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दिल्ली मेरी दिल्ली- आप पर मुसीबत का पहाड़

20 विधायकों की सदस्यता खत्म करने की चुनाव आयोग की सिफारिश के बाद अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली तीन साल पुरानी सरकार पर मुसीबत का पहाड़ टूट पड़ा है।

Author January 22, 2018 4:52 AM
पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ अरविंद केजरीवाल।

सांपों के शौकीन
दिल्ली विधानसभा परिसर में पिछले दिनों काले सिर वाले सांप का एक बच्चा मिला। संयोग से उस दौरान विधानसभा की बैठक चल रही थी। हालांकि सांप के बच्चे ने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया और एक एनजीओ और वन विभाग के लोग उसे पकड़कर ले गए। कुछ दिन पहले ही दिल्ली से राज्यसभा जाने वाले सदस्यों का चुनाव भी हुआ। उसमें एक सदस्य ऐसे भी हैं, जिन्हें सांप पालने का शौक है। चुनाव के दौरान उनके नाम को लेकर आम आदमी पार्टी (आप) में खूब कोहराम मचा और उनकी एक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुई जिसमें वे एक खतरनाक सांप को गले में लटकाए नजर आ रहे हैं। इसी को देखते हुए विधानसभा में यह चर्चा होने लगी कि कहीं उन्हीं की गर्दन से निकलकर सांप विधानसभा परिसर में तो नहीं पहुंच गया। पिछले दिनों वे विधानसभा परिसर में नामांकन पत्र भरने जो आए थे।
मुसीबत का पहाड़
नियम के खिलाफ संसदीय सचिव बनाए गए आम आदमी पार्टी (आप) के 20 विधायकों की सदस्यता खत्म करने की चुनाव आयोग की सिफारिश के बाद अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली तीन साल पुरानी सरकार पर मुसीबत का पहाड़ टूट पड़ा है। अपने विधायकों की सदस्यता बचाने के लिए आप के पास अब सीमित विकल्प हैं। भले ही सीधे तौर पर इन विधायकों के न रहने से सरकार के बहुमत पर कोई फर्क न पड़ता हो, लेकिन 20 सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले से ही हर स्तर पर बगावत झेल रही पार्टी पर भारी असर होगा। पार्टी में हर स्तर पर खलबली मची है। संवैधानिक संस्थाओं पर सीधे हमला करने के लिए मशहूर आप के नेता अब चुनाव आयोग को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में पार्टी का मुख्य चेहरा माने जाने वाले केजरीवाल मुस्कुराते हुए क्रिकेट मैच का लुत्फ उठाते दिखें तो क्या कहा जाए। ऐसे मौके पर तो जगजीत सिंह की गजल ही याद आती है कि ‘तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो, क्या गम है जिसको छुपा रहे हो।’
फिर लौटी रौनक
लाभ के पद के मामले में आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों की सदस्यता जाना अब लगभग तय हो चुका है और इस फैसले से विधानसभा में उनके विरोधियों में चुस्ती आ गई है। ऐसा ही एक मामला दिखा बीते दिनों कालकाजी विधानसभा क्षेत्र में। चुनावी टिकट न मिलने से नाराज कांग्रेसी नेता हों या चुनाव हार चुके कांग्रेस के पूर्व विधायक, लाभ के पद के प्रकरण के बाद सभी के दफ्तरों में रौनक सी लौट आई है। और तो और यहां से निगम पार्षद रहीं और बीते चुनाव में हार का मुंह देखने वाली नेता के पति (पूर्व निगम पार्षद) के यहां भी ऐसी बैठक हुई मानो चुनाव की घोषणा हो गई हो। सबको लगता है कि यहां के विधायक अवतार सिंह की कुर्सी गई तो उनका नंबर आ सकता है और अगर उनकी पार्टी ने टिकट नहीं दिया तो आप के साथ भी ‘तन-मन-धन’ से लगा जा सकता है। इस कड़ी में भाजपा के लोग भी पीछे नहीं है, खासकर वे नेता जो बीते चुनाव में टिकट न मिलने से नाखुश हैं।

