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दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव: NSUI ने किया शिक्षा, रोजगार और आवास के वादा

एनएसयूआइ के डूसू उम्मीदवार निखिल यादव, अर्जुन छपराना, विनिता ढाका और मोहित गिरीड़ ने घोषणापत्र जारी करते हुए मंगलवार को दावा किया है कि छात्र हित के कार्यों में उनका संगठन सबसे ऊपर रहा है।
Author September 7, 2016 04:55 am
दिल्ली यूनिवर्सिटी

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में इस बार कांग्रेसी छात्र संगठन अखिल भारतीय छात्र संगठन (एनएसयूआइ) अपने कार्यकाल की उपलब्धियों का तुलनात्मक आंकड़ा पेश कर ‘परिषद’ को घेरने की रणनीति से मैदान में उतरी है। एनएसयूआइ के डूसू उम्मीदवार निखिल यादव, अर्जुन छपराना, विनिता ढाका और मोहित गिरीड़ ने घोषणापत्र जारी करते हुए मंगलवार को दावा किया है कि छात्र हित के कार्यों में उनका संगठन सबसे ऊपर रहा है। इस बार विपक्षी संगठन को कामयाबी बताने के लिए कुछ नहीं है जबकि वे लगातार दो बार सभी सीटों पर रहे। अपनी नाकामयाबियों को छुपाने के लिए राष्ट्रवाद के नाम को इस्तेमाल करती है।

इस मौके पर कांग्रेस नेता व मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला, फिल्म अभिनेत्री महिमा चौधरी व एनएसयूआइ राष्ट्रीय अध्यक्ष अमृता धवन, उपाध्यक्ष भरत कुमार भी मौजूद थे। एनएसयूआइ के अध्यक्ष पद उम्मीदवार निखिल यादव ने कहा कि एनएसयूआइ छात्रों से सीधा जुड़ाव चाहती है। उनकी सभी समस्याओं का तत्काल समाधान चाहती है। इसके लिए नियमित रूप से कॉलेज और विश्वविद्यालय में ‘विद्यार्थी पंचायत’ आयोजित करेगी। इसके साथ ही विश्वविद्यालय स्तर पर ‘केंद्रीय सहायता एवं सूचना केंद्र’ की स्थापना करेगी। सचिव पद की उम्मीदवार विनीता ढाका ने कहा कि जीते तो छात्रों के लिए ‘शिक्षा के साथ रोजगार’ आंदोलन चलाया जाएगा। विश्वविद्यालय स्तर पर छात्राओं के लिए एक विशेष समिति बनवाने पर जोर होगा। उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार अर्जुन छपराना का कहना है कि एनएसयूआइ की ओर से ‘आवास का अधिकार’ मुद्दा बनाना लक्ष्य रहेगा ताकि हॉस्टल सुविधाओं को बढ़ाने के साथ दिल्ली किराया नियंत्रण कानून बनाने के लिए जमीन तैयार हो सके। एनएसयूआइ संयुक्त सचिव पद के उम्मीदवार मोहित गिरीड़ ने कहा-मैं एक खिलाड़ी हूं और खिलाड़ियों की समस्याएं समझता हूं। वे डीयू एक्ट के अनुच्छेद-33 के तहत छात्रों का स्वास्थ्य बीमा करने को लेकर लड़ेंगे।

एनएसयूआइ की राष्ट्रीय अध्यक्ष अमृता धवन ने कहा कि हमने अपने घोषणापत्र में वही वादे किए हैं जो हम पूरे कर सकें। एनएसयूआइ ने पहले भी काम किया है और आगे भी करेगी। डीयू के एनएसयूआइ कार्यकाल में छात्रसंघ का फंड तीन लाख से बीस लाख हुआ। छात्रों को परीक्षा की कॉपी देखने का अधिकार मिला। वहीं एबीवीपी के कार्यकाल में ये लोग ‘चाय पर चर्चा’ करने के नाम पर 6.5 लाख की तो चाय ही पी गए। शिक्षकों का मुंह काला किया। सीबीसीएस के नाम पर विश्वविद्यालय का शिक्षा ढांचा चरमरा दिया।
एनएसयूआइ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भरत कुमार ने कहा कि अब तो डीयू का हाल ऐसा हो गया है कि छात्रों को एक मूल अंकपत्र के लिए भी दर-दर भटकना पड़ रहा है। हमारा प्रयास रहेगा कि हम दिल्ली विश्वविद्यालय के पुराने अच्छे दिन फिर से लौटाए। दिल्ली विश्वविद्यालय को एक विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

 

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