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छात्र भी पूरी दिल्ली को कचराघर बनाने में शामिल हो गए

दोनों मुख्य दल एबीवीपी और एनएसयूआइ के छात्र नेताओं ने कैंपस के साथ-साथ आसपास के बस स्टैंड, फुटओवर ब्रिज, फ्लाईओवर और कॉलेज से लेकर कई सार्वजनिक स्थानों तक को पोस्टरों से पाट दिया।

Author September 11, 2017 04:59 am
एबीवीपी के छात्र प्रदर्शन के दौरान।

माइक की मारामारी
हाल ही में राजधानी के बवाना में विधानसभा उपचुनाव हुए। चुनाव प्रचार के दौरान सभी दलों ने पूरा जोर लगा रखा था। जीत का दम भर रही एक पार्टी के कथित तौर पर दमदार प्रत्याशी के चुनाव प्रचार की खातिर दिल्ली के नेताओं की फौज कम पड़ी, तो हरियाणा के नेताओं को भी बुलावा भेजा गया और वे आ गए भी। स्थानीय नेताओं को इनकी मदद और जरूरी इंतजाम में लगाया गया था। बवाना में एक जगह सभा चल रही थी और पड़ोसी हरियाणा से आए नेताओं ने समां बांध रखा था। तभी इंतजाम करने वाले नेताओं में से एक नेता को आदेश मिला कि जब तक हमलोग यहां रंग जमाने की कोशिश कर रहे हैं, तब तक तुम आगे वाले सभा स्थल पर चलो और वहां भाषण शुरू करो, तब तक हमलोग पीछे से आ जाएंगे। लेकिन वह नेता टस्स से मस्स नहीं हुआ, तो बड़े वाले नेताजी को गुस्सा आ गया। उन्हें लगा कि शायद वह जान-बूझकर उनकी अनदेखी कर रहा है। लिहाजा उन्होंने दोबारा अपने जूनियर नेता से आगे वाली सभा में जाने को कहा। आखिरकार छोटे नेता से नहीं रहा गया और उसने कहा कि चला तो मैं जाऊं लेकिन वहां जाकर करूंगा क्या, भाषण कैसे दूंगा, माइक तो एक ही है ना। आप यहां से भाषण खत्म करोगे, तभी हमारे आदमी इस माइक को दूसरे सभा स्थल पर ले जाकर लगाएंगे, तभी तो भाषण हो पाएगा। अब मुंह उतरने की बारी बड़े वाले नेताजी की थी। उन्होंने गुस्से में कहा कि क्या इसी तैयारी के दम पर चुनाव जीतने के दावे किए जा रहे हैं।

पोस्टरों का अंबार
डूसू चुनाव में क्या कोर्ट क्या लिंगदोह! छात्र नेताओं ने किसी की नहीं सुनी। दोनों मुख्य दल एबीवीपी और एनएसयूआइ के छात्र नेताओं ने कैंपस के साथ-साथ आसपास के बस स्टैंड, फुटओवर ब्रिज, फ्लाईओवर और कॉलेज से लेकर कई सार्वजनिक स्थानों तक को पोस्टरों से पाट दिया। हद तो तब हो गई तब स्वच्छ भारत अभियान का राग अलापने वाले अपने नेता का समर्थन करने वाले संगठन के छात्र भी पूरी दिल्ली को कचराघर बनाने में शामिल हो गए। जब मीडिया ने पूछा तो उनकी छात्र इकाई के प्रवक्ता ने तो थोड़ी प्रगतिशीलता तो दिखाई लेकिन शर्त के साथ। उन्होंने कहा कि हमें वॉल आॅफ डेमोक्रेसी दी जाए कैंपस में। तभी उनका संगठन अपने लोगों को रोकेगा! बहरहाल किसी ने ठीक ही कहा कि जो पीएम की नहीं सुनते वो लिंगदोह की भला क्या सुनेंगे।

छुट्टी का डर
प्रधानमंत्री का स्वच्छता अभियान पूरे देश में धूमधाम से चल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब खुद हाथ में झाड़ू लेकर इस मुहिम को शुरू किया तो भाजपा शासित कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने उनकी देखादेखी हाथों में झाड़ू थाम ली। इसी अभियान के बाबत आयोजित एक कार्यक्रम में शरीक होने आर्इं आम आदमी पार्टी के कोटे से दिल्ली नगर निगम में मनोनीत एक महिला एल्डरमेन (मनोनीत पार्षद) बुरी तरह डर गर्इं। उन्हें पूरे कार्यक्रम की जानकारी नहीं थी। जैसे ही बैनर लगा और उसमें स्वच्छता अभियान का जिक्र देखकर मैडम सहम गर्इं। उन्होंने बगल में बैठे अपने कार्यकर्ता से कहा कि गाड़ी निकालो, यह मोदी का कार्यक्रम है, केजरीवाल को पता चल गया तो फिर हो गई छुट्टी। मैडम ने इस बात को छिपाया भी नहीं और आयोजकों से कहा कि उन्हें आप की एक महत्त्वपूर्ण बैठक में जाना है, उन्हें निकलना पड़ेगा। वे दबे पांव कार्यक्रम से ऐसे निकलीं, जैसे शेर को मांद से निकलते देख बिल्ली भागती है।

तारीफ की ताकत
दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल को जनाब आप तो अधिकारी हैं कह दीजिए और फिर देखिए कमाल। इसके बाद वो आपकी इतनी खातिरदारी करेंगे कि पूछिए मत। ऐसे ही एक वाकये में बेदिल का कुछ पुलिसवालों से पाला पड़ा। उनमें ज्यादातर कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल थे। जनाब आप तो अधिकारी हो इतना सुनते ही वे एक-दूसरे को आदेश देने लगे और शुरू हो गई आवभगत। बिल्कुल वीआइपी की तरह चाय, बिस्कुट, शीतल पेय और बाद में पंजाबी ढाबे का खाना। अब अगर किसी की झूठी तारीफ से अपना काम बनता है तो क्यों न बनाया जाए।

-बेदिल

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