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दिल्ली: पार्षदों की मांग, सांसदों-विधायकों की तरह मिले वेतन और सुविधाएं

यह तर्क दिया जा रहा है कि सांसदों और विधायकों की तरह पार्षद भी जनप्रतिनिधि हैं और लोकहित के कार्य व कार्यालय का खर्च उन्हें भारी पड़ रहा है।

Author नई दिल्ली | June 7, 2017 07:37 am
दिल्‍ली नगर निगम चुनाव।

 

कर्मचारियों को वेतन देने के नाम पर भले ही नगर निगम घाटे का रोना रोते हों, लेकिन सांसदों और विधायकों की तरह अब निगम के पार्षद भी वेतन और भत्ते की मांग कर रहे हैं। इस बारे में यह तर्क दिया जा रहा है कि सांसदों और विधायकों की तरह पार्षद भी जनप्रतिनिधि हैं और लोकहित के कार्य व कार्यालय का खर्च उन्हें भारी पड़ रहा है। वेतन और भत्ते सहित अन्य सुविधाएं मिलने से वे और तेजी से कार्य कर पाएंगे। हालांकि दक्षिणी निगम के इस प्रस्ताव से पूर्वी दिल्ली और उत्तरी दिल्ली की मेयर इत्तेफाक नहीं रखतीं। बंटवारे से पहले से 300 रुपए प्रति बैठक पाने वाले पार्षदों का धैर्य अब टूट गया है। उन्हें वेतन और भत्ते के बिना काम करना रास नहीं आ रहा। यही कारण है कि दक्षिणी निगम में सदन की नेता शिखा राय ने दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के पास अपने 104 पार्षदों की सुविधाओं के बाबत प्रस्ताव भेज दिया है। चूंकि इसमें सत्तापक्ष और विपक्ष के आला पदाधिकारियों को वेतन और अन्य सुविधाएं देने की बात कही गई है लिहाजा इसका कोई विरोध नहीं हो रहा और इसे निगम के पटल से पास कर दिया गया है।

अगर इस प्रस्ताव को उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार की मंजूरी मिल गई तो दक्षिणी निगम के मेयर, उपमेयर, स्थायी समिति के अध्यक्ष, नेता सदन और विपक्ष के नेता को प्रतिमाह 15 हजार रुपए मानदेय, अन्य पार्षदों को 10 हजार रुपए मानदेय, 300 रुपए प्रति बैठक के बदले 1000 रुपए, कार्यालय खर्च व स्टेशनरी के लिए छह हजार रुपए प्रतिमाह, कंप्यूटर आॅपरेटर के लिए 5000 रुपए प्रतिमाह और जलपान के लिए 5000 रुपए प्रतिमाह मिलेंगे। नेता सदन ने प्रस्ताव में बारीकी से जिक्र किया है कि दिल्ली के अलावा अन्य राज्यों में पार्षदों को भत्ते देने का प्रावधान है इसलिए दिल्ली नगर निगम में भी पार्षदों को इस प्रकार की सुविधाएं दी जानी चाहिए। हालांकि पूर्वी निगम की मेयर नीमा भगत और उत्तरी निगम की मेयर प्रीति अग्रवाल दक्षिणी निगम के इस प्रस्ताव से इत्तेफाक नहीं रखतीं उनका कहना है कि अभी हमारे कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा। जरूरतमंद बुजुर्गों, विधवाओं और विकलांगों को पेशन नहीं मिल रही, लिहाजा अभी इस तरह का प्रस्ताव लाने की उनकी कोई योजना नहीं है।

 

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