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दिल्ली मेरी दिल्ली- खोदा पहाड़ निकली चुहिया

रामलीला मैदान के आंदोलन से निकलकर पार्टी और सरकार का सफर तय करने वाली आम आदमी पार्टी का मुख्यालय ही रामलीला मैदान बनने वाला है।

Author January 1, 2018 03:48 am
आम आदमी पार्टी की एक मीटिंग में दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल, कुमार विश्वास और संजय सिंह। (फोटो-पीटीआई)

ध्यान भटकाने में माहिर

भाजपा के नेता मुद्दों से ध्यान भटकाने में माहिर माने जाते हैं। जब पार्टी किसी मामले में फंसती दिखती है तो धार्मिक मुद्दे उठा कर लोगों का ध्यान दूसरी ओर ले जाते हैं। लेकिन अब लगता है कि दिल्ली पर राज करने वाली आम आदमी पार्टी (आप) ने मुद्दों से ध्यान हटाने में भाजपा को भी पीछे छोड़ दिया है। उनके नेता वैसे भी पत्रकारों से या आम लोगों से सवाल-जवाब नहीं करते हैं, वे केवल अपनी बात करते हैं। ताजा मामला राज्यसभा के लिए पार्टी के नेता कुमार विश्वास का नाम तय करने पर मचे विवाद को लेकर है। आप के नेताओं के लिए अजीब हालात बन गए हैं और वे खुल कर कुछ कह नहीं पा रहे हैं। इस हंगामे से ध्यान हटाने के लिए आप सरकार ने एक बार फिर उपराज्यपाल से पंगा ले लिया है और वह जान-बूझकर उनके खिलाफ उल्टा-सीधा बोले जा रही है। कहने वाले कहते हैं कि जब एक बार आप संवैधानिक पद पर बैठे हुए व्यक्ति को भ्रष्टाचारी कहेंगे तो जाहिर है कि अगली बार वे आपकी बात नहीं सुनेंगे और विवाद बढ़ जाएगा। मुमकिन है इस चक्कर में लोग दूसरे मुद्दों पर कम ध्यान दें।
उपाय की खोज में
दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल की यूएसपी यह है कि वे समस्याओं का समाधान उससे थोड़ी दूरी बनाकर ढूंढ़ते हैं। जब-जब पार्टी या सरकार समस्याओं से दो चार हो रही होती है या चुनावी दौड़ में हार की थकान निकालनी होती है तो केजरीवाल शहर से दूर जाते रहे हैं विपश्यना के लिए। फिलहाल राज्यसभा सीट के लिए पार्टी के अंदर मची घमासान के बीच इस बार अरविंद केजरीवाल ने अंडमान का रुख किया है। कहने को तो वह नए साल का जश्न मनाने अंडमान गए हैं जहां उनके साथ उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी हैं। लेकिन मौका भी है और दस्तूर भी, ऐसे में देखते हैं कि केजरीवाल राज्यसभा सीट को लेकर आप में मचे घमासान की शांति के लिए अंडमान से कौन सा उपाय ढूंढ़ कर लाते हैं।
खोदा पहाड़ निकली चुहिया
राज्यसभा सीट के लिए आम आदमी पार्टी में मचे घमासान के बीच बीते गुरुवार को पार्टी मुख्यालय पर पार्टी के वरिष्ठ नेता कुमार विश्वास के समर्थक कार्यकर्ताओं ने एक तरह से धावा बोल दिया। करीब सौ की संख्या में यूपी, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली से आए इन कार्यकर्ताओं ने पहले तो शांतिपूर्ण तरीके से पार्टी के अधिकारियों से टेंट-माइक की मांग की, लेकिन जब उन्हें ये सुविधाएं नहीं दी गर्इं तो उन्होंने आनन-फानन में टेंट और माइक का प्रबंध खुद कर लिया। गाड़ियों में भर-भर कर गद्दे वगैरह भी आने लगे और कुछ ही देर में वहां टकराव का माहौल तैयार हो गया। बताया गया कि थोड़ी देर में पूरी दिल्ली से हजारों की संख्या में कार्यकर्ता वहां पहुंचने वाले हैं। इसके बाद मीडिया समूहों के ओबी वैन वहां जमा होने लगे और लाइव टेलीकास्ट की तैयारी शुरू हो गई। उधर, आप नेताओं की शिकायत पर बड़ी संख्या में पुलिस बल भी तैनात कर दिया गया। लेकिन कुमार समर्थक वहां से हटने को तैयार नहीं हुए। उन्होंने एलान किया कि जब तक पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल खुद वहां आकर यह नहीं बताते कि आखिर कुमार विश्वास को राज्यसभा का टिकट क्यों नहीं दिया जाएगा, तब तक वे लोग वहां से नहीं हटेंगे। ऐसा लग रहा था कि रामलीला मैदान के आंदोलन से निकलकर पार्टी और सरकार का सफर तय करने वाली आम आदमी पार्टी का मुख्यालय ही रामलीला मैदान बनने वाला है। आप के कुछ असंतुष्ट विधायक भी कुमार के समर्थन में वहां पहुंचने की तैयारी में थे, लेकिन अचानक कुमार विश्वास के समर्थकों ने मैदान छोड़ दिया और एक-एक कर सारे कार्यकर्ता निकल गए। बाद में वहां पहुंचने की तैयारी कर रहे एक विधयक ने कहा कि अच्छा हुआ कि उन्होंने कुमार के समर्थन में मोर्चा नहीं खोला, वरना उनकी भारी किरकिरी होती। उनका कहना था कि यह तो खोदा पहाड़, निकली चुहिया वाली कहावत चरितार्थ हो गई।

