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बिना इजाज़त होर्डिंग्स लगाने पर दर्ज होगी एफ़आईआर, दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट से कहा

अदालत में मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को है।
Author नई दिल्ली | October 2, 2016 14:24 pm
दिल्ली उच्च न्यायालय (फाइल फोटो)

शहर की पुलिस ने दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया है कि अगर कोई बिना इजाजत के पोस्टर आदि लगाता है तो उसको संपत्ति के विरूपण (बिगाड़ना) के आरोप में अभियोजन का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि ऐसी गतिविधियों के खिलाफ शिकायतें आने पर प्राथमिकियां दर्ज की जाएंगीं। न्यायमूर्ति बदर दुर्रेज अहमद और न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार की पीठ के सामने पुलिस ने अपनी बात रखी। पीठ एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी की ओर से दायर की गई जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में कहा गया है कि विज्ञापन, होर्डिंग्स, बैनर, पोस्टर, बिलबोर्ड रिहायशी इमारतों पर लगाए जा रहे हैं जो कि नीति और कानून का उल्लंघन है। दिल्ली पुलिस ने पीठ को बताया कि उसके कानूनी प्रकोष्ठ ने एक मेमो जारी किया है जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि संपत्ति के विरूपण मामलों में दिल्ली संपत्ति विरूपण रोकथाम अधिनियम के तहत प्राथमिकियां दर्ज की जाएंगी।

पहले की सुनवाई में नगर निगमों ने दावा किया था कि शहर में गैर कानूनी होर्डिंग्स को हटाने में सबसे बड़ी रुकावट दिल्ली पुलिस की निष्क्रियता है जिसके बाद दिल्ली पुलिस की यह प्रतिक्रिया आई। निगमों ने उच्च न्यायालय के सामने दलील दी थी कि जहां कहीं भी तुरंत कार्रवाई की जरूरत होती है तो शिकायतों को दिल्ली पुलिस के पास भेज दिया जाता है लेकिन उसकी (दिल्ली पुलिस की) ओर से आगे की कार्रवाई नहीं की जाती है। अदालत में मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को है।

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