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दिल्ली मेरी दिल्ली: हार और कपिल मिश्र के आरोपों के बाद ठोक बजाकर बोलने लगे हैं अरविंद केजरीवाल

इसमें भले ही सच्चाई न हो लेकिन मनीष सिसोदिया का विभाग बदलने को लोग उनका पार्टी प्रमुख केजरीवाल से संबंध खराब होना ही मान रहे हैं।

Author July 24, 2017 3:51 AM
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल। (File Photo)

कर्मचारियों की आफत
दिल्ली पुलिस के जनसंपर्क विभाग के सभी कर्मचारी इस बार 15 अगस्त को सड़कों पर पसीना बहाएंगे। ये लोग दफ्तर में बैठकर अखबारों की कतरनें काटने, विज्ञापन का प्रारूप बनाने, रिकॉर्ड संभालने, प्रेस कांफ्रेंस करने और आमतौर पर बाबूगीरी में व्यस्त रहते हैं और इसके अभ्यस्त भी हो गए हैं। इन्हें फील्ड ड्यूटी न के बराबर करनी पड़ती है। कई बार ड्यूटी लगती भी थी तो सिर्फ कुछ गिने-चुने कांस्टेबल और हवलदारों की। पर इस बार तो इंस्पेक्टर से लेकर नीचे तक के सभी जवानों को ड्यूटी पर तैनात करने का निर्देश जारी हुआ नहीं कि वे भी रिहर्सल के लिए तैनात कर दिए गए। शनिवार और रविवार को होने वाली यह रिहर्सल दो शिफ्टों में सुबह 11 से 4 बजे तक और शाम 4 से रात 9 बजे तक होगी। वहां पसीना बहाने के बाद जनसंपर्क कर्मियों को ड्यूटी रिपोर्ट देने मुख्यालय जाना पड़ रहा है। बेदिल को ऐसी ही ड्यूटी निभाने वाले एक जवान ने बताया कि यह गोपनीय शाखा के संबंधित अधिकारी का मुख्यालय को खुश करने का तरीका भर है, वरना रोजाना के इतने सारे काम करने के बाद किसी की अलग से ड्यूटी लगाने का कोई मतलब ही नहीं है।

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कम होता दबदबा
किसी भी सरकार के मत्रियों के विभागों में बदलाव आम बात है।आए दिन किसी न किसी राज्य से इस तरह की खबर आती रहती है। पार्टी की जिम्मेदारी से हटाकर मंत्री बनाना या मंत्री पद से हटाने पर संगठन में लगाने आदि के बयान भी दिए जाते हैं, लेकिन दिल्ली की आम आदमी पार्टी (आप) अलग तरह की है। उसकी सरकार भी अलग तरह की है, जिसे मंत्रिमंडल से हटाया वही बागी बन गया। कपिल मिश्र ने तो बड़े पैमाने पर मोर्चाबंदी करके पार्टी के सर्वेसर्वा अरविंद केजरीवाल पर ही भ्रष्टाचार में शामिल होने का आरोप लगा दिया। जिस तरह से उन्होंने सरकार के खिलाफ अभियान चलाया उसमें पार्टी के बड़े नेता कुमार विश्वास से लेकर पार्टी में नंबर दो मनीष सिसोदिया का भी उन्हें आशीर्वाद मिलना बताया जाता है। इसमें भले ही सच्चाई न हो लेकिन मनीष सिसोदिया का विभाग बदलने को लोग उनका पार्टी प्रमुख केजरीवाल से संबंध खराब होना ही मान रहे हैं। वैसे यह भी कहा जाता रहा है कि दिल्ली की सरकार सिसोदिया ही चलाते हैं और उन्होंने खुद राजस्व विभाग छोड़ने की इच्छा जताई थी। वैसे भी उनके बाद ताकतवर माने जाने वाले मंत्री सत्येंद्र जैन का रुतबा तो अब घट ही गया है, इसलिए कैलाश गहलोत को कई विभाग मिलना चौंकाता नहीं है। कपिल मिश्र के आरोपों से भले ही आप सरकार गिरी नहीं, लेकिन केजरीवाल का दबदबा कम हुआ और सत्येंद्र जैन जबरन दरकिनार किए जाने लगे।

