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दिल्ली मेरी दिल्ली-मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर से उठने लगा है अब लोगों का भरोसा

ईमानदार छवि के बलबूते अरविंद केजरीवाल राजनीति कर रहे थे उसके धूमिल होने के बाद उनकी वापसी की राह मुश्किल लग रही है।

Author June 12, 2017 4:34 AM
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल। (File Photo)

बेदाग पर दाग
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर से अब लोगों का भरोसा उठने लगा है। सालों से दिल्ली और देश के लोगों ने उस केजरीवाल को देखा है जो हर मुद्दे पर बढ़चढ़ कर बोलता है और खुद को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कतार में रखता है, लेकिन दो चुनावों में हार क्या मिली, हर कोई उन पर उंगली उठाने लगा। सबसे ज्यादा धक्का तो केजरीवाल को अपने पुराने सहयोगी कपिल मिश्र के आरोपों से लगा है जो किसी जमाने में उनके लिए आत्मदाह तक करने को तैयार थे। कपिल मिश्र ने केजरीवाल पर दो करोड़ रुपए की रिश्वत लेने का आरोप लगाया और उन्हें सरकार से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। यह आरोप कितना सही है यह तो जांच से पता चलेगा, लेकिन कपिल के आरोपों ने केजरीवाल की बेदाग छवि पर दाग जरूर लगा दिया है। चुनाव तो वे फिर जीत सकते हैं, लेकिन जिस ईमानदार छवि के बलबूते वे राजनीति कर रहे थे उसके धूमिल होने के बाद उनकी वापसी की राह मुश्किल लग रही है। इस हालात से तो उन्हें केवल लोगों की सहानुभूति ही उबार सकती है, भले ही इसमें कुछ वक्त लग जाए।

फैसले की घड़ी
दिल्ली सरकार के मंत्री पद से हटाए गए कपिल मिश्र के बागी तेवर अभी भी बरकरार हैं। 6 मई से लगातार वे अपनी पार्टी और पुराने साथी अरविंद केजरीवाल पर सीधे हमला कर रहे हैं। अब तक उन्होंने जितने भी खुलासे किए हैं, उतने में तो सरकार गिर जाती लेकिन वह अभी भी चल ही रही है, अलबत्ता सरकार की रफ्तार काफी धीमी हो गई है और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व सबसे ज्यादा आरोपों के घेरे में रहे मंत्री सत्येंद्र जैन की सक्रियता बेहद कम हो गई है। सरकार का तो जो होना होगा वह होगा, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि अगर सरकार नहीं गिरती है तो कपिल मिश्र का क्या होगा। केंद्र सरकार ने उन्हें वाई श्रेणी की सुरक्षा दे दी है और माहौल कुछ ऐसा बन रहा है जैसे भाजपा के लोग उनकी मदद कर रहे हैं। उनकी मां भाजपा की नेता भी रही हैं, पर अब फैसला सिर्फ और सिर्फ कपिल मिश्र को लेना है।

बहस का यू-टर्न
बीते दिनों में लीक से हटकर किए गए कामों व प्रयोगों के लिए दिल्ली पुलिस की तारीफ हो रही है। उसकी कई योजनाएं- मसलन प्रहरी योजना, सेल्फ डिफेंस के कार्यक्रम, यातायात जागरूकता व नए ऐप जारी करना, सबकी सराहना हुई। लोगों ने कहा कि पुलिस हाईटेक हो रही है, लेकिन इससे उलट पिछले दिनों दिल्ली पुलिस ने गश्ती के लिए जब अपनी साइकिल बिग्रेड की शुरुआत की, इस बहस ने यू-टर्न ले लिया। किसी ने कहा कि पुलिस की यह पहली योजना होगी जिसे सुनकर झपटमार खुश होंग, लुटेरे जश्न मनाएंगे।

एक ने कहा- ‘भाई वो पल्सर से भागेंगे और ये साइकिल से खदेड़ेंगे’। कैसा होगा वो सीन? लेकिन एक सज्जन ने योजना का पक्ष लिया और बीच बहस में बोले, दिल्ली पुलिस के अफसर इसे विदेशी दर्ज पर मजबूत करने में लगे हैं, प्रहरी योजना के तहत साइकिल बिग्रेड भी इसी की एक कड़ी है। अभी वाक्य पूरा भी नहीं हुआ होगा कि वे सज्जन बाकियों के जुबानी वार से घिरते नजर आए। दनादन लोगों ने सवाल दागे। मसलन अफसर क्या सिर्फ साइकिलिंग में विदेशों की नकल करेंगे या वहां के जैसी सुविधाएं भी जवानों को देंगे? फिर क्या था, साइकिल योजना की तरफदारी करने वाले सज्जन मौनव्रत धारी किसी जैन मुनि सरीखे दिखने लगे।

वक्त वक्त की बात
उपराज्यपाल अनिल बैजल की ओर से राजधानी की समस्याओं को लेकर की जा रही बैठकों और दौरों से प्रशासन भी एकदम हरकत में आ गया है। उपराज्यपाल निवास पर हो रही बैठकों में मुख्यमंत्री केजरीवाल सहित दिल्ली सरकार के सभी मंत्री हाजिरी लगा रहे हैं। इन बैठकों की वजह से दिल्ली से जुड़ी ज्यादातर फाइलें अब उपराज्यपाल के कार्यालय में पहुंचने लगी हैं। कुछ वक्त पहले उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने अधिकारियों से कहा था कि दिल्ली से जुड़ी फाइलें पहले उनके पास पहुंचेंगी। हालांकि उनकी ये मंशा पूरी नहीं हो सकी और वित्त, भूमि व बड़े अधिकारियों के तबादलों से जुड़ी फाइलें उपराज्यपाल के पास पहुंचने लगीं। ऐसे में मनीष सिसोदिया कुछ कर भी नहीं सकते क्योंकि आजकल उनकी सरकार के दिन ही कुछ खराब चल रहे हैं।
-बेदिल

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