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दिल्ली सरकार ने कन्हैया को दी क्लीन चिट, बताई उमर खालिद की भूमिका में आगे जांच की जरूरत

दिल्ली सरकार की मजिस्ट्रेट जांच में जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को क्लीन चीट दी गई है। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि कन्हैया कुमार के खिलाफ देशविरोधी नारेबाजी का कोई सबूत नहीं पाया गया।

Author नई दिल्ली | March 4, 2016 1:52 AM
देशद्रोह के आरोपी उमर खालिद और जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार

दिल्ली सरकार की मजिस्ट्रेट जांच में जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार को क्लीन चीट दी गई है। जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि कन्हैया कुमार के खिलाफ देशविरोधी नारेबाजी का कोई सबूत नहीं पाया गया। दिल्ली सरकार के सूत्रों के अनुसार सरकार की कानूनी टीम रिपोर्ट का अध्ययन करेगी उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं उमर खालिद की भूमिका में आगे जांच की जरूरत बताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, सात में से तीन वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई है। गौरतलब है कि पूरे मामले में पुलिस ने कन्हैया के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया था।

जिला मजिस्ट्रेट संजय कुमार ने दिल्ली सरकार को सौंपे 112 पन्नों की रिपोर्ट में कहा है कि परिसर में राष्ट्रविरोधी नारेबाजी की गई और जेएनयू प्रशासन पहले ही उन ‘कुछ चेहरों’ की पहचान कर चुका है जिन्हें ‘साफ तौर पर’ नारे लगाते सुना गया। जांच समिति ने कहा कि उन लोगों का पता लगाना चाहिए औैर उनकी भूमिका की जांच होनी चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया कि कुमार के खिलाफ ‘कुछ भी प्रतिकूल’ नहीं पाया गया और उपलब्ध किसी भी गवाह या वीडियो से जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष के खिलाफ आरोप की पुष्टि नहीं होती है। रिपोर्ट के मुताबिक, कन्हैया संभवत: वहां मध्यस्थता के लिए मौजूद था। कुमार को बुधवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले में छह महीने की अंतरिम जमानत दी थी।

रिपोर्ट में अफजल गुरु की फांसी के विरोध में नौ फरवरी को आयोजित किए गए कार्यक्रम में जेएनयू के कुछ अन्य छात्रों और वहां मौजूद लोगों की भूमिका पर भी टिप्पणी की गई है। उमर खालिद के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है, ‘उमर खालिद कार्यक्रम का मुख्य आयोजक था, उसे कश्मीर के आत्मनिर्णय और अफजल गुरु को लेकर उसके रुख के लिए जाना जाता है। उसने पहले भी इस तरह के कई कार्यक्रमों का आयोजन किया था’।

रिपोर्ट के अनुसार खालिद कई वीडियो में दिखाई दिया और साक्ष्यों के आधार पर यह माना जा सकता है कि शुरू की नारेबाजी उसने की जिसके बाद स्थिति और बिगड़ी। रिपोर्ट में खालिद की भूमिका की जांच की अनुसंशा की गई है। अनिर्बान और आशुतोष के बारे में रिपोर्ट में कहा गया है कि इन्होंने संभवत: दूसरा और तीसरा नारा लगाया जो कि अफजल को लेकर था, हालांकि यह वीडियो या गवाहों से स्पष्ट नहीं है। उमर और अनिर्बान भट्टाचार्य ने 24 फरवरी की रात को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था जिसके बाद उन्हें देशद्रोह के मामले में गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आशुतोष कुमार से भी दो बार पूछताछ की थी।

बाहरी लोगों की भूमिका पर रिपोर्ट में कहा गया है कि चेहरे ढके हुए कश्मीरी मूल के कई बाहरी लोगों को वीडियो में भारत विरोधी और अफजल गुरु समर्थक नारेबाजी करते देखा गया था और उनकी पहचान व भूमिका की जांच की जानी चाहिए। पाकिस्तान के पक्ष में नारेबाजी के आरोपों पर रिपोर्ट का कहना है कि पुलिस एफआइआर से लगता है कि पुलिस इस तरह के नारे के बारे में निश्चित नहीं थी, न ही पुलिस को यह स्पष्ट जानकारी हो पाई कि यह नारा किसने लगाया। कार्यक्रम के सात वीडियो हैदराबाद के फोरेंसिक लैब में भेजे गए थे जिनमें से तीन वीडियो में छेड़छाड़ पाई गई जिनमें से एक समाचार चैनल की क्लीपिंग है।

रिपोर्ट में वहां तैनात निजी सुरक्षा सेवा के दो कर्मियों और अन्य साक्ष्यों के बयानों पर भी सवाल उठाए गए हैं। दिल्ली सरकार ने कन्हैया की गिरफ्तारी को लेकर व्यापक आक्रोश पैदा होने के बाद पिछली 13 फरवरी को जांच का आदेश दिया था।

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