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आज एम्स में इलाज के लिए हो सकती है दिक्कत, 5000 नर्सों ने एक साथ लिया आकस्मिक अवकाश

यूनियन की मांग है कि मौजूदा भत्ता बढ़ाकर 7,800 रूपये कर दिया जाए। साथ ही बीमारियों और संक्रमण से जोखिम के चलते अलग से भत्ता दिया जाए। अलग सरकारी कर्मचारियों की तर्ज पर नाईट शिफ्ट के लिए अलग से पैसा दिया जाए।

Author Updated: March 17, 2017 1:01 PM
नर्स यूनियन की मांग है कि मौजूदा भत्ता बढ़ाकर 7,800 रूपये कर दिया जाए। साथ ही बीमारियों और संक्रमण से जोखिम के चलते अलग से भत्ता दिया जाए।

दिल्ली में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में करीब 5,000 नर्स शुक्रवार को एक साथ आकस्मिक अवकाश पर चली गईं। उन्होंने अस्पताल प्रशासन पर सातवें केंद्रीय वेतन आयोग की अनुशंसाओं को लेकर भेदभाव का आरोप लगाया है। नर्सों ने निर्वतमान उपनिदेशक (प्रशासन) वी. श्रीनिवास के नेतृत्व में बैठक की और उन्हें संशोधित वेतनमान दिया जाए तथा भत्तों में वृद्धि की जाए। नर्सों के एक साथ अवकाश पर चले जाने से यहां आपातकालीन सेवाएं प्रभावित होंगी। हालांकि, ओपीडी तथा अन्य चिकित्सा सेवाएं नियमित रूप से जारी रहेंगी। अस्पताल की एक वरिष्ठ नर्स ने बताया, ‘हमने प्रशासन से साफ कह दिया है कि यदि हमारा वेतन ग्रेड 4,600 रुपये से बढ़ाकर 5,400 रुपये नहीं किया जाता है तो हम 27 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।’

नर्सों ने अपने नर्सिंग भत्तों में वृद्धि की भी मांग की है। यूनियन ने यह भी कहा कि एम्स प्रबंधन के आश्वासन देने के बावजूद उनकी मांगों को एक साल से पूरा नहीं किया गया है। पिछले साल 26 फरवरी को एम्स प्रबंधन के कहने पर नर्स यूनियन ने अपनी सामूहिक छुट्टी वापस ली थी। वहीं एम्स प्रशासन के अनुसार, नर्सो का प्रस्ताव स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजा गया है।

यूनियन की मांग है कि मौजूदा भत्ता बढ़ाकर 7,800 रूपये कर दिया जाए। साथ ही बीमारियों और संक्रमण से जोखिम के चलते अलग से भत्ता दिया जाए। अलग सरकारी कर्मचारियों की तर्ज पर नाईट शिफ्ट के लिए अलग से पैसा दिया जाए।

गौरतलब है कि गुरुवार को एम्स प्रशासन और नर्सों के बीच मीटिंग हुई थी जो कि फेल हो गई थी। इस वजह से देर शाम नर्स यूनियन ने आकस्मिक अवकाश पर जाने के निर्णय ले लिया। एम्स नर्सिंग यूनियन के अध्यक्ष हरीश कुमार का कहना है कि हम एक साल से मांग कर रहे हैं, सातवें वेतन आयोग को लेकर नर्सों के साथ सरकार का व्यवहार सही नहीं रहा है, हमारी मांगों को कोई नहीं सुन रहा है। सभी को पत्र लिख चुके हैं, लेकिन किसी ने हमारी मांग को पूरा नहीं किया।

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