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डॉक्टरों का दावा: एक बार के बाद नहीं होगा चिकनगुनिया

दिल्ली में चिकनगुनिया से होने वाली मौतों का विश्लेषण करें पता चलेगा कि जिनकी मौत हुई है उन्हें उच्च रक्तचाप, मधुमेह या गुर्दे या गुर्दे की अन्य बीमारी भी थी।

Author नई दिल्ली | September 26, 2016 2:47 AM
चिकनगुनिया।

यदि आप एक बार चिकनगुनिया से बच निकले हैं तो आप खुश हो जाइए यह बीमारी आपको दोबारा नहीं होगी। मौतों के सिलसिले के बीच एम्स के सूक्ष्म जैविकी विभाग के डॉ ललित धर का कहना है कि आपका शरीर इस बीमारे के खिलाफ एंटी बॉडी तैयार कर लेता है और आप चिकनगुनिया पू्रफ हो जाते हैं। लेकिन डेंगू के चार प्रकार के वायरस होने के कारण यह आपको चार बार हो सकता है। जिसे बाद ही आप डेंगू पू्रफ हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि डेंगू चिकनगुनिया से ज्यादा खतरनाक है।

इसलिए डेंगू की पुष्टि के लिए ज्यादा नमूनों की जांच की गई है। डॉ धर ने बताया कि जिनको चिकनगुनिया है उनमें तो दर्द निवारक सहित कुछ दवाएं दे देने में नुकसान नहीं है हालांकि जिनको डेंगू है उनके लिए एंटीबायोटिक या दर्दनिवारक देना जानलेवा हो सकता है। कई मरीजों में दोनों संक्रमण होने सूरत में डेंगू के हिसाब से ही इलाज दिया जाना जरूरी है। एम्स मे चिकनगुनिया के वायरस के बारे मे अध्ययन जारी है। इसकी रपट अगले हफ्ते आने की संभावना है। हालांकि चिकनगुनिया से होने वाली मौतों पर चल रही बहस के बीच चिकित्सकों में भी इसे लेकर कई राय है। कुछ चिकित्सकों का दावा है कि इसके केवल 0.1 फीसद मामलों में ही जान का खतरा है, जबकि कुछ चिकित्सकों का कहना है कि वायरस जनित रोग से जान जाने का खतरा बहुत ज्यादा है।

यहां तक कि सामान्य फ्लू व निमोनिया भी जानलेवा होती है। अकेले एम्स ने दो हजार और सफदरजंग अस्पताल में करीब 1200 लोगों में चिकनगुनिया की पुष्टि हो चुकी है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ एसके शर्मा का कहना है चिकनगुनिया से बीमार एक हजार लोगों में किसी एक व्यक्ति को यानी 0.1 फीसद के ही जाने जाने का खतरा होता है। वह भी तक जब बीमार व्यक्ति पहले से ही दूसरे संक्रमण से ग्रसित हो। इस लिहाज से चिकनगुनिया जानलेवा नहीं है। गौरतलब है कि चिकनगुनिया के कारण शहर के विभिन्न अस्पतालों में 15 व्यक्तियों के मरने की सूचना है। एम्स में भी एक व्यक्ति की मौत हुई है, जबकि राजधानी में इस साल करीब 2,600 लोग इस मच्छर जनित बीमारी से ग्रसित हैं।

एम्स के निदेशक डॉ एमसी मिश्रा का कहना है कि अगर दिल्ली में चिकनगुनिया से होने वाली मौतों का विश्लेषण करें पता चलेगा कि जिनकी मौत हुई है उन्हें उच्च रक्तचाप, मधुमेह या गुर्दे या गुर्दे की अन्य बीमारी भी थी। लेकिन उनकी मौत का कारण चिकनगुनिया नहीं है। हालांकि सर गंगाराम अस्पताल के चिकित्सकों का मानना है कि इन मौतों का कारण चिकनगुनिया ही है। सर गंगाराम अस्पताल में चिकनगुनिया से करीब आधा दर्जन लोगों की मौत की खबर है। इसी तरह 19 तारीख को सफदरजंग में एक बुजुर्ग की मौत चिकनगुनिया और डेंगू से एक बच्चे की मौत सफदरजंग अस्पताल में हो गई। राममनोहर लोहिया में भी एक बुजुर्ग ने राममनोहर लोहिया अस्पताल में दम तोड़ दिया।

 

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