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दिल्ली नगर निगम: मलाईदार पदों के लिए पार्षदों ने शुरू की भागदौड़

नव गठित दिल्ली नगर निगमों में मेयर, उपमेयर, स्थायाी समिति के अध्यक्ष और सदन के नेता के बाद अब सत्तारूढ़ दल के पार्षदों में निगम की समितियों में जगह पाने की होड़ लगी हुई है।
Author नई दिल्ली | June 20, 2017 01:17 am
इस साल दिल्ली नगर निगम चुनाव होने हैं। (प्रतीकात्मक चित्र)

नव गठित दिल्ली नगर निगमों में मेयर, उपमेयर, स्थायाी समिति के अध्यक्ष और सदन के नेता के बाद अब सत्तारूढ़ दल के पार्षदों में निगम की समितियों में जगह पाने की होड़ लगी हुई है। निगम की कई महत्वपूर्ण समितियों में पार्षदों का कद बड़े पदाधिकारियों से कुछ ही कम आंका जाता है लिहाजा स्थायी समिति के सदस्यों, निर्माण समिति, शिक्षा समिति सहित नियुक्तियां, पदोन्नतियां और अनुशासनात्मक संंबंधी मामले की समिति के लिए पार्षद अपनी योग्यता और वरिष्ठता का बखान कर रहे हैं।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की इसमें कितनी चलेगी यह तो समितियों के गठन के बाद ही पता चलेगा पर कुछ पुराने पार्षदों की राय लेकर इन पदों पर नए पार्षदों को बैठाने की कवायद शुरू हो गई है।

सूत्रों का कहना है कि दिल्ली सरकार ने अभी तक अधिसूचना जारी नहीं की है जिससे निगम की समितियों के प्रधानों के पद की औपचारिकताएं शुरू नहीं हुई है। हालांकि यह बात तय है कि इस साल कांग्रेस पार्टी तीनों निगमों में विपक्ष के नेता पद से ही नहीं बल्कि कई समितियों में उपाध्यक्ष और सदस्यों से भी अछूते रह जाएंगी लेकिन वरिष्ठता को देखते हुए सत्तारूढ़ दल ने कुछ कांग्रेसी पार्षदों को भी समितियों में जगह देने का मन बना लिया है। बीते चुनाव में आम आदमी पार्टी नहीं थी लेकिन इस बार पार्टी ने 47 सीटें जीतकर निगम में अपनी हैसियत दूसरी पार्टी की बना ली है। हालांकि भाजपा 184 सीटें जीतकर तीनों निगमों में बहुमत में है। कांग्रेस को 30 सीटें मिली हैं जबकि अन्य के खाते में दस सीटें गई हैं। तीनों निगमों को 12 जोन में बांटा गया है। जोन अध्यक्ष अपने इलाके का बड़ा पद होता है और इसके लिए भी पार्षदों में दौड़ भाग जारी है। सभी जोन अध्यक्ष के लिए भाजपा के नए चुने पार्षद अपने आकाओं के यहां दस्तक देनी शुरू कर दी है। बीते चुनाव में इन तीनों निगमों में भाजपा के बाद कांग्रेस और बसपा के पार्षद थे लिहाजा कई पदों पर कांग्रेस तो कई पर बसपा ने अपनी पैठ बना ली थी।

निगम सूत्रों का कहना है कि स्थायी समिति के सदस्यों और वैधानिक और तदर्थ समितियों के अध्यक्ष, उपाध्यक्षों आदि पदों पर बैठे पार्षदों को निगम मुख्यालय में दफ्तर और सरकारी कर्मचारी ही नहीं बल्कि बैठकों में आयुक्त से लेकर उपायुक्तों और संबंधित आला अधिकारियों पर रौब दिखाने का मौका मिल जाता है। इन समितियों के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों को अपने मन मुताबिक सदस्यों के चुनाव का भी अपरोक्ष अधिकार होता है और वे समय-समय पर बैठकें आयोजित कर अधिकारियों पर जहां रौब दिखाने से बाज नहीं आते वहीं आर्थिक रूप में भी अपने लिए बैठक खर्च के रूप में बंदरबांट करते रहते हैं। सूत्रों का कहना है कि कुछ समितियों के प्रधानों को तो औचक दौरा और औचक निरीक्षण का ऐसा अचूक अधिकार मिला होता है कि वे पूरे साल भर इसी में अपनी व्यस्तता बनाए रखते हैं। निगम की वैधानिक समितियों में स्थाई समिति के बाद शिक्षा समिति के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, ग्रामीण क्षेत्रीय समिति और वार्ड समिति शामिल हैं।

 

 

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