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छवि सुधारने की जद्दोजहद में दिल्ली पुलिस

दिल्ली पुलिस इन दिनों नई-नई योजनाओं को लेकर चर्चा में है। वह आपके साथ-आपके लिए सदैव, के स्लोगन मौजूदा हालत में पुख्ता करने के लिए आपरेशन भरोसा, युवा..

दिल्ली पुलिस कमिश्नर बीएस बस्सी (पीटीआई फाइल फोटो)

दिल्ली पुलिस इन दिनों नई-नई योजनाओं को लेकर चर्चा में है। वह आपके साथ-आपके लिए सदैव, के स्लोगन मौजूदा हालत में पुख्ता करने के लिए आपरेशन भरोसा, युवा प्रहरी, सखी, शिष्टाचार, हिम्मत, आपरेशन मिलाप, एक बटन दबाएं, कानूनी सहायता जैसी अन्य योजनाओं से सुर्खियां बटोर रही है।

पुलिस आयुक्त भीमसेन बस्सी खुद जनप्रतिनिधियों की तरह जनता से मुखातिब हो रहे हैं। लेकिन लाख टके की बात यह है कि दिल्ली की जनता में इन योजनाओं का कितना प्रभाव पड़ा है? क्या पुलिस आयुक्त भीमसेन बस्सी पुलिस की छवि को सुधारने के लिए इस प्रकार की योजनाएं लाकर माथापच्ची कर रहे हैं ताकि जनता में पुलिस की खोती जा रही विश्वसनीयता को वापस लाने के साथ ही पुलिसिया छवि को दोस्ताना बनाया जा सके? क्या मुंबई के पुलिस आयुक्त राकेश मारिया की तरह दिल्ली के पुलिस आयुक्त भी अपनी छाप छोड़कर सेवा से जाना चाहते हैं?

करीब एक लाख पुलिस बलों के रहते पुलिस आयुक्त बस्सी ने सामुदायिक पुलिसिंग के लिए ‘युवा प्रहरी स्कीम’ को पीसीआर के साथ जोड़कर शुरू किया। 18 से 35 सालों के बीच के युवाओं को नेहरू युवा केंद्र संस्थान के साथ जोड़कर फिर प्रशिक्षण देकर पीसीआर के साथ सहभागी बनने का नाम युवा प्रहरी था। लड़के-लड़कियों को पीसीआर और जनता के बीच सेतु बनकर इस स्कीम को लागू करने का ध्येय रखा गया। इसी प्रकार केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के हाथों ‘हिम्मत’ ऐप की शुरुआत हुई। नौकरी पेशा परेशान महिलाएं हिम्मत से खुद का हिम्मत बढ़ा सके, इसका ध्येय रखा गया। अपना नाम, पता, मोबाइल फोन और कम से कम दो रिश्तेदारों और परिचितों के पते फोन में रखकर उसे हिम्मत से जोड़कर, एसएमएस कर कहीं भी, कभी भी परेशानी से छुटकारा दिलाने का नायाब तरीका हिम्मत को बताया गया। ‘वन टच अवे’ भी इसी से मिलती जुलती योजना है पर इसके उद्देश्य दूसरे हैं।

‘ऑपरेशन मिलाप’ की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। वे बच्चे जो अपने घरों से बिछुड़े हुए हैं, अपहरण कर लिए गए हैं या फिर रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों, धार्मिक जगहों, शरण स्थलों से गायब हैं तो उन्हें अपनों से मिलाने के लिए मिलाप चलाया गया। अपराध शाखा की यह योजना अब जिले की पुलिस भी चला रही है। बसों में, स्कूलों में, कालेजों में या अन्य सार्वजनिक जगहों पर जब छेड़छाड़ की घटनाएं बढ़ी तो फिर पुलिस ने ‘शिष्टाचार’ की शुरुआत की। इसी प्रकार ‘सखी’ को लागू किया गया। इन दोनों योजनाओं से सैकड़ों लोग शिकंजे में आए और इतने ही लोग चंगुल से मुक्त होने में सफलता पाई। इसी प्रकार कानूनी सहायता देने के लिए दिल्ली स्टेट लीगल सर्विस आथोरिटी के साथ मिलकर हर थाने में दो से तीन अधिवक्ता तैनात कर संवैधानिक अधिकारों में कानूनी सहायता के लिए यह योजना लाई गई।

करोलबाग में जब एक युवती को सरेआम एक युवक ने चाकू घोंपकर जान ले ली तो पुलिस आयुक्त ने ‘भरोसा’ की शुरुआत की। भरोसे को अमलीजामा पहनाने के लिए पुलिस आयुक्त भीमसेन बस्सी पिछले शुक्रवार को महरौली इलाके के छतरपुर पहाड़ी पर एक जनप्रतिनिधि की तरह जनता के सामने मुखातिब हुए। जनता के अनाप-शनाप प्रश्नों का करीने से जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली के कई ऐसे इलाके हैं जिनका विकास योजना के तहत नहीं हुई है। उन कॉलोनियों को अनधिकृत कहने की बजाए उन्होंने कहा कि ये कालोनियां खुद विकसित हुई हैं। बस्सी ने कहा कि ऐसी कालोनियों में संकरे रास्ते हैं। घरों में पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। इसलिए लोग सड़कों पर गाड़ी पार्क करने के लिए मजबूर हैं। सड़कों पर गैरकानूनी तरीके से गाड़ी पार्किंग के मुद्दे पर बस्सी ने कहा कि मेन कॉरिडोर में पुलिस की पेट्रोलिंग होती है, लेकिन दिल्ली पुलिस के पास इतने संसाधन नहीं हैं कि हर मोहल्ले में ऐसे लोगों का चालान काट सके।

बस्सी ने कहा कि हत्या और बलात्कार जैसे अपराध को छोड़ बाकी तमाम मामलों में लोग फोन से ही एफआइआर दर्ज करा सकते हैं। यह सुविधा दो महीने के भीतर शुरू हो सकती है। उन्होंने कहा कि साल 2012 में जहां बलात्कार के 300 मामले दर्ज किए गए वहीं इस घटना के बाद 3500 से ज्यादा बलात्कार के मामले सामने आए। उन्होंने कहा कि अब लोग ऐसे मामलों को दबाते नहीं हैं। उन्होंने कहा कि बलात्कार जैसे संवेदनशील मामलों में लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्ती होगी।

* कई नई योजनाओं के सहारे लोगों का भरोसा जीतने की कोशिश
* भरोसा, युवा प्रहरी, सखी, शिष्टाचार, हिम्मत, आपरेशन मिलाप, एक बटन दबाएं, कानूनी सहायता जैसी योजनाओं पर अमल

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