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पूर्वी दिल्ली हिंसाः ‘वे तो सिर्फ प्रदर्शन कर रही थीं’, पिंजड़ा तोड़ ग्रुप की 2 सदस्यों को बेल दे बोला कोर्ट, पर पुलिस ने फिर कर लिया अरेस्ट

अदालत ने दोनों को यह कहते हुए जमानत दे दी कि उनपर लगाई गई आईपीसी की धारा 353 (लोक सेवक को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल) मेंटेनेबल नहीं है और वे केवल एनआरसी (NRC) और सीएए (CAA) के खिलाफ प्रदर्शन कर रही थीं।

पिंजरा तोड़ की सदस्य देवांगना कालिता और नताशा नरवाल। (indian express)

पूर्वोत्तर दिल्ली के जाफराबाद पुलिस स्टेशन की एक टीम द्वारा गिरफ्तार किए जाने के एक दिन बाद महिला छात्र संगठन, पिंजरा तोड़ के दो सदस्यों को दिल्ली की एक अदालत ने जमानत दे दी। दोनों सदस्यों को इस साल फरवरी में जाफराबाद में सीएए विरोधी प्रदर्शन में कथित भूमिका के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने दोनों को यह कहते हुए जमानत दे दी कि उनपर लगाई गई आईपीसी की धारा 353 (लोक सेवक को उसके कर्तव्य के निर्वहन से रोकने के लिए हमला या आपराधिक बल) मेंटेनेबल नहीं है और वे केवल एनआरसी (NRC) और सीएए (CAA) के खिलाफ प्रदर्शन कर रही थीं।

हालांकि, उन्हें फिर गिरफ्तार कर लिया गया। क्राइम ब्रांच की स्पेशल इनवेंस्टिगेशन टीम ने उन्हें हत्या, हत्या के प्रयास, दंगे और आपराधिक साजिश के आरोपों के तहत गिरफ्तार किया और 14 दिनों के लिए उनकी पुलिस हिरासत की मांग की। जिसके बाद अदालत ने आखिरकार उन्हें दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया।

पुलिस का दावा है कि दो महिलाएं, देवांगना कालिता (30) और नताशा नरवाल (32), उन लोगों में शामिल थीं, जिन्होंने 22-23 फरवरी को जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे एक एंटी-सीएए प्रोटेस्ट और रोड नाकाबंदी का आयोजन किया था। इस प्रोटेस्ट के बाद 23 फरवरी को बीजेपी नेता कपिल मिश्रा और उनके समर्थकों ने सीएए के समर्थन में रैली की। इसके एक दिन बार पूरे नॉर्थ ईस्ट दिल्ली में दंगे भड़क गए थे।’

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महिलाओं को स्पेशल सेल, जाफराबाद पुलिस स्टेशन और क्राइम ब्रांच SIT द्वारा तीन जांच का सामना करना पड़ रहा है। शनिवार को नरवाल से स्पेशल सेल के अधिकारियों द्वारा पूछताछ की जा रही थी जब जाफराबाद स्टेशन के अधिकारियों ने उसे उसके निवास से गिरफ्तार किया। जाफराबाद पुलिस स्टेशन की टीम ने उन्हें आईपीसी की धारा 186 और 353 के तहत गिरफ्तार किया। हालांकि, रविवार को उन्हें जमानत देते हुए, ड्यूटी मजिस्ट्रेट अजीत नारायण ने कहा कि “एफआईआर और केस फाइल के बहाने से, प्रथम दृष्टया धारा 353 के तहत अपराध बनाए रखने योग्य नहीं है।”

आदेश में कहा गया है “मामले के तथ्यों से पता चलता है कि आरोपी केवल एनआरसी और सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और आरोपी किसी भी हिंसा में शामिल नहीं थे। साथ ही, अभियुक्तों की समाज में मजबूत जड़ें हैं और वे शिक्षित हैं। अभियुक्त जांच के संबंध में पुलिस के साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं।”

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