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दिल्ली मेरी दिल्ली: दोस्ती में दगा

देश भर में राजनीति करने की तैयारी के तहत अरविंद केजरीवाल ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से दोस्ती की।

Author March 27, 2017 5:01 AM
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (फाइल फोटो)

जीत का दांव

पंजाब विधानसभा चुनाव की हार के सदमे से उबरने के लिए आम आदमी पार्टी (आप) के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पहले ईवीएम (इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन) पर सवाल उठाए, लेकिन यह मुद्दा ज्यादा तूल नहीं पकड़ पाया। फिर उन्होंने दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान बिजली के बिल आधे और पानी मुफ्त करने की तर्ज पर निगम चुनाव जीतने के बाद रिहायशी इलाकों में गृह कर माफ करने का वादा करके विरोधी दलों को चौंका दिया। गृह कर माफ करने की घोषणा उसी तरह लोगों को चौंकाएगी और आप के करीब लाएगी, जैसे हर महीने 400 यूनिट तक की बिजली दर आधी करने और बीस हजार लीटर पानी हर महीने मुफ्त देने के फैसले ने किया था। माना जा रहा है कि केजरीवाल ने पंजाब चुनाव की हार के गम से अपनों को उबारने का के लिए यह कदम उठाया है। संयोग से जिस दिन उन्होंने यह घोषणा की, उसी दिन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह रामलीला मैदान में सभा करके भाजपा के चुनाव अभियान का शंखानाद कर रहे थे। सियासी गलियारे में तो यह भी कहा जा रहा है कि केजरीवाल ने इन घोषणाओं के लिए शनिवार का दिन भी इसीलिए चुना ताकि भाजपा को ज्यादा कवरेज न मिल पाए।
दोस्ती में दगा
देश भर में राजनीति करने की तैयारी के तहत अरविंद केजरीवाल ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से दोस्ती की। दिल्ली के बिहारी वोटरों पर पकड़ बनाने के लिए बिहार चुनाव में जनता दल(एकी) के लिए चुनाव प्रचार करने पहुंच गए। नीतीश और लालू यादव से दोस्ती गांठने पर जब केजरीवाल की आलोचना होने लगी तो उन्होंने पाला बदल लिया, लेकिन एक-दूसरे की सराहना करना नहीं छोड़ा। इसके बावजूद नीतीश कुमार की पार्टी ने दिल्ली नगर निगम चुनावों में अपने उम्मीदवार उतारने की घोषणा करके केजरीवाल को झटका दे दिया। हालांकि केजरीवाल और उनकी पार्टी के लोग इस पर कोई सीधी प्रतिक्रिया नहीं दे रहे हैं, लेकिन पंजाब और गोवा चुनाव की हार के बाद नीतीश के झटके से उन्हें गहरा सदमा तो जरूर लगा होगा।
बुद्धिजीवियों की जमात
बीते दिनों पाटियाला हाउस अदालत परिसर में एक ऐसे व्यक्ति की चर्चा चारों ओर होती दिखी, जिसका उस मामले से कोई लेना-देना ही नहीं था। दरअसल बीते दिनों डीडीसीए मामले में अरुण जेटली की शिकायत पर आप नेताओं के खिलाफ आरोप तय होने थे। सुनवाई के दौरान अदालत परिसर में ‘कन्हैया-कन्हैया’ की गूंज होने लगी। कानाफूसी तब शुरू हुई जब एक आप नेता ने एक वकील पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया। इस पर वकील ने सफाई दी कि हो सकता है किसी ने भावावेश में कुछ कह दिया हो, लेकिन एडवोकेट बुद्धिजीवी लोग हैं, वे ऐसा कभी नहीं करेंगे। बस फिर क्या था? दबी जुबान में कई लोगों की आवाज एक साथ आई, कन्हैया की पेशी भूल गए क्या? यही कोट था भाई! हल्के में मत लीजिए।
वादों की मार
नगर निगम चुनाव जीतने के लिए मुख्यमंत्री और आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने लोगों से पानी, बिजली के बाद अब हाउस टैक्स फ्री करने का वादा किया है। हाउस टैक्स खत्म करने का लालच देने से केजरीवाल की पार्टी को कुछ वोट तो मिल जाएंगे, लेकिन पहले से ही बदहाली से गुजर रहे दिल्ली नगर निगमों के लिए यह वादा उनकी कमर तोड़ने सरीखा होगा। क्योंकि हाउस टैक्स निगम की आय का बहुत बड़ा स्रोत है और पूरी दिल्ली में इसकी वसूली बंद होने से निगमों का क्या हाल होगा, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। पूर्वी निगम सहित अन्य निगमों के अधिकांश कर्मचारियों के वेतन समय से नहीं मिलने का मुद्दा हमेशा से ही दिल्लीवासियों के लिए परेशानी का सबब रहा है। ऐसे में हाउस टैक्स फ्री करने का शिगूफा कितना व्यावहारिक है, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।
-बेदिल

 

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