरंगाबाद के मुकेश शर्मा की भी यही समस्या है।

धार्मिक आधार

मीडिया संस्थान से जुड़े पटना के सैयद इरशाद हुसैन को भी दो महीने तक दिल्ली में किराए पर कमरे के लिए खाक छाननी पड़ी। इस दौरान मित्रों ने उनकी मदद की और अंत में प्रॉपर्टी डीलर की मदद से उन्हें मकान मिल सका। उनका कहना है मजहब भी किराए के आशियाने में रोड़ा बन जाता है।

बच्चे भी कारण

इलाहाबाद के पवन तिवारी ने बताया कि वे पत्नी और बच्चे को यहां नहीं ला पा रहे हैं। उनका बच्चा छोटा है और इस आधार उन्हें मकान देने से मना किया जा रहा है। वह ऐसा घर चाहते हैं जहां पारिवारिक माहौल हो लेकिन ऐसे परिवारिक माहौल वाले लोगों का बच्चे से परेशानी है।

 

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