बगैर हथियार के ड्यूटी पर आया नायब कोर्ट तो बिफरे जज, सुरक्षा पर चिंता जता सुप्रीम कोर्ट का हवाला दे कही ये बात

कोर्ट ने कहा कि आपराधिक न्यायालय में कार्य करने की अपनी सुरक्षा आवश्यकताएं होती हैं। विशेष रूप से उस परिदृश्य में जब सर्वोच्च न्यायालय ने भी ट्रायल कोर्ट के न्यायाधीशों के लिए सुरक्षा खतरे का संज्ञान लिया है।

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नायब कोर्ट के बिना हथियार के ड्यूटी के आने पर बिफरी अदालत (प्रतीकात्मक फोटो- एक्सप्रेस)

दिल्ली के एक कोर्ट में बिना हथियार के ही सुरक्षा ड्यूटी पर नायब के पहुंचने का मामला सामने आया है। इसकी जानकारी जब कोर्ट को हुई तो वो बिफर पड़ा। कोर्ट ने सुरक्षा पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला भी दिया।

दरअसल दिल्ली के कोर्ट कई बार गैंगवार के गवाह बन चुके हैं। पिछले कुछ महीनों पहले ही कोर्ट में ही गैंगेस्टर को गोली मार दी गई थी। इसके बाद से ही कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी गई थी। उसके बाद भी बिना हथियार के ड्यूटी पर पुलिसकर्मी का आना कई बड़े सवाल खड़े कर दे रहा है।

नायब, कोर्ट में मौजूद उस पुलिसकर्मी को कहते हैं जो स्थानीय पुलिस स्टेशन, जेल अधिकारियों और एक विशेष क्षेत्र के अधिकार क्षेत्र वाले अदालत के बीच संपर्क के रूप में कार्य करता है। वे अदालत के आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए किसी मामले से जुड़े पुलिस अधिकारियों को जारी किए गए समन या निर्देशों का रजिस्टर रखते हैं।

पीटीआई के अनुसार अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सोनू अग्निहोत्री ने कहा कि टिप्पणी करने के बाद अभियोजन पक्ष का नायब अदालत की बिना अनुमति के ही अदालत परिसर से निकल गया। पूछताछ करने पर, उसने न्यायाधीश से कहा कि वह अदालत का निजी सुरक्षा अधिकारी (पीएसओ) नहीं है और अतिरिक्त लोक अभियोजक के साथ उसकी ड्यूटी समाप्त होती है।

कोर्ट ने कहा कि आपराधिक न्यायालय में कार्य करने की अपनी सुरक्षा आवश्यकताएं होती हैं। विशेष रूप से उस परिदृश्य में जब सुप्रीम कोर्ट ने भी ट्रायल कोर्ट के जजों के लिए सुरक्षा खतरे का संज्ञान लिया है। कोर्ट ने आगे कहा कि यह बताना जरूरी है कि पुलिस विभाग की तरफ से पहले जारी किए गए पत्रों के बावजूद अभियोजन नायब बिना हथियार के ही कोर्ट आते रहे हैं।

कोर्ट ने 24 नवंबर को एक आदेश में कहा- “अभियोजन नायब अदालत का रवैया अजीब लगता है क्योंकि जब तक अदालत काम कर रही है, तब तक किसी भी तत्काल आदेश की डिलीवरी जैसी सेवाओं की कोई आवश्यकता हो सकती है”। सत्र न्यायाधीश ने इस संबंध में दिल्ली पुलिस आयुक्त और पुलिस उपायुक्त से रिपोर्ट मांगी है। अब इस मामले की अगली सुनवाई आठ दिसंबर को होगी।

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