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दिविवि एडमिशन: ‘बेस्ट फोर’ की उलझन में सहायता केंद्रों पर भारी भीड़

दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिले की होड़ में लगे छात्रों को ‘बेस्ट फोर’ के चयन की जल्दीबाजी उन्हें उलझन में डाल सकती है। दाखिले काउंटर पर इस बाबत छात्रों की उलझनें साफ दिख रही है। डीयू के नए नियम को समझने के लिए सहायता...

Author June 8, 2015 9:41 AM
दिल्ली विश्वविद्यालय ने इस बार ‘बेस्ट फोर’ के अंकन को ज्यादा पारदर्शी बनाने का दावा किया गया है।

प्रियरंजन

दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिले की होड़ में लगे छात्रों को ‘बेस्ट फोर’ के चयन की जल्दीबाजी उन्हें उलझन में डाल सकती है। दाखिले काउंटर पर इस बाबत छात्रों की उलझनें साफ दिख रही है। डीयू के नए नियम को समझने के लिए सहायता केंद्र पर भारी भीड़ है। विवि प्रशासन का कहना है कि बेस्ट फोर का अंकन करते समय केवल अच्छे अंक ही न देखे छात्र बल्कि आनर्स की चाहत के साथ विवि के नियम कानून की जानकारी भी रखें। मसलन 12वीं में बिना गणित पढ़े बीकाम में दाखिले का आवेदन उन्हें उलझन में डाल देगा। इसी प्रकार हिंदी और अंग्रेजी विषयों में आनर्स के लिए इनका 12वी में अध्ययन जरूरी है। नहीं तो बेस्ट फोर में कटौती कर दी जाएगी। इतना ही नहीं इन्फॉर्मेटिक्स प्रैक्टिस (आइपी) को एक वैकल्पिक विषय के तौर पर नहीं माना जाएगा। हालांकि अभिभावकों और छात्रों के एक वर्ग ने बी कॉम पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए गणित को अनिवार्य करने के दिल्ली विश्वविद्यालय के फैसले की आलोचना की है। वे इसे लागू करने से पहले कम से कम दो साल की छूट चाहते हैं।

दरअसल, डीयू में दाखिले की कुंजी है – ‘बेस्ट फोर’ का चयन। इस बार ‘बेस्ट फोर’ के अंकन को ज्यादा पारदर्शी बनाने का दावा किया गया है। हालांकि हर साल की तरह इस बार भी ‘बेस्ट फोर’ में एक भाषा और तीन मुख्य शैक्षणिक विषय के अंक ही मान्य हैं लेकिन इस बार मुख्य शैक्षणिक विषय (एकेडमिक सब्जेक्ट) की सूची विवि ने तैयार की है। अगर आवेदक इस सूची से इतर विषय को ‘बेस्ट फोर’ में शामिल करता है तो उसके ‘बेस्ट फोर’ के नंबर ढाई फीसद कम किए जाएंगे। विश्वविद्यालय ने साफ किया है कि केवल उन्हीं छात्रों के ‘बेस्ट फोर’ के नंबर ढाई फीसद कम किए जाएंगे जो विषय मुख्य शैक्षणिक विषयों की सूची में नहीं होंगे। ऐसे में यदि आवेदक एकेडमिक विषय के स्थान पर बेस्ट फोर में बारहवीं में पढ़ने वाले किसी अन्य विषय को शामिल करता है तो संबंधित विषय में उसके 10 अंक काटे जाएंगे। जहां तक एकेडमिक व नॉन एकेडमिक विषयों की बात है तो डीयू में उपलब्ध करीब 40 ऑनर्स कोर्सेज से संबंधित सभी विषय एकेडमिक विषय के तौर पर मान्य होंगे। होम साइंस को भी इस बार इस श्रेणी में रखा गया है जबकि फिजीकल एजुकेशन व म्यूजिक विषय को इन कोर्सेज में ऑनर्स कोर्स करने पर ही एकेडमिक विषय माना जाएगा।

इस बार उन विद्याथिर्यों के लिए भी अच्छी खबर है जो एकेडमिक विषयों से इतर बारहवीं म्यूजिक, फिजीकल एजुकेशन सरीखे नॉन एकेडमिक विषयों के साथ पास करते हैं। अब इन विषयों को भी डीयू में मात्र 10 अंकों की कटौती के साथ बेस्ट ऑफ फोर में शामिल किया जा सकेगा। नियमों के मोर्चे पर आवेदकों को बड़ी राहत देते हुए इस बार कॉलेजों के पेचीदा नियमों की छुट्टी कर केवल दो कॉलेजों सेंट स्टीफंस व जीसस एंड मेरी को छोड़कर सभी में दाखिले का एक ही नियम लागू होगा।

बहरहाल अभिभावकों और छात्रों के एक वर्ग ने बी कॉम पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए गणित को अनिवार्य करने के दिल्ली विश्वविद्यालय के फैसले की आलोचना की है। वे इसे लागू करने से पहले कम से कम दो साल की छूट चाहते हैं। उन्होंने सीबीएसई अध्यक्ष, डीयू के कुलपति और मानव संसाधन विकास मंत्री को लिखे अलग अलग पत्रों में इन छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों ने इस मुद्दे पर उनके दखल की मांग की है। विश्वविद्यालय ने यह भी कहा कि इन्फॉर्मेटिक्स प्रैक्टिस (आइपी) को एक वैकल्पिक विषय के तौर पर नहीं माना जाएगा। कई अभिभावकों ने सीबीएसई अध्यक्ष और डीयू कुलपति को इस बाबत पत्र लिखा है। बहरहाल, डीयू छात्र कल्याण के डीन जेएम खुराना ने कहा कि इस मुद्दे पर वरिष्ठ अधिकारियों वाली 23 सदस्यीय दाखिला समिति की सर्वसम्मति से ही यह फैसला लिया गया।

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