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‘पढ़ने के अधिकार’ और ‘जगह की कमी’ के बीच विवादों में फंसा डीयू का केंद्रीय पुस्तकालय

दिल्ली विश्वविद्यालय के मुख्य लाईब्रेरी में बेटियों को पढ़ने के लिए लाईब्रेरी में जगह नहीं मिलने का मामला सामने आया है!

Author July 26, 2015 14:15 pm

एक तरफ देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अपील पर ‘बेटी पढ़ाओ-बेटी बढ़ाओं’ के नारे को साकार करने में जुटा है वहीं दूसरी ओर दिल्ली विश्वविद्यालय के मुख्य लाईब्रेरी में बेटियों को पढ़ने के लिए लाईब्रेरी में जगह नहीं मिलने का मामला सामने आया है!

इन दिनों विश्वविद्यालय के उतरी परिसर स्थित कला संकाय में यह चर्चा का विषय बन गया है। मामला केंद्रीय संदर्भ पुस्तकालय के अध्यक्ष (सीआरएल) डीवी सिंह के खिलाफ हैं और विश्वविद्यालय होते हुए मौरिस नगर थाना तक पहुंच चुका है। दरअसर लड़ाई ‘लाईब्रेरी में पढ़ने के अधिकार’ और ‘बैठने की जगह की कमी’ के बीच है। जिसकी प्रणेता बनीं है, सालों से डीयू में अस्थायी तौर पर कई कॉलेजों मं पढ़ा चुकीं-डॉ पूजा खिल्लन।

पूजा किरोड़ीमल कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से पीएचडी कर अध्यापन का कार्य कर चुकीं हैं। रामजस कॉलेज, जीसस एंड मैरी कॉलेज, जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज में कक्षाएं लेने से लेकर विभिन्न विषयों को संबंधित मंचों पर उठाने तक के लिए वें केंद्रीय संदर्भ पुस्तकालय का उपयोग लंबें से करती रहीं है। लेकिन 2012 में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित पूजा सहित कई लोगों के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय के मुख्य लाईब्रेरी के द्वार अब बंद हैं। पूजा का आरोप है कि उन्हें ‘खास’ वजह से प्रताड़ित किया जा रहा है।

इस बाबत ‘जनसत्ता’ ने लाईब्रेरिटन डीवी सिंह से बात की। उन्होंने आरोप को निराधार बताया और दावा किया कि प्रशासनिक नजरिए से सौ से ज्यादा लोगों के खिलाफ ऐसी कार्यवाई की गई है, जो विश्वविद्यालय के निगम के अनुरूप इस लाईब्रेरी उपयोग के योग्य नहीं हैं। इसके लिए विश्वविद्यालय का वर्तमान में छात्र होना, शोधार्थी होना, स्थायी अस्थाई शिक्षक होना जरूरी है। इसकी जानकारी बेवसाईट पर हैं। यहां जितनी जगह है उससे ज्यदा संख्या में पहले से ही लोग यहां पंजीकृत हैं। लिहाजा वे पूर्व छात्रों या पीएचडी पूरी कर चुके लोगों को ‘स्कॉलर फ्लोर’ पर बैठने की अनुमति नहीं दे सकते।

उन्होंने दावा किया कि दर्जनों लोगों के परिचय पत्रों को जिनकी मियाद खत्म हो गई थी, या नियमाकुल नहीं थे उसे जब्त किया गया हैं। बावजूद इसके इन लोगों को उनके ‘करियर’ को ध्यान में रख कर केवल हिदायत देकर छोड़ा गया है। पूजा के इस सवाल पर कि ‘अभी भी कई लोग वहां वैठे रहे हैं’, डीवी सिंह ने कहा कि उनके खिलाफ भी वे कार्यवाई कर रहे हैं।

पूजा के पढ़ाई के सवाल पर उन्होंने कहा कि यदि किसी विभाग या किसी कॉलेज में पढ़ाने का पत्र वों दें तो उनका स्वागत है। लंबे समय से इसी लाईब्रेरी मं पढ़ते रहने की शिकायती के दलील पर सिंह ने कहा कि तब नियमित शोधार्थियों की संख्या कम थी। अब वे जगह न मिलने पर शिकायती तेवर में रहते हैं। बहरहाल, पुलिस के आला अधिकारियों ने इस बाबत कहा कि हालाकि कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई है, लेकिन शिकायत पत्र मिले हैं।

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