अफसरों के बुरे दिन
कई चुनावों में आप की हार और अपने साथी कपिल मिश्र के आरोपों के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ठोक बजाकर बोलने लगे हैं और उनके संबंध पुराने उपराज्यपाल नजीब जंग के मुकाबले नए उपराज्यपाल अनिल बैजल से बेहतर हो गए हैं। शायद इसलिए भी वे प्रधानमंत्री और उपराज्यपाल के खिलाफ कम बोलते हैं, लेकिन पता नहीं क्या संयोग है कि उनके दफ्तर में जो भी अधिकारी तैनात हो रहा है, उसके बुरे दिन आ जा रहे हैं। तेजतर्रार और कांग्रेस से लेकर भाजपा नेताओं तक के चहेते राजेंद्र कुमार उनके साथ क्या आए उन्हें जेल तक जाना पड़ा। उनको नौकरी के लाले पड़े हैं और नौकरी छोड़कर राजनीति भी नहीं करने दी जा रही है। उनके बाद आए एक अधिकारी भी केंद्र सरकार में जाने के बाद अब लंबी छुट्टी पर हैं। कई और अधिकारी भी गायब होते जा रहे हैं। उनके और उनके सहयोगियों के प्रिय सुकेश जैन जब तक दूसरे विभाग में थे तब तक तो चल गए, लेकिन मुख्यमंत्री के दफ्तर के प्रभारी बनते ही उन्हें मूल कैडर में चलता कर दिया गया।

होशियारी पड़ी महंगी
अपराधी कितना भी शातिर क्यों न हो, कभी-कभी वह कुछ ऐसा कर बैठता है, जो उसके गले की फांस बन जाता है। ऐसा ही एक मामला पिछले दिनों पूर्वी दिल्ली में सामने आया। दरअसल ओला कैब के बेड़े में शामिल अपराधी यहां से एक डॉक्टर को उठाकर यूपी ले गए और कई दिनों तक उन्हें मेरठ में रखा। फिरौती मांगने के लिए उन्होंने फर्जी पते वाले नंबर का उपयोग तो किया, लेकिन वे भूल गए कि पते के अलावा भी कई चीजे हैं, जिससे दिल्ली पुलिस उन तक पहुंच सकती है। अपराधियों ने पांच करोड़ रुपए की फिरौती मांगी और 2000 रुपए के नोट लाने को कहा। उन्होंने डॉक्टर के परिजनों से तो पैसे मांगे ही, साथ ही ओला कंपनी से भी बदनाम करने की धमकी देकर वसूली की कोशिश की। हद तो तब हो गई जब आरोपियों ने अगवा किए गए डॉक्टर की तस्वीर भी आॅनलाइन पोस्ट कर दी। फिर क्या था, सर्विलांस पर बैठी पुलिस ने एक तरफ उन्हें पैसों का इंतजार करने की बात कहकर उलझाए रखा तो दूसरी तरफ छापेमारी का कार्यक्रम बना डाला।

पार्षद की हैसियत
अधिसूचना का इंतजार करके थक चुके दिल्ली नगर निगम के कई पार्षदों ने अब अपने इलाके में जबरन काम शुरू कर दिया है। वे अपने इलाके में सड़कों का नामकरण अपने हिसाब से कर रहे हैं और कईयों ने तो नारियल फोड़ना भी शुरू कर दिया है। उनका तर्क है कि वे पार्षद हैं तो इलाके में निगम का जो भी काम होगा, उसमें उन्हीं की चलेगी। पार्षदों का कहना है कि काम चाहे आज हो या कल, लेकिन उनकी इजाजत के बिना यहां पत्ता भी नहीं हिलेगा। बेदिल का ऐसे ही एक पार्षद से पाला पड़ा। उनसे पूछा कि गया कि आप किस हैसियत से नारियल फोड़ रहे हैं, अभी तो अधिसूचना भी जारी नहीं हुई है। तो तपाक से बोले, जब अधिसूचना निकलेगी तो यहां का पार्षद कौन होगा? बेदिल ने जवाब दिया, आप ही होंगे तो वे बोले फिर इसमें हैरानी वाली क्या बात है।
-बेदिल

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