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केजरीवाल और नजीब की ‘जंग’ में पीएम मोदी करेंगे दखल!

दिल्ली में तबादलों और तैनाती के अधिकारों की लड़ाई और तीखी हो रही है। केजरीवाल ने बुधवार को इस जंग को नरेंद्र मोदी तक ले जाते हुए उनसे कहा कि शहर की सरकार को स्वतंत्र रूप से काम करने दिया जाए...

Author May 21, 2015 12:49 PM
उपराज्यपाल नजीब जंग ने इसके साथ ही दिल्ली पुलिस के सात निरीक्षकों का स्थानांतरण भ्रष्टाचार निरोधक शाखा में कर दिया।

दिल्ली में तबादलों और तैनाती के अधिकारों की लड़ाई और तीखी हो रही है। केजरीवाल ने बुधवार को इस जंग को नरेंद्र मोदी तक ले जाते हुए उनसे कहा कि शहर की सरकार को स्वतंत्र रूप से काम करने दिया जाए। मुख्यमंत्री ने केंद्र पर आरोप लगाया कि वह दिल्ली का प्रशासन चलाने की कोशिश कर रहा है। केजरीवाल का खत जारी होते ही पलटवार करते हुए उपराज्यपाल नजीब जंग ने मुख्यमंत्री के उन आदेशों को असंवैधानिक करार दिया जिनमें अधिकारियों से फाइलें सीधे मंत्रियों को देने को कहा गया था। जंग ने दिल्ली सरकार की ओर से किए गए सभी तबादलों को रद्द कर दिया है। वहीं केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री को इस विवाद का हल ढूंढना चाहिए।

उपराज्यपाल नजीब जंग ने पिछले दिनों दिल्ली सरकार के विभिन्न तबादलों के आदेश को पलट दिया और सभी तबादले राजनिवास से किए जाने की जानकारी दी है। राजनिवास से जारी एक बयान में कहा गया है कि दिल्ली एक राज्य नहीं है बल्कि संघ शासित प्रदेश है जिसके पास अपनी विधानसभा है, इसलिए कुछ अहम बिंदु इसे अलग करते हैं। इस संबंध में ये स्पष्टीकरण जरूरी है। बयान में कहा गया है कि 15 मई को उपमुख्यमंत्री ने एक आदेश जारी किया था जो स्थायी आदेश नौ मई 1994 के विरुद्ध था, जिसके तहत सरकार में वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले व नियुक्ति के स्तर को परिभाषित किया गया है। इसके साथ ही केजरीवाल के 17 मई के दिए आदेश का भी जिक्र किया गया है जिसमें मुख्यमंत्री ने सभी सचिवों को निर्देश दिया था कि सभी फाइलों को, जिसमें उपराज्यपाल के विशेष अधिकार क्षेत्र की फाइलें भी शामिल हैं, को मंत्रियों के माध्यम से भेजा जाए और यह भी निर्देश दिया गया था कि उपराज्यपाल के अधिकारियों को दिए गए आदेश को सर्वप्रथम मंत्रियों को फैसले के लिए भेजा जाए।

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जंग ने बुधवार को केजरीवाल को लिखे खत में कहा कि आप सरकार के कुछ निर्देश राष्ट्रीय राजधानी के तौर पर दिल्ली को प्राप्त विशेष दर्जे को धूमिल करते लगते हैं। जंग ने मुख्यमंत्री से यह भी कहा कि पिछले चार दिन में आप सरकार के उनसे मंजूरी लिए बिना की गई तैनातियां वैध नहीं हैं। आइएएस, डीएएनआइसीएस और डीएएसएस कैडर के अधिकारियों की नियुक्ति और तबादलों का एकमात्र अधिकार उन्हें है। डीएएसएस कैडर के कर्मचारियों में लिपिक शामिल हैं। केजरीवाल ने मंगलवार को इस मामले में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात की थी और बुधवार को मोदी को लिखे पत्र में कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों को कामकाज के वितरण में निर्वाचित सरकार की भूमिका होनी चाहिए।

