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दिल्ली विधानसभा का दो दिवसीय सत्र शुरू, उपराज्यपाल को नहीं बुलाने पर नोक-झोंक

दिल्ली विधानसभा के दो दिवसीय सत्र की शुरुआत मंगलवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष में सत्र के आयोजन को लेकर नोक-झोंक के साथ हुई।

Author नई दिल्ली | January 18, 2017 02:36 am
दिल्ली के उप राज्यपाल को बधाई देते मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (फोटो-PTI)

दिल्ली विधानसभा के दो दिवसीय सत्र की शुरुआत मंगलवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष में सत्र के आयोजन को लेकर नोक-झोंक के साथ हुई। नए साल के पहले सत्र में उपराज्यपाल को नहीं बुलाने पर नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने नाराजगी जताई तो विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने भी नेता प्रतिपक्ष को नियमों का हवाला देते हुए कड़ी फटकार लगाई और उन पर विवादित टिप्पणी की। इस पर नेता प्रतिपक्ष ने अध्यक्ष से शब्दावली वापस लेने की मांग की।
विधानसभा सत्र शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सत्र के आयोजन को लेकर कहा कि यह उपराज्यपाल के पद और गरिमा का अपमान है क्योंकि दिल्ली विधानसभा के नियम 19 (1) के अंतर्गत साल के पहले सत्र की शुरुआत में उपराज्यपाल विधानसभा को संबोधित करते हैं। विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि नियमानुसार और परंपरानुसार भी दिल्ली विधानसभा के नव वर्ष का पहला सत्र अभी तक उपराज्यपाल द्वारा संबोधित किया जाता रहा है, लेकिन दिल्ली सरकार ने इस साल ऐसा नहीं किया और इसके लिए वर्तमान सत्र को चौथे सत्र का छठा भाग मान लिया है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि एक ही सत्र को छह भागों में विभाजित करना किसी भी दृष्टि से न्यायसंगत नहीं है।

नेता प्रतिपक्ष की इस दलील पर उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि किसी भी सरकार का अपना अधिकार क्षेत्र होता है। विधानसभा इस तरह के सत्र के आयोजन के लिए तत्पर है। इसकी कार्यशैली पर इस तरह की टिप्पणी करना ठीक नहीं है। जनता के मुद्दे पर बार-बार सत्र बुलाना प्रगतिशीलता की निशानी है।विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल ने नेता प्रतिपक्ष पर नियमों से अनभिज्ञ होने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब सत्रावसान नहीं किया जाता है तो सत्र को भागों में बुलाने की अनुमति होती है। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष की इस नियम से अनभिज्ञता से भ्रम फैल रहा है। विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि यह नए कैलेंडर वर्ष का पहला सत्र नहीं है, बल्कि चौथे सत्र का ही भाग है। उन्होंने उपराज्यपाल के पद को विवादों में घसीटने के लिए नेता प्रतिपक्ष की आलोचना की और चेतावनी दी कि तथ्यों की जांच के बिना विवाद प्रचारित न करें। वहीं नेता प्रतिपक्ष अपनी बात पर कायम रहते हुए सवाल करते रहे कि यह मानसून सत्र का हिस्सा कैसे है और अगर शीतकालीन सत्र है तो इसकी अनुमति उपराज्यपाल से क्यों नहीं ली गई। उन्होंने विधानसभा अक्ष्यक्ष से अपनी शब्दावली वापस लेने की मांग की। वहीं मगंलवार को सत्र के पहले दिन विधायक सौरभ भारद्वाज ने पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग के आचरण पर चर्चा का प्रस्ताव रखा, जिसे अनुमति नहीं मिली।

 

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