ताज़ा खबर
 

दिल्ली मेरी दिल्ली- दिवाली का तोहफा, गैरहाजिरी की चर्चा

वह मजबूरी में मेट्रो की यात्रा कर रहा है और अधिकारी मेट्रो में यात्रा करने वालों की संख्या में ज्यादा गिरावट न होने से अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। वैसे लोग यह समझ ही नहीं पा रहे हैं कि जब कोई भी दल किराया बढ़ाना ही नहीं चाहता था तो किराया बढ़ा कैसे?

Author October 23, 2017 3:21 AM
दिल्ली मेट्रो।

दिवाली का तोहफा
दिल्ली में दिवाली के मौके पर उपहार देने का चलन बड़ा जोरदार है। मंत्री से लेकर आला अफसरों तक बड़े-बड़े गिफ्ट पैकेट पहुंचना बेहद आम बात रही है। लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी सरकार के मंत्रियों से लेकर विधायकों तक ने अपने-अपने दफ्तरों में यह सूचना पट्ट टंगवा दिए कि कोई भी उन्हें गिफ्ट लाकर नहीं दे, उनकी दुआएं ही बहुत हैं। जाहिर तौर पर कोई सार्वजनिक तौर पर मंत्रियों से लेकर विधायकों तक के पास दिवाली का तोहफा लेकर नहीं गया। इन उपहारों के नहीं मिलने से नेताओं की सेहत पर तो शायद ही कोई फर्क पड़ा हो लेकिन उनके कर्मचारियों को बड़ी निराशा हुई। इसकी वजह पूछने पर ऐसे ही एक कर्मचारी ने बताया कि कांग्रेसी सरकार के जमाने में मुख्यमंत्री शीला दीक्षित से लेकर तमाम अन्य मंत्रियों के पास दिवाली पर लोग उपहार लेकर आते थे और दिवाली के बाद उनमें से ज्यादा उपहार मुख्यमंत्री से लेकर तमाम मंत्री लोग अपने-अपने कर्मचारियों में बांट देते थे। ऐसे में कई बार उन्हें अच्छे-अच्छे उपहार भी मिल जाते थे लेकिन अब तो निजाम ही ऐसा है कि जब उसे ही कुछ नहीं मिलना है तो मातहत कर्मचारियों के सामने हाथ मलने के सिवा भला क्या चारा है।

गैरहाजिरी की चर्चा
दिल्ली कांग्रेस ने पिछले दिनों एक प्रस्ताव पारित कर राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष पद संभालने का आग्रह किया। ऐसा करने वाला दिल्ली पहला राज्य बन गया। इस मामले में दिल्ली कांग्रेस ने बाकी तमाम राज्यों को पीछे छोड़ दिया। यह प्रस्ताव पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह की मौजूदगी में पारित हुआ। जाहिर तौर पर दिल्ली कांग्रेस की तमाम बड़ी हस्तियां इस बैठक में मौजूद थीं। मौजूद रहने वालों में वे नेता भी मौजूद थे जिन्होंने डेलीगेट बनाने में धांधली को लेकर केंद्रीय चुनाव समिति के सामने प्रदेश नेतृत्व की शिकायत की थी। लेकिन एक बड़ी शख्सियत इस बैठक में नदारद रही। उनकी गैरहाजिरी की चर्चा तो रही लेकिन कारण किसी ने बताया नहीं। बाद में पता चला कि उनको उसी दिन डॉक्टर से दिखलाना था। उन्हें जब डॉक्टर के यहां से फुर्सत मिली तब तक पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह बैठक में आ गए थे। लिहाजा प्रोटोकॉल के हिसाब से उनके आने के बाद किसी नेता का पहुंचना अनुचित होता। इसी दलील के साथ दिल्ली की इस प्रमुख हस्ती ने बैठक में नहीं पहुंचने की कैफियत पार्टी को बता दी। हालांकि कहने वाले फिर भी ऐसा कहने से बाज नहीं आए कि उनको डॉक्टर ने इसी समय बुलाया था अथवा उन्होंने खुद ही ऐसा समय डॉक्टर से मांगा ताकि उन्हें गैरहाजिर होने का बहाना मिल जाए।

