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ठंडे कमरों से निकल आम लोगों के बीच पहुंचेगी दिल्ली पुलिस

पुलिस और जनता के बीच संवाद बढ़ाने और लोगों के मन से पुलिस का डर मिटाने के लिए दिल्ली पुलिस ने एक नई पहल की है।

Author May 15, 2018 5:06 AM
कभी थाने में बैठकर पुलिसकर्मियों के काम का जायजा लेने वाले थानेदार अब सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) के साथ बीट वाले पुलिसकर्मियों के इलाके में पहुंचकर सामूहिक रूप से बैठक कर रहे हैं।

पुलिस और जनता के बीच संवाद बढ़ाने और लोगों के मन से पुलिस का डर मिटाने के लिए दिल्ली पुलिस ने एक नई पहल की है। इसके तहत थानों के वातानुकूलित कमरे में बैठकर अपने अधीनस्थ पुलिसकर्मियों से दिनभर के कामों का ब्योरा (ब्रीफिंग) लेने वाले थानेदार अब सड़क, पार्क और मेट्रो स्टेशनों के बाहर या फिर ऐसी जगह काम करेंगे, जहां आम लोगों की भागीदारी हो। कभी थाने में बैठकर पुलिसकर्मियों के काम का जायजा लेने वाले थानेदार अब सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) के साथ बीट वाले पुलिसकर्मियों के इलाके में पहुंचकर सामूहिक रूप से बैठक कर रहे हैं। पुलिसवालों को अधिकारियों के साथ मिलकर काम करते देख इलाके के लोग भी पुरसुकून नजर आते हैं।

इस बाबत जब शाहदरा जिले की पुलिस उपायुक्त नुपुर प्रसाद से पूछा गया तो उनका कहना था कि थाने से बाहर निकलकर इलाके में ब्रीफिंग करने की वजह आम लोगों में पुलिस की दोस्ताना छवि बनाने के साथ-साथ आपराधिक प्रवृति के लोगों पर लगाम लगाना है। नुपुर प्रसाद कहती हैं कि एसएचओ और एसीपी ही नहीं, बल्कि वे खुद उपायुक्त के तौर पर गश्त में शामिल होकर आम लोगों में पुलिस का डर दूर करने और आपराधिक गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश करती हैं।

पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक ने की पहल

दिल्ली में झपटमारी, लूटपाट और बच्चों-महिलाओं व छात्राओं के साथ आए दिन हो रहे अपराधों के मद्देनजर पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक के निर्देश पर यह फरमान जारी किया गया है। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान उन अधिकारियों का हुआ है जो एसी कमरे से तब ही बाहर निकलते थे, जब उन्हें किसी तय जगह पर अपनी मौजूदगी दर्ज करानी होती थी। पुलिस मुख्यालय के इस निर्देश के मुताबिक, थानेदार थाने से बाहर पार्कों, सामुदायिक भवनों, मेट्रो स्टेशनों के बाहर या ऐसी जगह ब्रीफिंग लें, जहां स्थानीय लोगों की भागीदारी हो। ब्रीफिंग में थाने के दिनभर के कार्यों का लेखा-जोखा, दिए गए निर्देश का पालन, यातायात कानून का उल्लंघन करने वालों की धड़पकड़ के साथ-साथ इलाके में बढ़ने वाली अपराधिक वारदातों पर किस तरह लगाम लगे, इस पर चर्चा कर निर्देश दिया जाता है। पूर्वी दिल्ली के कई जिलों में बीते दो हफ्ते से ऐसी ब्रीफिंग का असर भी दिखने लगा है। कई बदमाश ब्रीफिंग के समय संदिग्ध रूप से दिख जाते हैं तो उनकी धड़पकड़ भी की जा रही है।

डडवाल के समय उछला था एसी कमरों का मामला

दिल्ली के पूर्व पुलिस आयुक्त वाईएस डडवाल के कार्यकाल में वातानुकूलित कमरों (एसी रूम) का मामला खूब उछला था। उस दौरान पुलिस मुख्यालय के सर्तकता विभाग अपने औचक निरीक्षण में पाया था कि थानेदार के कक्ष से लेकर आराम करने वाले कमरों (रेस्ट रूम) तक में एसी लगे थे। तब पुलिस आयुक्त ने यह निर्देश जारी किया था कि थानेदार, एसीपी और उनसे कनिष्ठ स्तर के कर्मचारियों के कमरे में एसी लगा पाया गया तो विभागीय कार्रवाई होगी। सतर्कता जांच के बाद कुछ थानेदारों और अधिकारियों पर एसी लगाने को लेकर गाज भी गिरी। हालांकि इस निर्देश को कब बदल दिया गया और थाने के एसएचओ और एसीपी के कमरे में धड़ल्ले से एसी चलने लगा, इसका पता किसी को नहीं है। इतना ही नहीं, एसएचओ की सुबह-शाम की ब्रीफिंग उनके एसी कमरे में होना भी आम हो गया।

‘आम लोगों के बीच दिखनी चाहिए पुलिस’

दरियागंज के मौजूदा एसएचओ मंगेश गेदाम शायद ऐसे पहले पुलिस इंस्पेक्टर हैं, जिन्होंने एसी कमरे में बैठकर कम ही ब्रीफिंग ली हो। साल 2011 में जब वे उत्तर-पूर्वी जिले में बतौर एटीओ तैनात थे, तो ज्योतिनगर व शाहदरा के बॉर्डर इलाके लोनी गोल चक्कर पर कॉम्बिंग ऑपरेशन (फ्लैग मार्च) चलाया करते थे। पुलिसवालों के साथ इलाके में गश्त और फिर संदिग्धों पर नजर रखना उनकी कार्यशैली का हिस्सा था। बाद में उन्होंने सागरपुर, कश्मीरी गेट में बतौर एसएचओ अपनी इस ब्रीफिंग को जारी रखा। इस कवायद के पीछे मंगेश का मानना है कि आम लोगों के बीच पुलिसवालों की मौजूदगी दिखे और बदमाशों व अपराधियों में डर पैदा हो, इसलिए उन्होंने ऐसी ब्रीफिंग शुरू की। वर्दी में एक साथ इतने पुलिसवाले जब इलाके में घूमेंगे तो निश्चित है कि बदमाश डरेंगे और आम लोगों को भी लगेगा कि पुलिस उनके साथ है।

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