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दिल्ली मेरी दिल्ली: इलाज का चमत्कार

गाजीपुर थाने के पास की मुल्ला कालोनी के लोगों के लिए स्थानीय निगम पार्षद ने अपने संसाधनों से मच्छर मार दवा का छिड़काव कराने का बीड़ा उठाया।

Author नई दिल्ली | September 26, 2016 2:13 AM
डेंगू।

इलाज का चमत्कार

एक अरसे बाद दिल्लीवासियों को अहसास हो रहा है कि उनका भी कोई मुख्यमंत्री है। स्वास्थ्य लाभ के बहाने की सही, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पिछले एक हफ्ते से दिल्ली में जमे हुए हैं। हालांकि, डॉक्टरों ने उन्हें बोलने से मना किया है और आराम की सलाह दी है, लेकिन वह बोलने के मामले में थोड़े बहुत सक्रिय हैं और सरकार के कामकाज में भी हिस्सा ले रहे हैं। दिल्ली आते ही सबसे पहले तो उन्होंने पार्टी और सरकार के लोगों को फरमान जारी किया कि राजनीति छोड़ बीमारियों से जूझती जनता के लिए काम करें। उसके बाद मच्छरों को भगाने के अभियान की शुरुआत की गई। अब दिल्ली वाले सोच रहे हैं कि उनके वोटों के सहारे सत्ता पर काबिज हुए मुख्यमंत्री को यह सद्बुद्धि आखिर लोगों के डेंगू-चिकनगुनिया की भेंट चढ़ने के बाद ही क्यों आई या फिर यह चमत्कार बंगलुरु के इलाज की देन है।

स्याही की चमक

दिल्ली में डेंगू और चिकनगुनिया के कोहराम के बाद उपराज्यपाल के आॅर्डर के बावजूद अपने तय समय पर दिल्ली लौटे उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पर स्याही क्या फेंकी गई, उनका राजनीतिक ग्राफ तेजी से ऊपर चढ़ गया। वैसे भी पार्टी के सर्वेसर्वा अरविंद केजरीवाल बिना कोई विभाग लिए मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे हैं और मुख्यमंत्री वाले ज्यादा काम सिसोदिया को ही सौंप रखे हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि पंजाब विधानसभा चुनाव जीतने के लिए आखिरी दौर में खुद केजरीवाल अपना नाम मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के लिए आगे करेंगे तो सिसोदिया अपने आप दिल्ली के मुख्यमंत्री बन जाएंगे। जाहिर है वे आप में नंबर दो के नेता तो हैं ही लेकिन पार्टी केजरीवाल के साए से मुक्त नहीं हो पाएगी। यह कसक जाहिर तौर पर उनके भीतर होगी। स्याही कांड से यह भी साबित करने का प्रयास हो रहा है कि सिसोदिया को दिल्ली सरकार का जवाबदेह माना गया तभी तो उन पर स्याही फेंकी गई।

का वर्षा जब कृषि सुखानी

लगता है कि बंगलुरु में जीभ की सर्जरी कराते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को याद आ गया कि दिल्ली में अघोषित महामारी बन चुके डेंगू और चिनगुनिया के खिलाफ अभियान चलवाने से उन्हें कई फायदे होने वाले हैं। वरना जो बयान वे अब दे रहे हैं या जो पोस्टर-बैनर अब सितंबर के आखिर में लग रहे हैं वे मई-जून में ही लगने चाहिए थे। दरअसल, हर समय सुर्खियों में रहने वाले आम आदमी पार्टी के नेताओं के लिए अभी का समय ज्यादा कठिन हो गया है। कहीं बगावत तो कहीं सीडी कांड ने पार्टी की नींद उड़ा रखी है। ऊपर से हाई कोर्ट के फैसले और उपराज्यपाल के बदले रुख के बाद कुछ तो ऐसा करना ही था जिससे लोगों का ध्यान बंटे। केजरीवाल ने पहले बयान दिया, फिर अपने घर से ही सफाई अभियान की शुरुआत की और बाद में अपने नेताओं को भी इस काम में लगा दिया। इसे कहते हैैं, देर आए लेकिन दुरुस्त आए।

परेशानी का सबब

दिल्लीवालों को जितनी परेशानी डेंगू और चिकनगुनिया से नहीं है, उससे ज्यादा इस पर हो रही राजनीति से है। गाजीपुर थाने के पास की मुल्ला कालोनी के लोगों के लिए स्थानीय निगम पार्षद ने अपने संसाधनों से मच्छर मार दवा का छिड़काव कराने का बीड़ा उठाया। लोगों में इस छिड़काव के बाद खुशी थी कि इस जानलेवा बीमारी से उन्हें राहत मिलेगी। उसी रास्ते से गुजरते कुछ लोगों से जब बेदिल ने पूछा कि डेंगू और चिकनगुनिया ने आप लोगों को कितना परेशान किया है, तो झुंड की शक्ल में खड़े स्थानीय लोगों ने तपाक से कहा कि सवाल तो आपने ठीक पूछा है पर इन बीमारियों से ज्यादा हमें दिल्ली की राजनीति से परेशानी है। निगम और दिल्ली सरकार जनता की सुध लेने के बजाए सिर्फ कोरे और बकवास और आरोप-प्रत्यारोप पर उतर आए हैं। इसका आखिर क्या मतलब है?

ऊपर का दबाव
पुलिस मुख्यालय में यह खबर उड़ी है कि आयुक्त जाने से पहले अपने उन सभी चहेतों को मनचाहे पद पर बैठा कर रहेंगे, जो सालों से इसका इंतजार कर रहे थे। ऊपर से गृह मंत्रालय और उपराज्यपाल दफ्तर का भी दबाव होता है। एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि दरअसल कनिष्ठों के तबादले और पोस्टिंग का अधिकार आयुक्त के पास होता है। हालांकि वे भी नियमानुसार ही इसे अमली जामा पहनाते हैं, लेकिन उनके जानकार अधिकारी, गृह मंत्रालय और उपराज्यपाल दफ्तर की सिफारिश भी तो होती ही है। अब इतने कम समय के लिए आलोक कुमार वर्मा ने आयुक्त की कुर्सी पाई है कि उन्हें इसी दरम्यान सब कुछ निबटाना होगा, इसलिए काम प्रगति पर है।

राम नाम का जाप
पिछले 28 साल से नोएडा में रामलीला का आयोजन कर रही श्री सनातन धर्म रामलीला समिति के पदाधिकारी 1 से 10 अक्तूबर तक प्राधिकरण के सेक्टर-6 मुख्य प्रशासनिक भवन के बाहर रोजाना एक घंटे राम नाम का जाप करेंगे। राम नाम का जाप प्राधिकरण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के रूप में किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि प्राधिकरण ने प्रदेश में सत्ताधारी पार्टी से नजदीकी रखने वाले श्री राम मित्र मंडल को नोएडा स्टेडियम में रामलीला आयोजित करने की इजाजत दी है, जबकि सनातन धर्म रामलीला समिति को जगह उपलब्ध नहीं कराई गई है, जिसके बाद समिति ने यह फैसला किया है। समिति के महासचिव संजय बाली ने बताया कि प्राधिकरण ने साजिश के तहत 28 सालों से रामलीला का मंचन कर रही संस्था को जगह उपलब्ध नहीं कराई है।

-बेदिल

 

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