delhi municpal election counselor approached ticket for their relative - दिल्ली नगर निगम चुनाव: परचा-पोस्टरों से रिश्तेदारों की दावेदारी, सीट गंवा चुके पार्षदों ने अपनाई नई रणनीति - Jansatta
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दिल्ली नगर निगम चुनाव: परचा-पोस्टरों से रिश्तेदारों की दावेदारी, सीट गंवा चुके पार्षदों ने अपनाई नई रणनीति

राजेंद्र को कांग्रेस पार्टी से इसलिए भी टिकट मिलने की उम्मीद है कि वे पिछले साल बगावत कर निर्दलीय जीते और फिर कांग्रेस में शामिल हो गए थे। यह सीट राजेंद्र के पक्ष में तब आर-पार की लड़ाई के बाद जीत के रूप में गई थी।

Author नई दिल्ली | March 23, 2017 4:35 AM
दिल्‍ली नगर निगम चुनाव।

परिसीमन के उलटफेर में नगर निगम में अपनी सीटें गंवा चुके पार्षदों ने पार्टी आलाकमान के पास अपने रिश्तेदारों की दावेदारी ठोकने के लिए परचा पोस्टर लगाना शुरू कर दिया है। दक्षिणी निगम के छतरपुर, सैदुल्लाजाब और भाटी में पोस्टरों और बैनरों से दावेदारी का आलम यह है कि अब जगह भी कम पड़ा गया है। इनमें कांग्रेस, भाजपा और आप के उम्मीदवार प्रमुख रूप से शामिल हो रहे हैं। अन्य छोटे दलों के उम्मीदवारों ने भी देखादेखी इसी तरह सीटों पर परचा, पोस्टर लगाकर उम्मीदवारी दिखानी शुरू कर दी है।  भाटी वार्ड से मौजूदा कांग्रेस के पार्षद राजेंद्र तंवर बीते उपचुनाव में निर्दलीय जीतकर कांग्रेस का दामन थाम लिया था। यह सीट करतार तंवर के आप से विधायक बनने से खाली हुई थी। राजेंद्र तंवर कांग्रेस में लंबे समय से चुनाव लड़ रहे थे पर उन्हें कभी भी जीत नहीं मिली। बीते साल उपचुनाव में वे पार्षद बने भी तो परिसीमन के बाद यह सीट महिला के लिए आरक्षित हो गई। इस सीट से भाजपा से चुनाव लड़ चुके ईश्वर प्रधान व सुंदर तंवर अपनी पत्नी के लिए तो मौजूदा पार्षद राजेंद्र तंवर अपनी पुत्रवधु राधिका तंवर के लिए ताल ठोक रहे हैं। ईश्वर को सीट इसलिए भी नहीं मिलेगी क्योंकि वे चुनाव हारे हुए उम्मीदवार हैं। हारे हुए उम्मीदवारों को पार्टी ने टिकट नहीं देने का फरमान जारी किया है। राजेंद्र को कांग्रेस पार्टी से इसलिए भी टिकट मिलने की उम्मीद है कि वे पिछले साल बगावत कर निर्दलीय जीते और फिर कांग्रेस में शामिल हो गए थे। यह सीट राजेंद्र के पक्ष में तब आर-पार की लड़ाई के बाद जीत के रूप में गई थी।

इसी तरह सैदुल्लाजाब सीट पर मौजूदा पार्षद रामपाल के हाथ से निकल गई है। भाजपा ने अपने किसी भी पार्षद को टिकट नहीं देने का फैसला किया है। यहां से भाजपा के संजय राठी की पत्नी जयश्री राठी ताल ठोक रहे हैं। जाट बहुल इस सीट पर जयश्री की दावेदारी इसलिए पक्की मानी जा रही हैं क्योंकि वे लगातार सामाजिक कार्यों में पति के साथ सक्रिय रही और कभी चुनाव नहीं लड़ा। इस बार भाजपा आलाकमान ने ऐसे ही समर्पित कार्यकर्ता को टिकट देने का फैसला किया है और इस बात को ही मंत्र मानकर जयश्री ने परचा पोस्टर लगाना शुरू कर दिया है। हालांकि सामान्य इस सीट से राजपुर कालोनी के रोहित भारद्वाज व संजय ठाकुर भी दावेदारी कर रहे हैं।दक्षिणी दिल्ली के छतरपुर सीट सबसे ज्यादा प्रतिष्ठा की सीट बनेगी। छतरपुर पूर्व विधायक ब्रह्म सिंह तंवर और बलराम तंवर का क्षेत्र रहा है। दोनों सालों तक इस सीट पर विराजमान रहे हैं। इस बार छतरपुर से मौजूदा निगम पार्षद अनिता तंवर का टिकट भाजपा के नाम पर कट गया है। अनिता चंद्रकिरण त्यागी के सीट पर जीती थीं। इस बार भाजपा लहर में मौजूदा सहित हारे और रिश्तेदारों को टिकट नहीं देने के फैसले में कई दिग्गजों की नींद उड़ी हुई है उनमें अनिता त्यागी भी हैं। पार्टी ने इस बार आरडब्लूए के प्रधान विनोद त्यागी की पत्नी आदेश त्यागी को टिकट देने का मन बना लिया है। बीते चुनाव में आदेश निर्दलीय चुनाव लड़ी थी और पार्टी के उम्मीदवारों को शिकस्त दी थी। उनके परचा-पोस्टर से सामाजिक कार्यों की झलक दिखाने की कोशिश शुरू हो गई है और पार्टी आलाकमान के यहां फार्मूले में खुद को फिट बैठाने का दावा भी। गुर्जर के एक गांव होने के कारण यहां से त्यागी समाज की बहुतायत देखने का भी प्रयास हो रहा है। यहां से कांग्रेस के पूर्व विधायक बलराम तंवर ने अपनी पुत्रवधु के लिए प्रचार शुरू कर दिया है जबकि आप ने पिंकी त्यागी का नाम घोषित कर रखा है।

 

 

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