किराया किसने बढ़ाया!
दिल्ली मेट्रो के किराया बढ़ने के बाद दिल्ली के सभी राजनीतिक दल सक्रिय हो गए हैं। केंद्र सरकार के शहरी विकास मंत्री ने तो किराया बढ़ने के पक्ष में बयान देकर भाजपा को ही फंसा दिया। बाद में पार्टी नेताओं के दबाव में उन्होंने समीक्षा करने की हामी भरी लेकिन किराया कम होने की बात कहीं से नहीं सुनी जा रही है। मेट्रो में बराबर की भागीदार दिल्ली सरकार ने पहले तो किराया बढ़ाने पर सहमति दे दी और बाद में विरोध करने का नाटक करने लगे। कांग्रेस दोनों दलों पर जिम्मेदारी डाल कर जनता की सहानुभूति लेने में लग गई है। इस चक्कर में जनता फंस गई है। मेट्रो का किराया उसकी जेब के हिसाब से है नहीं और बसें सड़क पर दिख नहीं रही हैं। वह मजबूरी में मेट्रो की यात्रा कर रहा है और अधिकारी मेट्रो में यात्रा करने वालों की संख्या में ज्यादा गिरावट न होने से अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। वैसे लोग यह समझ ही नहीं पा रहे हैं कि जब कोई भी दल किराया बढ़ाना ही नहीं चाहता था तो किराया बढ़ा कैसे?

नौकरशाहों पर नोकझोंक
हर समय चुनाव मोड में रहने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के अध्यक्ष अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली सरकार के शीर्ष नौकरशाहों पर हमला बोल दिया है। सभ्य भाषा में जितने भी आरोप लगाए जा सकते हैं वह सब उन्होंने अपने ही साथ काम करने वाले अधिकारियों पर लगा दिए हैं। अधिकारी काम नहीं करते, सारे काम सचिवालय में रोके जाते हैं, अधिकारी किसी की नहीं सुनते, सबसे ज्यादा नकारा आइएएस अधिकारी होते हैं आदि-अदि। वैसे तो जिस दिन से वे सत्ता में आए हैं उस दिन से वे अधिकारियों से इसी भाषा में बोलते रहे हैं। लेकिन पहले बावजूद इसके अधिकारियों का एक वर्ग ऐसा भी रहा है जो उनके पक्ष में हर मामले में खड़ा हो जाता था। उनके प्रमुख सचिव राजेंद्र कुमार की दुर्गति होने के बाद कोई अधिकारी खुल कर साथ देने से डरता है। जो चहेते माने जाते थे उनमें से कई तबादला करा कर दिल्ली से बाहर चले गए और जो रह गए उन्होंने अपने आका बदल लिए। ऐसे में सवाल यह है कि इस माहौल में दिल्ली सरकार का काम कैसे होगा। ‘आप’ के चुनावी वादों का क्या होगा?

विकास की कौन करेगा देखभाल!
रिंग रोड पर बने उपरगामी पुल व एस्केलेटर दिल्ली में विकास के दावे को आइना दिखा रहा है। दरअसल कांग्रेस की शीला सरकार ने रिंग रोड पर उपरगामी पुल व एस्केलेटर लगाकर सड़क पार करने की सुविधा दी थी। यहां का एस्केलेटर महीनों से बंद पड़ा है। एस्केलेटर पहले रात दस बजे तक तक न केवल चलता था बल्कि एक गार्ड भी मौजूद रहता था। सब खत्म। किसी ने ठीक ही कहा-एक सरकार ने जो चीजे बना डाले नई सरकार उसकी देखभाल तक नहीं कर सकी! कम से कम उपरगामी पुल व एस्केलेटर पर तो यह बात सटीक बैठती दिखी। -बेदिल

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App