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डीयू : ‘कमिंग सून’ का मतलब दस दिन!

डीयू ने 22 मई से आॅनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू थी। छात्रों का कहना है कि टैब-2 न खुलने से उन्हें बार-बार आवेदन फार्म खोलकर देखना पड़ा, जहां सिर्फ कमिंग सून लिखा हुआ दिखता है।

Author नई दिल्ली | June 1, 2017 03:34 am
दिल्ली विश्वविद्यालय।

तमाम विवादों पर विराम लगाते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय ने अपने आनलाइन दाखिला पोर्टल के अब तक बंद पड़े अनुभाग व पेज (टैब) बुधवार को खोल दिए। करीब दस दिनों से परेशान छात्रों के लिए यह राहत देने वाली खबर थी। आवेदक अधूरे फार्म भरकर अधर में लटके थे और दाखिला पोर्टल उन्हें ‘कमिंग सून’ का ढाढस दे रहा था। छात्र ना तो फीस भर पा रहे थे और ना ही फार्म को अंतिम रूप देकर जमा कर पा रहे थे। दिल्ली विश्वविद्यालय का हाई टेक ‘कमिंग सून’ 10 दिनों बाद आया और बुधवार शाम से छात्रों ने फीस भरनी शुरू की आनलाइन फार्म जमा कराने में सफलत हुए। यह बात अगल है कि बार बार साइबर कैफे जाकर फार्म भरने में कई छात्रों को 150 के बजाय 500 रुपए तक रुपए तक खर्च करने पड़ गए। फार्म भरकर राहत की सांस लेने वाले छात्रों ने कहा-डीयू के कमिंग सून का मतलब दस दिन!

बहरहाल इस संबंध में सवाल किए जाने पर डीयू के डीन छात्र कल्याण प्रोफेसर राजेश टंडन ने कहा कि सीबीएसई के बाद आइसीएसई के रिजल्ट का इंतजार था, जो गया है। इसके बाद डीयू के कंप्यूटर सेंटर को प्री-एडमिशन रजिस्ट्रेशन में ‘पेमेंट मोड’ खोलने के निर्देश दिए गए। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सीबीएसई से बारहवीं परीक्षा परिणाम की सॉफ्ट कॉपी मांगी थी। जिसे पाने और अपलोड करने ने में समय लगा। जबकि दबी जुबान से एक अधिकारी ने कहा दाखिला पोर्टल के साफ्टवेयर में कुछ तकनीकि खामी के कारण भी टैब-2 को सक्रिय करने में परेशानी भी आई। बता दें कि दिल्ली विश्वविद्यालय का दखिला सत्र करीब आधा बीत चुका है। लेकिन बुधवार दोपहर तक एक भी फार्म जमा नहीं हो सके थे। क्योंकि आनलाइन दाखिला पोर्टल में नौ अनुभाग व पेज (टैब) में से चार अनुभाग व पेज को विश्वविद्यालय ने बंद कर रखा है। जिन्हें भरने के लिए उन्हें दो या तीन बार साइबर कैफे में जाना पड़ा। छात्रों को यह भी नहीं बताया जा रहा था कि बंद रखे गए अनुभाग व पेज कब खुलेंगे। डीयू ने 22 मई से आॅनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू थी। छात्रों का कहना है कि टैब-2 न खुलने से उन्हें बार-बार आवेदन फार्म खोलकर देखना पड़ा, जहां सिर्फ कमिंग सून लिखा हुआ दिखता है।

रस्म अदायगी बन कर रह गया इस बार का सत्र
विवि का काउंसलिग सत्र इस बार बेतुका साबित हुआ है। यूजीसी का इस बाबत सर्कुलर डीयू में रस्मअदायगी से ज्यादा कुछ नहीं था। दस दिन के काउंसलिंग सत्र में मुख्य प्रश्न ‘बेस्ट फोर’ के अंकन का जवाब छात्र को नहीं मिला पाया। क्योंकि बेस्टफोर पर विश्वविद्यालय अपने नियम को औपचारिक रूप से घोषित नहीं किए हैं। यह स्थिति डीयू के उस निर्णय की देन है जिसमें विवि सीबीएसई के नतीजों के आने तक आनलाइन दाखिला पोर्टल में चार अनुभाग व पेज को विवि ने दसवें दिन खोले।

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