जंग ने यह कदम ऐसे समय में उठाया जब केजरीवाल ने बुधवार को प्रधानमंत्री को खत लिख कर कहा कि दिल्ली सरकार को आजादी से काम करने दिया जाए। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से कहा, ‘दिल्ली में केंद्र सरकार उपराज्यपाल के माध्यम से असंवैधानिक तरीके से सरकार चलाने की कोशिश कर रही है। दिल्ली सरकार को आजादी से काम करने दें’।

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दूसरी ओर मनीष सिसोदिया ने उपराज्यपाल के पत्र का जवाब दिया। उन्होंने अपने पत्र में जंग से कहा कि वे संविधान, एनसीटी दिल्ली सरकार अधिनियम के प्रावधानों और कामकाज संबंधी नियमों को विस्तार से बताएं जो उन्हें इस तरह के दिशानिर्देश जारी करने का अधिकार देते हैं।

वहीं इस तनातनी में फंसा हुआ महसूस कर रहे शीर्ष अधिकारी संशय में हैं कि वे किसके आदेश का पालन करें। बुधवार को उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की अध्यक्षता में करीब तीन घंटे तक चली बैठक में कई नौकरशाहों ने मौजूदा गतिरोध के कारण उनके सामने आ रही कठिनाइयों के बारे में बात की। कुछ देर के लिए बैठक में शामिल हुए केजरीवाल ने अधिकारियों से बैखौफ होकर संविधान के प्रावधानों के अनुसार काम करने को कहा। सिसोदिया ने नौकरशाहों को आश्वासन दिया कि अनेक मुद्दों पर और खासतौर पर उपराज्यपाल के दफ्तर की भूमिका वाले मसलों पर जल्द ही विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे। सिसोदिया ने नौकरशाहों से यह भी कहा कि जंग के आदेशों का आंख बंद करके पालन नहीं करें। अधिकारियों ने अलग से भी बैठक की और तबादलों व तैनातियों को राजनीतिक रंग दिए जाने की निंदा की।

दूसरी ओर बुधवार को केजरीवाल ने एक समारोह में कहा, ‘सभी हमारे खिलाफ एकजुट हो गए हैं। मंगलवार को मैं एक वरिष्ठ वकील से मिलने गया, जिन्होंने मुझसे कहा कि उन्होंने समाचार चैनलों पर देखा कि सब आप सरकार के खिलाफ हैं लेकिन जनता हमारे साथ है’। केजरीवाल ने सोमवार को मुख्य सचिव समेत नौकरशाहों को दिए निर्देश में कहा था कि उपराज्यपाल से मिले किसी तरह के निर्देश पर कार्रवाई करने से पहले उसके बारे में उनसे या अन्य मंत्रियों से सलाह ली जाए।

इसी तकरार के बीच केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने राष्ट्रपति से मुलाकात की। वैसे सिंह ने इससे इनकार किया कि राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान उन्होंने नजीब और केजरीवाल के बीच जारी तनातनी पर कोई बात की। गृह मंत्री से जब पूछा गया कि क्या उन्होंने राष्ट्रपति को नजीब और केजरीवाल के बीच जारी तनातनी पर कोई जानकारी दी तो उन्होंने कहा कि मैं यह स्पष्ट करना चाहूंगा कि इस पर कोई चर्चा नहीं हुई है। सिंह ने कहा कि उन्होंने विदेश यात्रा और देहरादून के दौरे से पहले राष्ट्रपति से मुलाकात का वक्त मांगा था। बहरहाल, सूत्रों ने बताया कि 15 मिनट की मुलाकात के दौरान गृह मंत्री ने दिल्ली प्रशासन के परिप्रेक्ष्य में केंद्र सरकार के रुख से मुखर्जी को अवगत कराया है। सिंह ने दिल्ली सरकार के संदर्भ में उपराज्यपाल की जिम्मेदारियों और दायित्वों पर अटार्नी जनरल से गृह मंत्रालय की ओर से ली गई सलाह से राष्ट्रपति को अवगत कराया। दिल्ली सरकार केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन आती है।

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