ताज़ा खबर
 

दिल्ली पुलिस की सालाना प्रेस कांफ्रेंस: कुल अपराध बढ़े, गंभीर मामले घटे

दिल्ली पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक का दावा है कि राष्ट्रीय राजधानी में गंभीर अपराध के मामले में कमी आई है। भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) के आंकड़े भले ही कुछ बढ़ते दिख रहे हों पर लूटपाट, डकैती, हत्या के प्रयास, दंगे, बलात्कार, सेंधमारी और झपटमारी जैसे मामलों में कमी दिख रही है।

Author नई दिल्ली | January 10, 2019 5:08 AM
प्रेस कांफ्रेंस में दिल्ली पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक और विशेष आयुक्त/क्राइम सतीश गोलचा (फाइल)

जनसत्ता संवाददाता

दिल्ली पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक का दावा है कि राष्ट्रीय राजधानी में गंभीर अपराध के मामले में कमी आई है। भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) के आंकड़े भले ही कुछ बढ़ते दिख रहे हों पर लूटपाट, डकैती, हत्या के प्रयास, दंगे, बलात्कार, सेंधमारी और झपटमारी जैसे मामलों में कमी दिख रही है। पटनायक यह भी मानते हैं कि दिल्ली की जनसंख्या जिस तरह से बढ़ रही है, उसमें छोटी-छोटी गलियों और भीड़-भाड़ वाली जगहों पर वारदातों पर लगाम लगाना पुलिस के लिए एक चुनौती हो गई है। पटनायक ने बुधवार को पुलिस का वार्षिक लेखा-जोखा पेश किया। पुलिस आयुक्त ने कहा कि हम आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने में नई तकनीकों के अपनाए जाने पर नजर रखे हुए हैं। यह हमारे लिए एक चुनौती तो है पर पुलिस ने भी अपनी कार्यशैली को उसी प्रकार से बदलना शुरू कर दिया है। यही कारण है कि हम पुलिसिंग को आम लोगों से जोड़कर राजधानी में अपराध पर लगाम लगा रहे हैं। हमने ज्यादा से ज्यादा गंभीर अपराधों का तुरंत खुलासा किया है। आधुनिक तकनीक और पारंपरिक बीट स्तरीय खुफिया जानकारी इसमें अहम भूमिका निभा रहे हैं। राजधानी की जनसंख्या पहले की तुलना में बहुत बढ़ी है।

असहिष्णुता और पारिवारिक कलह भी राजधानी में आपराधिक आंकड़ों की बढ़ोतरी की वजह बन रहे हैं। आयुक्त के मुताबिक, 2017 में जहां आइपीसी के 2 लाख 23 हजार 77 मामले दर्ज हुए, वहीं 2018 में यह आंकड़ा 2 लाख 36 हजार 476 पर पहुंच गया। दूसरी ओर, गंभीर अपराधों में डकैती, हत्या के प्रयास, लूटपाट, बलात्कार, सेंधमारी, झपटमारी और दंगों के मामलों में कमी आई है। इस प्रकार के मामलों में 11.72 फीसद की कमी दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि 2016 में 46, 2017 में 36 और 2018 में सिर्फ 23 मामले डकैती के दर्ज हुए। इसी तरह दंगे के दर्ज मामले 2016 में 79, 2017 में 50 के बाद बीते साल 23 दर्ज हुए। बलात्कार के मामले 2016 में 2065, 2017 में 2059 और 2018 में 2043 दर्ज हुए। हत्या में 2016 में 499, 2017 में 462 और बीते साल 2018 में यह आंकड़ा 477 पर पहुंच गया।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App