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दिल्ली: बलात्कार, छेड़छाड़ और दहेज हत्या के मामले बढ़े

आपराधिक गतिविधियों पर लगाम के लिहाज से राजधानी की पुलिस के लिए यह साल बहुत अच्छा नहीं रहा। महिलाओं के साथ हो रहे अपराध, बलात्कार, छेड़छाड़, ससुरालियों के हाथों उत्पीड़न और दहेज हत्याओं में बढ़ोतरी तो हुई ही इससे अलग फिरौती, हत्या, वाहन चोरी, घर में चोरी, सड़क दुर्घटना और अन्य आइपीसी की धाराओं में दर्ज मामले की संख्या में बीते साल की तुलना में इस साल बढ़ोतरी देखी जा रही है।

Author नई दिल्ली | December 20, 2018 5:41 AM
तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर (फाइल)

आपराधिक गतिविधियों पर लगाम के लिहाज से राजधानी की पुलिस के लिए यह साल बहुत अच्छा नहीं रहा। महिलाओं के साथ हो रहे अपराध, बलात्कार, छेड़छाड़, ससुरालियों के हाथों उत्पीड़न और दहेज हत्याओं में बढ़ोतरी तो हुई ही इससे अलग फिरौती, हत्या, वाहन चोरी, घर में चोरी, सड़क दुर्घटना और अन्य आइपीसी की धाराओं में दर्ज मामले की संख्या में बीते साल की तुलना में इस साल बढ़ोतरी देखी जा रही है। बीते दस सालों के पुलिस आंकड़े बताते हैं कि पुलिस के खौफ का असर दिल्ली में नहीं के बराबर है। जबकि बीते साल की तुलना में इस साल 30 नवंबर तक के आंकड़े मिले जुले हैं। पुलिस के लिए खुश होने वाली बात यह है कि झपटमारी, सेंधमारी, डकैती, दंगा और लूटपाट की घटनाओं कमी आई है।

स्पेशल सेल, अपराध शाखा और जिले की पुलिस की सावधानियों के बाबजूद फरौती के लिए अपहरण की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है। जबकि पुलिस के ताजा आंकड़ों के मुताबिक बीते साल जहां अपहरण की 14 वारदातें हुई थीं वहीं इस साल नवंबर तक राजधानी में अपहरण की 19 घटनाएं दर्ज की गई हैं। छोटी-छोटी बातों पर गोली चलाना और हत्याकर देना आम हो गई है। बीते साल हत्या के जहां 448 मामले दर्ज हुए थे। वहीं इस साल यह आंकड़ा 459 पर पहुंच गया है। वाहनों की चोरी के जहां बीते साल 37180 मामले दर्ज हुए थे। वहीं इस साल यह नवंबर तक ही यह आंकड़ा 42192 तक पहुंच गया है। चोरी की अन्य वारदातों भी बीते साल कि मुकाबले इस साल बढ़े हैं। बीते साल जहां चोरी की 102924 घटनाएं हुर्इं वहीं इस साल 122712 चोरी के मामले सामने आए।
जांबाज ट्रैफिक पुलिस की मुस्तैदी के बाद भी सड़कों पर तेज रफ्तार और अनाप-शनाप तरीके से गाड़ियां चलाने पर रोक नहीं हो पाई है। यही कारण है कि बीते साल जहां सड़क दुर्घटनाएं 1400 थी वहीं इस साल दुर्घटनाओं का आंकड़ा 1447 हो गया। आइपीसी की अन्य वारदातों में भी पुलिस की किरकिरी होती नजर आई।

हत्या के प्रयास के मामलों में आई कमी
पुलिस के आंकड़े जिन मामले में सकारात्मक नजर आए वो हत्या के प्रयास के हैं। बीते साल 583 की तुलना में इस साल 494 पर पहुंचना है। इसी तरह डकैती की वारदातें इस साल 23 दर्ज हुई है जबकि बीते साल यह 35 थी। लूटपाट में भी पुलिस वाले आंकड़ों की बाजीगरी दिखाने में कामयाब हुए हैं। इस मामले में पुलिस अधिकारी का अपना तर्क है। अधिकारी मानते हैं कि अपहरण के मामलों में उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता अपहरण होने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की होती है। हमारी मुख्य चुनौती होती है कि पीड़ित को बिना किसी चोट के सुरक्षित बचा लिया जाए। हमें अपहर्ताओं की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखनी होती है। अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त डॉ जी राम गोपाल नाइक के मुताबिक ‘पीड़ितों के माता-पिता को विश्वास में लेना अक्सर कठिन होता है। इस तरह की कई वारदातें हैं।

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