दावेदारी की होड़
कभी घोर कांग्रेसी रहे नरेश अग्रवाल फिलहाल सपा की ओर से राज्यसभा सांसद हैं। सपा के पारिवारिक झगड़े में हवा का रुख भांप कर वे उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ हो गए थे। राज्यसभा में दिल्ली में सीलिंग रोकने के लिए लाए गए विधेयक पर नरेश अग्रवाल ने कमाल का भाषण दिया, तब लगा कि शायद अब वे ‘आप’ में नया ठिकाना तलाश रहे हैं। दिल्ली के विधेयक पर बोलने के बजाए वे उपराज्यपाल के खिलाफ बोलने लगे और कहा कि उपराज्यपाल दिल्ली के मुख्यमंत्री को चपरासी समझते हैं। संसदीय कार्य राज्य मंत्री विजय गोयल ने उन्हें टोकने की कोशिश की, लेकिन अग्रवाल नहीं रुके और उपराज्यपाल की आलोचना करके दिल्ली सरकार को ज्यादा अधिकार दिलाने की मांग करते रहे। इसके बाद उन्होंने पाकिस्तान में कैद कुलभूषण जाधव की पत्नी और मां के साथ वहां किए गए बर्ताव को सही ठहरा दिया। हालांकि बाद में खिंचाई होने पर उन्होंने सफाई भी दी। वैसे दिल्ली की तीन राज्यसभा सीटों पर दावेदारी के लिए आम आदमी पार्टी के नेताओं में पहले से ही रेलमपेल मची है, ऐसे में किसी बाहरी की दाल तो गलने से रही।
विद्यार्थी हाजिर हों
दिल्ली के एक केंद्रीय विश्वविद्यालय ने शोध करने वाले विद्यार्थियों को प्राथमिक विद्यालयों के छात्रों की तरह रोजाना हाजिरी लगाने का आदेश दिया है। विद्यार्थी इसका जबर्दस्त विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह विश्वविद्यालय पूरी दुनिया में शोध के लिए जाना जाता है और शोध करने वाले छात्रों की कहीं हाजिरी नहीं लगती है। इसके पीछे उनका तर्क है कि शोध करने वाले छात्र समय और दिन देखकर शोध नहीं करते हैं। कभी-कभी तो वे 24 घंटे तक लगातार अपने शोध में लगे रहते हैं। ऐसे में हाजिरी लगाने का कोई औचित्य नहीं बनता है। अब विद्यार्थियों ने तय किया है कि वे चार जनवरी को सामूहिक रूप से कुलपति से मुलाकात करेंगे और इस मुद्दे पर विरोध दर्ज कराएंगे।

