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केजरीवाल को नहीं मिलेगा जेटली का वित्तीय रिकॉर्ड, हाई कोर्ट ने कहा- याचिका में कोई दम नहीं

जेटली ने केजरीवाल के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर कर रखा है।

Author नई दिल्ली | March 1, 2017 3:36 PM
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल। (फाइल फोटो)

दिल्ली उच्च न्यायालय ने वित्त मंत्री अरुण जेटली के बैंक खातों, टैक्स रिटर्न और अन्य वित्तीय रिकॉर्डों से जुड़ी जानकारी उपलब्श कराने के लिये मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की याचिका बुधवार (1 मार्च) को खारिज कर दी। जेटली ने केजरीवाल के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर कर रखा है। उच्च न्यायालय ने कहा कि जेटली के परिवार के सदस्यों के बैंक खातों के लेन-देन और उनकी और परिजन की 10 प्रतिशत की हिस्सेदारी वाली कंपनियों की जानकारी मांगने वाली केजरीवाल की याचिका ‘बेवजह की पूछताछ’ है और इसमें कोई दम नहीं है।

न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलॉ ने जेटली की गवाही के कुछ हिस्सों को हटाने का केजरीवाल का आग्रह भी ठुकरा दिया। केजरीवाल ने दावा किया था कि ये भाजपा नेता की बहस और जवाब में शामिल नहीं थे। वकील अनुपम श्रीवास्तव ने केजरीवाल की ओर से कहा कि वह आदेश के खिलाफ याचिका दायर करना चाहते हैं। जेटली ने वर्ष 2015 में मानहानि का मुकदमा दायर करते हुए केजरीवाल, राघव चड्ढा, कुमार विश्वास, आशुतोष, संजय सिंह और दीपक वाजपेयी से 10 करोड़ रुपए के मुआवजे की मांग की थी।

आम आदमी पार्टी के नेताओं ने दिल्ली एंड डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट असोसिएशन में कथित अनियमितताओं और आर्थिक गड़बड़ियों को लेकर जेटली और उनके परिवार के सदस्यों पर सोशल मीडिया समेत कई मंचों से कथित तौर पर निशाना साधा था। जेटली करीब 13 साल वर्ष 2013 तक डीडीसीए के अध्यक्ष रहे थे। जेटली पहले ही इन आरोपों से इंकार कर चुके हैं। केजरीवाल की अर्जियां तो अदालत में खारिज हो गईं। लेकिन आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता राघव चड्ढा के लिए यह मामला इस लिहाज से सुखद रहा कि अदालत ने एक अतिरिक्त मुद्दा तय करने की उनके इस आवेदन को स्वीकार कर लिया कि एक सार्वजनिक हस्ती के खिलाफ सार्वजनिक तौर पर दिए गए बयान मानहानि की कार्रवाई के दायरे से बाहर हैं।

हालांकि भाजपा नेता की ओर से वरिष्ठ वकील राजीव नायर और वकील प्रतिभा एम सिंह के विरोध के बाद अदालत ने इसे अतिरिक्त मुद्दे के रूप में तैयार नहीं किया कि जेटली को यह साबित करना है कि उनके खिलाफ मानहानि वाले बयान दुर्भावनावश दिए गए थे। अदालत ने वर्ष 2000-2001 से 2012-13 तक डीडीसीए की मूल वार्षिक रिपोर्टों और खातों के विवरण दखिल करने का उनका अनुरोध भी स्वीकार कर लिया।

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