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नोटबंदी के खिलाफ याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई 22 को

याचिका में कहा गया कि सरकार द्वारा 2000 रुपए के नोटों को कानून की धारा 24(1) के खिलाफ प्रसारित किया जा रहा है।
Author नई दिल्ली | November 21, 2016 17:58 pm
कड़ी सुरक्षा के बीच केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में बैक से लाए गए नए नोट। (PTI File Photo)

दिल्ली उच्च न्यायालय ने नोटबंदी के खिलाफ दायर एक याचिका पर सुनवाई के लिए मंगलवार (22 नवंबर) को सहमत होते हुए कहा कि एक बार मुद्रा के अमान्य हो जाने के बाद सरकार अस्पतालों और पेट्रोल पंपों जैसी कुछ सार्वजनिक सेवाओं को पुराने नोट लेने के लिए कैसे कह सकती है। न्यायाधीश बी डी अहमद और न्यायाधीश जयंत नाथ की पीठ ने याचिका को मंगलवार (22 नवंबर) को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की है। इस याचिका में 2000 रुपए के नए नोट बंद करने की मांग भी की गई है और नोटबंदी के कदम को ‘असंवैधानिक एवं खराब नियम’ बताया गया है। याचिकाकर्ता पूजा महाजन एक डिजाइनर शोरूम चलाती हैं। उन्होंने याचिका में आपात स्थिति का हवाला देते हुए कहा है कि वह अपनी आजीविका कमाने से वंचित हो रही हैं और इससे उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। उन्होंने सरकार पर दोहरा रुख अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि एक ओर वह लोगों को पुराने नोट बैंक खातों में जमा करवाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है और दूसरी ओर ढाई लाख रुपए से अधिक की राशि जमा कराने पर कार्रवाई की धमकी दे रही है।

याचिकाकर्ता के वकीलों ए. मैत्री और राधिका चंद्रशेखर ने अदालत से अपील की कि आठ नवंबर और उसके बाद जारी विभिन्न अधिसूचनाओं को रद्द किया जाये। वकीलों ने कहा कि ये अधिसूचनाएं देश के संविधान और भारतीय रिजर्व बैंक कानून का उल्लंघन है। रिजर्व बैंक कानून की धारा 24 नोटों को चलन से बाहर करने से जुड़ी है। कानून की धारा 24 (1) और 24 (2) रिजर्व बैंक और केंद्र को विभिन्न राशियों के बैंक नोट जारी करने का अधिकार देती हैं। याचिका में कहा गया है कि अब तक सरकार ने 500 रुपए और 1000 रुपए के नोट को चलन से बाहर करने के लिए रिजर्व बैंक कानून की धारा 24(2) के तहत कोई अधिसूचना जारी नहीं की है। याचिका में कहा गया कि सरकार द्वारा 2000 रुपए के नोटों को कानून की धारा 24(1) के खिलाफ प्रसारित किया जा रहा है।

याचिकाकर्ता ने वित्त मंत्रालय से निर्देश की मांग करते हुए कहा है कि सरकार का फैसला ‘मनमाना और असंवैधानिक’ है क्योंकि उसने एक ओर तो 500 रुपए और 1000 रुपए के नोट रद्द कर दिए हैं, दूसरी ओर उसने आरबीआई कानून के प्रावधानों से इतर 2000 रुपए के नोटों का चलन शुरू कर दिया है। याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि ‘नोट बदलने के वादे के चलते सरकार, नोट बदलने के लिए जमा कराई गई नकदी को बेनामी धन कहकर आयकर कानून के प्रावधानों का दुरुपयोग नहीं कर सकती और लोगों को दंडित नहीं कर सकती।’

आरबीआई कानून की धारा 24(1) के अनुसार, बैंक के नोटों की राशि दो रुपए, पांच रुपए, 10 रुपए, 20 रुपए, 50 रुपए, 100 रुपए, 500 रुपए, 1000 रुपए, 5000 रुपए और 10,000 रुपए या ऐसी राशियों की होनी चाहिए और यह राशि 10,000 रुपए से ज्यादा की नहीं होनी चाहिए। केंद्र सरकार इस बारे में केंद्रीय बोर्ड की सिफारिश के आधार पर इसका उल्लेख कर सकती है। कानून की धारा 24(2) कहती है कि केंद्रीय बोर्ड की सिफारिश पर केन्द्र सरकार बैंक नोट जारी नहीं करने या उन्हें चलन से बाहर करने का निर्देश जारी कर सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काले धन, नकली मुद्रा और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा हमला बोलते हुए आठ नवंबर रात 12 बजे से 1000 रुपए और 500 रुपए के नोटों को चलन से बाहर करने की घोषणा की थी।

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