DELHI UNIVERSITY ONLY 3 THOUSAND SEATS FOR 56 ADMISSION IN DELHI UNIVERSITY - Jansatta
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दिल्ली विश्वविद्यालय: 75 फीसद कॉलेजों के पास छात्रावास नहीं , 56 हजार एडमिशन के लिए 3 हजार 6 सौ सीटें

यह विडंबना ही कि जिस विश्वविद्यालय में दाखिले की कटआॅफ 100 फीसद तक जाती है, वहां के तीन चौथाई से ज्यादा कॉलेजों में छात्रावास की सुविधा नहीं है।

Author नई दिल्ली | June 18, 2017 12:01 AM
दिल्ली विश्वविद्यालय।

देश के प्रतिष्ठित दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में दाखिला पाना जितना मुश्किल है, उससे ज्यादा कठिन है, यहां छात्रावासों में जगह पाना। यह विडंबना ही कि जिस विश्वविद्यालय में दाखिले की कटआॅफ 100 फीसद तक जाती है, वहां के तीन चौथाई से ज्यादा कॉलेजों में छात्रावास की सुविधा नहीं है। जबकि हर छात्र संघ चुनाव में छात्रावास मुद्दा बनता रहा है। फिर चाहे एनएसयूआइ डीयू छात्र संघ चुनाव जीते या एबीवीपी। छात्रावास की समस्या जस की तस बनी रहती है। जमीन होने के बावजूद छात्रावास कॉलेजों की वरीयता सूची से गायब हैं। इस वजह से डीयू में पढ़ने वाले हजारों छात्र पीजी के नाम पर हो रही लूट के शिकार हो रहे हैं। डीयू के आसपास के इलाकों में छात्र 10 से 15 हजार रुपए का खर्च केवल रहने के लिए करते हैं। छात्राओं के लिए यह स्थित और भी विकट है। यहां यह बताना गैरवाजिब नहीं होगा कि छात्रावास के अधिकार को शिक्षा के अधिकार के तुल्य मान्यता देने के मुद्दे पर कई छात्र व संगठन कैंपस में हफ्तों अनशन और भूख हड़ताल कर चुके हैं। गौरतलब है कि छात्रावास की समस्या जेएनयू और जामिया मिल्लिया इस्लामिया में भी है लेकिन जामिया ने इसे प्राथमिकता पर लिया है। कई छात्रवासों का निर्माण हुआ है और दो छात्रावास नए बन रहे हैं। जेएनयू में 75 फीसद छात्रों को छात्रावास मिलता है। जेएनयू में करीब 8,700 छात्रों के बीच छह हजार छात्रावास की सीटें हैं।

डीयू में दाखिले के बाद रहने का खर्च उठाना छात्रों के लिए सबसे बड़ी समस्या है। ज्यादातर छात्र छात्रावास में सीट पाने की चाहत रखते हैं, मगर डीयू के 64 में से सिर्फ 16 कॉलेजों में छात्रावास की सुविधा है। 75 फीसद कॉलेजों के छात्रों को रहने का बंदोबस्त खुद ही करना है। आंकड़ों पर नजर डालें तो डीयू के 16 कॉलेजों और एक विश्वविद्यालय के हॉस्टल मिलाकर प्रथम वर्ष के छात्रों लिए कुल 3,624 सीटें हैं। इसमें कॉलेजों की 2,970 सीटें जबकि डीयू का अपने एक महिला हॉस्टल (स्नातक स्तरीय) में कुल 630 सीटें हैं। अगर डीयू के पूरे छात्रों के आंकड़ों पर नजर डाले तो यहां स्नातक-स्नातकोतर और शोध वाले सभी छात्रों को मिलाकर जमघट करीब एक लाख 80 हजार तक होती है और सभी तरह के छात्रावासों को मिला लें तो इनमें सीटों की संख्या 6,250 से अधिक नहीं हैं। यदि डीयू में पढ़ने वाले सभी छात्रों से डीयू में मौजूद छात्रावासों की तुलना करें तो यह अनुपात 1:30 का बैठता है। जबकि केवल स्नातक के प्रथम वर्ष में दाखिला पाने वाले के छात्रों और उनके लिए आवंटित छात्रावास का अनुपात 1:16 का बैठता है। ‘दिल्ली विश्वविद्यालय एक्ट-1922 का खंड 33’ सभी छात्रों के लिए छात्रावास की सुविधा की वकालत करता है। लिहाजा इस नजरिए से छात्रावासों की सहुलियत देना कॉलेज के प्रशासनिक उतरदायित्व का हिस्सा है। खासकर ऐसी स्थिति में जब करीब आधे छात्र यहां दिल्ली से बाहर के होते हैं। लेकिन छात्रावास की कमी के कारण कॉलेजों ने इस बाबत कड़े नियम बना रखे हैं। मसलन उन आवेदकों को बिल्कुल छात्रावास नहीं मिलता है, जिनके अभिभावक दिल्ली में रहते है। इसके अलावा छात्रावास भी मेरिट के आधार पर मिलता है।

आमतौर पर विषयवार शीर्ष स्थान पाने वालों को प्राथमिकता दी जाती है। दाखिले के बाद कॉलेजों में इसके लिए अलग से आवेदन लिया जाता है। बेस्ट फोर वाला सूत्र यहां भी लगाया जाता है। फिर मेरिट के आधार और कॉलेज के अपने नियमों के आधार पर छात्रावास दिया जाता है। कुल मिलाकर मतलब हर पाठ्यक्रम से शीर्ष दो-तीन छात्रों को ही छात्रावास मिल पाता है। डीयू में लड़कियों के छात्रावास की सुविधा लड़कों के मुकबले अधिक है। लड़कियों के लिए छात्रावास में कुल 2,065 सीटें हैं जबकि लड़कों के लिए 905 सीटें हैं। 16 में 8 कॉलेज ऐसे हैं जिसमें सिर्फ लड़कियों के लिए छात्रावास हैं। चार ऐसे हैं जिसमें लड़के और लड़कियों दोनों के लिए छात्रावास हैं। महज तीन कॉलेज हंसराज, हिंदू, किरोड़ीमल में सिर्फ लड़कों के लिए छात्रावास उपलब्ध हैं।छात्रावास के आवंटन में भी आरक्षण की व्यवस्था लागू होती है। 15 फीसदी सीटें अनुसूचित जाति और 7.5 फीसद सीटें अनुसूचित जनजाति वर्ग के छात्रों के लिए आरक्षित होती है।

 

 

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