दिन में दिखे तारे
अदालती कार्यवाही के दौरान सीना तान कर चलने वाले जांच एजंसी के वकील फैसले के दिन मुंह छुपाते नजर आए। 2-जी मामले में जैसे ही अदालत ने फैसला सुनाना शुरू किया, सब बगलें झांकते नजर आए। दरअसल जांच एजंसी की ऐसी खिंचाई शायद ही कभी हुई हो! जज ओपी सैनी का गुस्सा झलक रहा था। अभियोजन को तो दिन में ही तारे नजर आने लगे। हद तो तब हो गई जब एजंसी के एक वकील ने अपने साथी वकील से फैसले की कॉपी को पूरा पढ़ने की अपील की। साथी ने चुटकी लेते हुए कहा, अदालत में जो सुना वो काफी नहीं है क्या!
बचने की तरकीब
दिल्ली में एक कहावत प्रचलित है कि दिल्ली पुलिस के बिना यहां पत्ता भी नहीं हिलता। इसी कहावत को चरितार्थ करते हुए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने प्रेस बयान में जानकारी दी ‘रिपेयर वर्क आॅफ लाजपतनगर फ्लाईओवर आॅन रिंग रोड’। इसके जरिए यह बताया गया कि मरम्मत के इस कार्य से किन जगहों के लोग प्रभावित होंगे और उन्हें किस रास्ते से अपना गंतव्य खोजना चाहिए। मथुरा रोड, आश्रम चौक, नोएडा रिंग रोड, बारापुला, लोधी रोड, मूलचंद फ्लाईओवर से भीष्म पितामह मार्ग होते वैकल्पिक रास्ते भी सुझाए गए। बेदिल ने जब इसकी तहकीकात की तो पता चला कि चूंकि इन फ्लाईओवरों पर होने वाले कार्यों से ट्रैफिक पुलिस सबसे ज्यादा माथापच्ची में फंसती है, लिहाजा उसने पहले ही प्रेस रिलीज जारी कर बचने की तरकीब निकाल ली ताकि उसे कुछ आराम मिल सके।
गठजोड़ की तैयारी
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भू-माफियाओं पर गुंडा एक्ट दर्ज करने की योजना को नाकाम करने के लिए माफिया और अधिकारियों में गठजोड़ हो गया है। कुछ बेहद चर्चित नामों को छोड़कर ग्राम सभा समेत मुआवजे वाली जमीनों पर कॉलोनी बसाने वाले भू माफियाओं के नाम तक तय करने में प्राधिकरण का भूलेख विभाग अभी तक नाकाम रहा है। वहीं दिखावे के रूप में बड़े अधिकारियों को बचाने के लिए छोटे कर्मचारियों को निलंबित कर माफियाओं को बचाने का रास्ता तैयार किया जा रहा है। इसी कड़ी में नोएडा प्राधिकरण ने दो लेखपालों को निलंबित कर दिया है। हालांकि सीधे तौर पर निलंबन का कारण किसानों की शिकायतों की अनदेखी और रिश्वतखोरी को बताया जा रहा है। जानकारों का मानना है कि पुराने लेखपालों को हटाने के बाद नए कर्मचारी को लगाना आखिरकार भू-माफियाओं के लिए मददगार ही साबित होगा क्योंकि नए कर्मचारी को इलाके को समझने और जानकारी लेने में लंबा समय लगेगा।
-बेदिल

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