ताज़ा खबर
 

‘आप’ और कांग्रेस के बीच तल्खी बढ़ी

दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा कि जो पार्टी राजीव गांधी सरीखे उम्दा इंसान और एक बेहतरीन प्रधानमंत्री को दिए गए भारत रत्न पुरस्कार को उनके मरणोपरांत वापस लेने की बात करती हो, उससे कांग्रेस के गठबंधन की बात सोचना भी बेमानी है।

Author नई दिल्ली | January 10, 2019 5:24 AM
दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित और सीएम अरविंद केजरीवाल।

आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस के बीच लोकसभा चुनाव के मद्देनजर गठबंधन प्रस्ताव के खटाई में पड़ने के आसार हैं। केजरीवाल की ओर से राजधानी की एक जनसभा में लोगों से कांग्रेस को वोट नहीं देने की अपील को लेकर भी कांग्रेस में भारी नाराजगी है। अब ऐसा माना जा रहा है कि कांग्रेस और ‘आप’ के बीच की तल्खी को कम करने में जुटे आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू भी दोनों दलों के बीच गठबंधन कराने में कामयाब नहीं हो पाएंगे। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने कहा कि जो पार्टी राजीव गांधी सरीखे उम्दा इंसान और एक बेहतरीन प्रधानमंत्री को दिए गए भारत रत्न पुरस्कार को उनके मरणोपरांत वापस लेने की बात करती हो, उससे कांग्रेस के गठबंधन की बात सोचना भी बेमानी है। उन्होंने कहा कि राजनीति में शिष्टाचार भी बड़ी चीज होती है। अलग-अलग राजनीतिक दल में होने का यह मतलब नहीं होता कि हम एक-दूसरे के प्रति सामान्य शिष्टाचार भूल जाएं। लेकिन आम आदमी पार्टी का व्यवहार यही बताता है कि उन्हें इन बातों से कोई लेना-देना नहीं है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन ने भी गठबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद की प्रबल दावेदार मानी जा रहीं दीक्षित का आम आदमी पार्टी से गठबंधन के खिलाफ खुलकर सामने आने से साफ है कि पार्टी में शीर्ष स्तर पर इस प्रकार की रणनीति बन रही है। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति में आप चुनाव हारते-जीतते रहते हैं लेकिन इसका मतलब यह तो नहीं होता कि हम हारने वाले को कुछ भी कह दें क्योंकि लोकतंत्र में फैसला जनता करती है। आम आदमी पार्टी की ओर से दिल्ली विधानसभा में कथित तौर पर एक प्रस्ताव लाकर पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को दिए गए भारत रत्न पुरस्कार वापस लेने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी जिसे बाद में विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने यह कह कर गलत करार दिया था कि इस प्रकार का कोई प्रस्ताव लाया ही नहीं गया था। चंद्रबाबू नायडू की ओर से कांग्रेस व अन्य दलों को एक मंच पर लाने की कवायद को लेकर पूछने पर कांग्रेस सूत्र ने कहा कि यह सही है कि उन्होंने मंगलवार को पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। अन्य विपक्षी दलों से भी उनकी मुलाकात हुई है। यह भी सही है कि इन मुलाकातों का मकसद भाजपा विरोधी दलों को एक मंच पर लाना है लेकिन अलग-अलग राज्यों में अलग किस्म का चुनावी गणित है। दिल्ली भी ऐसे ही राज्यों में शामिल है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार शाम आंध्र भवन जाकर नायडू से मुलाकात की थी। इससे पहले नायडू कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात कर आंध्र भवन लौटे थे। दोनों नेताओं के बीच की मुलाकात को आम आदमी पार्टी की ओर से भी एक सामान्य शिष्टाचार भेंट करार दिया गया लेकिन इससे पहले ‘आप’ सांसद संजय सिंह ने कहा था कि मुख्यमंत्री और पार्टी के राष्टÑीय संयोजक केजरीवाल नायडू के कहने पर ही विपक्षी दलों की बैठक में शामिल हुए थे।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App