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आईएएस अधिकारी बोले – हम हड़ताल पर नहीं

दिल्ली के आइएएस अधिकारियों के संगठन ने राजधानी की निर्वाचित सरकार और आम आदमी पार्टी के इस दावे का खंडन किया है कि अधिकारी हड़ताल पर हैं।

Author नई दिल्ली, 17 जून। | June 18, 2018 5:04 AM
अधिकारियों ने इन आरोपों से इनकार किया कि दिल्ली सरकार में सचिव मंत्रियों और विधायकों के फोन कॉल का जवाब नहीं दे रहे हैं।

दिल्ली के आइएएस अधिकारियों के संगठन ने राजधानी की निर्वाचित सरकार और आम आदमी पार्टी के इस दावे का खंडन किया है कि अधिकारी हड़ताल पर हैं। रविवार को एक प्रेस वार्ता कर अधिकारियों ने यह भी कहा कि उन्हें निशाना बनाया जा रहा है, वे असुरक्षित महसूस करते हैं और वे उन बैठकों में शामिल नहीं होंगे जिसे वे असुरक्षित समझेंगे। अंशु प्रकाश मामले की तरफ इशारा करते हुए अधिकारियों ने कहा कि निर्वाचित सरकार द्वारा माफी मांगने से अफसरों और सरकार के बीच विश्वास लौटता। राजस्व सचिव मनीषा सक्सेना ने परिवहन आयुक्त वर्षा जोशी, दक्षिण दिल्ली जिलाधिकारी अमजद टाक और सूचना एवं प्रचार सचिव जयदेव सारंगी के साथ रविवार शाम को प्रेस क्लब में संवाददाता सम्मेलन कर अधिकारियों का पक्ष रखा।

उन्होंने कहा कि दिल्ली में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आइएएस) के अधिकारी काफी गंभीरता और समर्पण से काम कर रहे हैं। वे लोग राजनीति में शामिल नहीं हैं और तटस्थ हैं। उनका काम सरकार की नीतियों को लागू करना है। उन्होंने कहा , ‘हम सिर्फ कानून और संविधान के प्रति उत्तरदायी हैं।’ मनीषा सक्सेना ने कहा, ‘हमें निशाना बनाया गया और कहा गया कि हम किसी के साथ काम नहीं कर रहे हैं। हम यह बताना चाहेंगे कि हम हड़ताल पर नहीं हैं। ’ गौरतलब है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और अन्य मंत्रियों के साथ उपराज्यपाल के कार्यालय में धरना दे रहे हैं। वे लोग यह मांग कर रहे हैं कि उपराज्यपाल अनिल बैजल को आइएएस अधिकारियों की हड़ताल खत्म करने का निर्देश देना चाहिए और घर-घर राशन पहुंचाने की योजना को मंजूरी मिले।

हाल में पर्यावरण विभाग की बैठक में अधिकारियों के शामिल न होने के विवाद पर मनीषा सक्सेना कहा, ‘मंत्री द्वारा बुलाए गए बैठक के एक दिन पहले ही उपराज्यपाल ने प्रदूषण के मुद्दे पर बैठक बुलाई थी। चूंकि इस बैठक का फैसला उसी दिन लिया गया, डीपीसीसी (दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) सचिव और पर्यावरण सचिवों के पहले से कार्यक्रम थे, लेकिन बैठक में विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया और सरकार इस बारे में उनसे लिखित में या अन्य जरिए से संवाद कर सकती थी’।
सरकारी धरने की दूसरी मांग ‘घर-घर राशन को मंजूरी’ पर जयदेव सारंगी ने कहा राशन की घर-घर आपूर्ति की फाइल उपराज्यपाल द्वारा 20 मार्च को मुख्यमंत्री के पास भेजी गई और उक्त फाइल खाद्य आपूर्ति विभाग तक नहीं पहुंची है। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि मामला आईएएस अधिकारियों के पास लंबित है। मनीषा सक्सेना ने कहा, ‘नालों की सफाई को लेकर भी काम शुरू हो गया है। इसके बारे में गलत और भ्रामक जानकारी दी जा रही है। सिग्नेचर ब्रिज की जांच के दौरान प्रधान सचिव की तबियत ठीक नहीं थी और पर्यटन सचिव छुट्टी पर थीं। पर बाकी सभी अधिकारी थे। पॉली क्लीनिक और मोहल्ला क्लीनिक का काम भी रुका नहीं है। विधानसभा सत्र, विभागीय बैठकों से लेकर हर काम कर रहे हैं।

‘ट्रांजेंक्शन ऑफ बिजनेस रूल्स’ के तहत हम सभी मीटिंग में शामिल हो रहे हैं’। अधिकारियों ने इन आरोपों से इनकार किया कि दिल्ली सरकार में सचिव मंत्रियों और विधायकों के फोन कॉल का जवाब नहीं दे रहे हैं। कोई भी फोन कॉल अनुत्तरित नहीं रहता है। लेकिन, उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव के साथ जो हुआ तो हम कैसे सुरक्षित हैं। अधिकारियों ने कहा कि वे लोग उन बैठकों में शामिल नहीं होंगे, जिसे वे असुरक्षित समझेंगे। मनीषा सक्सेना ने यह दावा भी किया कि उन्हें अतीत में धमकी मिल चुकी है , हालांकि उन्होंने इस बारे में विस्तार से नहीं बताया। वर्षा जोशी ने आरोप लगाया कि उनके ऊपर व्यक्तिगत हमला किया जा रहा है। उनके आत्मविश्वास को क्षति पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। मनीषा सक्सेना ने कहा कि यह प्रेस वार्ता असामान्य है। उन्होंने कहा कि हमने कभी नहीं सोचा था कि हमें प्रेस वार्ता कर सफाई देनी पड़ेगी। अधिकारियों ने कहा कि अंशु प्रकाश मामले के बाद सरकार की तरफ से किसी तरह से पहल नहीं की गई। उन्होंने कहा कि निर्वाचित सरकार अगर माफी मांग लेती तो विश्वास पैदा होता।

हमें निशाना बनाया जा रहा है, हम असुरक्षित महसूस करते हैं और उन बैठकों में शामिल नहीं होंगे जिसे असुरक्षित समझेंगे। हम काम कर रहे हैं। हम यह बताना चाहेंगे कि हम हड़ताल पर नहीं हैं। -मनीषा सक्सेना

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