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‘मकसद’ से भटकी दिल्ली पुलिस की साइकिल गश्ती योजना

हकीकत यह है कि जवान अपनी साइकिल को वाहनों पर ढो रहे हैं। कोई कार से तो कोई तिपहिया से साइकिल को ढो रहे हैं। सवाल है कि जब साइकिल ही जवानों की परवान नहीं चढ़ रही तो योजना क्या चढ़ेगी।

Author नई दिल्ली | July 24, 2017 04:01 am
दिल्ली पुलिस की ‘साइकिल पेट्रोलिंग’ पहल उद्देश्य से भटकती नजर आ रही है।

दिल्ली पुलिस की ‘साइकिल पेट्रोलिंग’ पहल उद्देश्य से भटकती नजर आ रही है। बदमाशों को बिना शोर मचाए आसानी से दबोचने के लिए पुलिस की इस अनोखी पहल से संकरी गलियों वाले इलाकों के साथ-साथ पार्कों के आसपास भी गश्त की योजना है। प्रथम चरण के 65 साइकिल सवार पुलिस के जवानों को केंद्रीय गृह राज्यमंत्री हंसराज की मौजूदगी में दिल्ली पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक ने काम पर लगाया था। लेकिन डेढ़ महीने के भीतर ही यह योजना हांफने लगी है। जिले के उपायुक्त, सहायक पुलिस आयुक्त और इंस्पेक्टर भले ही खुद भी साइकिल से गश्त करने का दावा करें लेकिन हकीकत यह है कि जवान अपनी साइकिल को वाहनों पर ढो रहे हैं। कोई कार से तो कोई तिपहिया से साइकिल को ढो रहे हैं। सवाल है कि जब साइकिल ही जवानों की परवान नहीं चढ़ रही तो योजना क्या चढ़ेगी।

इस बाबत विशेष आयुक्त और मुख्य प्रवक्ता दिल्ली पुलिस दीपेंद्र पाठक ने कहा कि अगर ऐसा कहीं हो रहा तो उसकी जांच की जाएगी। दोषियों पर विभागीय कार्रवाई होगी। अलबत्ता पाठक अपनी इस योजना और गश्त को लेकर आश्वस्त हैं। बीते 30 मई को यमुना स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स में साइकिल दस्ते को हरी झंडी दिखाकर रवाना करते हुए गृह राज्यमंत्री हंसराज ने कहा था कि साइकिल चलाने वाले लोग गरीब नहीं बल्कि स्वस्थ होते हैं और देश को स्वस्थ पुलिसकर्मियों की ही जरूरत है। प्रधानमंत्री की इच्छा को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने देश में सबसे पहले दिल्ली में इस योजना की शुरुआत की है। योजना सफल होने पर इसे दूसरे राज्यों में भी लागू की जाएगी। दरअसल, केंद्र की यह पहल विदेशों की पुलिसिंग की तर्ज पर दिल्ली में शुरू की गई। उद्देश्य था, बिना शोर गुल के शांत इलाकों, पार्कों, गलियों, सोसायटियों में जवान ड्यूटी साइकिल से कर सकें। फिलहाल यह तीन जिलों में लागू है। पुलिस का मानना था कि दिल्ली में ऐसे कई घनी आबादी वाला क्षेत्र हैं, जहां की संकरी गलियों में पुलिसकर्मी कार और मोटरसाइकिल से गश्त नहीं कर पाते। इसलिए साइकिल से उन इलाके में गश्त का सहारा लिया जा रहा है।

इसका फायदा यह होगा कि पुलिसकर्मी पार्कों में सट्टा खेलने वाले और संकरी गलियों का फायदा उठाकर भाग जाने वाले बदमाशों को आसानी से दबोच लेंगे। दिल्ली पुलिस ने पहले चरण में जिन 65 साइकिल को सड़कों पर गश्त के लिए उतारा था, उनमें 30 उत्तर-पूर्वी जिला, 20 पूर्वी जिला और 15 शाहदरा जिले में दी गई हैं। दो से पांच किलोमीटर तक गश्त करने की योजना में इन साइकिलों पर वायरलेस सेट, मोबाइल फोन के साथ अन्य सुरक्षा के सामान भी उपलब्ध कराए गए।इस बाबत पूर्वी दिल्ली के पुलिस उपायुक्त ओमवीर सिंह ने कहा कि उनके इलाके में नियमित पेट्रोलिंग हो रही है। समय मिलने पर वे खुद भी कल्याणपुरी, त्रिलोकपुरी और अन्य जेजे इलाके में गश्त करते हैं। उनके सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) भी कई इलाके में गश्त करते हैं। उनके इलाके में कोई धांधली नहीं हो रही। अन्य जिलों की उन्हें जानकारी नहीं है। इसी तरह उत्तर-पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त डॉ. एके सिंगला ने कहा कि एसएचओ की देखरेख में उनके यहां नियमित पेट्रोलिंग हो रही है। जबकि शाहदरा जिले की पुलिस उपायुक्त नुपुर प्रसाद का कहना है कि यमुना स्पोर्ट्स इलाके, दिलशाद कॉलोनी और अन्य सघन इलाके में पेट्रोलिंग हो रही है।

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