हाथ लगी निराशा

दिल्ली स्थित देश के सबसे बड़े विश्वविद्यालयों में से एक विश्वविद्यालय ने पिछले दिनों प्रवेश प्रक्रिया को लेकर एक प्रेसवार्ता का आयोजन किया। प्रेसवार्ता से पहले प्रवेश समिति की एक बैठक भी हुई थी, लेकिन इसमें भी कुछ ठोस नहीं बताया गया। इस वार्ता के लिए बड़ी संख्या में पहुंचे पत्रकारों को निराशा हाथ लगी क्योंकि वहां न तो प्रवेश की तारीखें बताई गर्इं और न ही यह बताया कि प्रवेश की प्रक्रिया क्या होगी। एक पत्रकार के मुताबिक इस प्रेस वार्ता ने ‘खोदा पहाड़, निकली चुहिया’ कहावत को पूरी तरह से चरितार्थ कर दिया।
मिठाई संग सेल्फी
खुशी का कोई भी मौका हो, मिठाई बंटती ही है। खासतौर पर सियासी गलियारों में मिठाइयों के डिब्बे कुछ ज्यादा ही खुलते हैं। कई बार अपने नेताओं को खुश करने के लिए पार्टी कार्यकर्ता उनके जन्मदिन या किसी अन्य मौके पर मिठाई का डिब्बा लेकर आ जाते हैं, लेकिन मुसीबत तब बढ़ जाती है जब वे अपने नेता को मिठाई खिलाते हुए फोटो खिंचवाने को लालायित हो जाते हैं। प्रदेश कांग्रेस के एक कद्दावर नेता पार्टी के दिल्ली कार्यालय में पहुंचे थे। नीचे कार्यकर्ताओं का एक जत्था मिठाई का डिब्बा लेकर पहुंचा था। नेताजी जैसे ही अपनी गाड़ी में बैठने के लिए आए, कार्यकर्ताओं ने उन्हें घेर लिया और मिठाई खिलाने की जिद करने लगे। पहले तो नेताजी ने उन्हें समझाया कि वे मिठाई नहीं खाते, लेकिन जब कार्यकर्ता नहीं माने तो तय यह हुआ कि नेताजी मिठाई को केवल मुंह में सटा भर लेंगे और इसी पोज में कार्यकर्ता उनके साथ सेल्फी ले लेंगे। यही हुआ भी, बारी-बारी से कार्यकर्ता नेताजी के मुंह में मिठाई सटाते और सेल्फी लेकर अलग हट जाते। जब आधा दर्जन बार ऐसा हो गया तो नेताजी ने कहा कि अब बस भी करो, नहीं तो मजबूरी में मुझे मिठाई खानी पड़ जाएगी जो मेरी सेहत के लिए नुकसानदेह है। हालांकि नेताजी के बार-बार कहने पर कार्यकर्ता मान गए, लेकिन फिर भी कई लोग सेल्फी नहीं ले पाने पर मन मसोस कर रह गए।
श्रेय लेने की होड़
हर काम का श्रेय लेने की होड़ में कई बार हालात हास्यास्पद हो जाते हैं। यमुनापार के एक सांसद की कथनी और करनी को देखकर तो यही लगता है कि उन्हें हर काम का श्रेय पहले चाहिए होता है काम चाहे बाद में ही पूरा क्यों न हो। बेदिल को पता चला कि सांसद के काम करने के तरीके से इलाके के लोग उनके कायल हो गए हैं। उन्होंने हर उस विभाग का दफ्तर अलग बनाया हुआ है, जिससे सीधे तौर पर आम लोगों का वास्ता पड़ता है। मसलन बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जनोपयोगी कार्य जिससे आम लोगों को हर दिन दो-चार होना पड़ता है। लेकिन उनके इन कार्यों पर तब लोग चौंक जाते हैं जब काम होने से पहले ही सांसद की तस्वीर वाले पोस्टर हर चौक-चौराहे पर दिख जाते हैं। लोग कहते हैं कि काम तो ठीक है पर श्रेय लेने की इतनी भी क्या जल्दबाजी है सांसद महोदय को? बाद में भी तो श्रेय उन्हें ही मिलेगा, किसी दूसरे इलाके के सांसद की तस्वीर थोड़े ही लग जाएगी वहां।
-बेदिल

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