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जो भी मुस्लिम है, उसे अंदर जाने दो’, राजधानी स्कूल के मालिक ने गार्ड से कहा, दिल्ली दंगों की चार्जशीट में पुलिस का दावा

राजधानी स्कूल के मालिक फैसल फारूक के वकील आर कोचर ने कहा कि पुलिस के पास अपने दावों को साबित करने के लिए कोई सबूत ही नहीं हैं।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: July 8, 2020 2:34 PM
CRIME, CRIME NEWSयह राजधानी पब्लिक स्कूल के छत की तस्वीर है। दिल्ली पुलिस का दावा है कि हिंसा के वक्त छत से गोलियां दागी गई थीं। फोटो सोर्स – Indian Express

दिल्ली में फरवरी में सीएए कानून के विरोध में हुए दंगों को लेकर अब हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने राजधानी स्कूल के संचालक फैसल फारूक की दंगों में कथित भूमिका का हाल ही में दाखिल चार्जशीट में जिक्र किया था। इसमें पुलिस ने दावा किया है कि फैसल ने कथित तौर पर अपने स्कूल के गार्डों से कहा था कि वे मुस्लिमों को स्कूल के परिसर में आने दें, ताकि हिंसा भड़काई जा सके। पुलिस ने फारूक और 17 अन्य लोगों पर दंगे भड़काने, हत्या की कोशिश और नजदीकी डीआरपी पब्लिक स्कूल में हिंसा की साजिश के तहत केस दर्ज किया है।

पुलिस ने आरोप लगाया है कि फारूक ने अपने स्कूल के करीब ही लोगों को इकट्ठा करने में अहम भूमिका निभाई। पुलिस का दावा है कि फारूक ने ही शाहरुख मलिक (गिरफ्तार) को समुदाय के लिए किसी भी तरह के बलिदान के लिए तैयार रहने का सुझाव दिया था। इसके लिए फारूक ने शाहरुख को 5000 रुपए भी दिए थे और हिंदुओं के कारोबार को साफ कर देने के लिए कहा था।

इन आरोपों पर जवाब देते हुए फारूक के वकील आर कोचर ने कहा कि पुलिस ने एक सादे कागज पर शाहरुख के हस्ताक्षर ले लिए और इस पर उसका बयान लिख दिया। बता दें कि इस मामले में डीआरपी स्कूल का सुरक्षा गार्ड, उसकी पत्नी और राजधानी स्कूल का सुरक्षा गार्ड और अन्य लोग गवाह हैं।

पुलिस का कहना है कि डीआरपी स्कूल के गार्ड ने उन्हें बताया कि उसने फारूक को अपने स्कूल के गार्ड्स को मुस्लिमों को अंदर आने के निर्देश देते सुना और देखा। पुलिस ने यह भी दावा किया है कि फारूक पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) और जामिया कॉर्डिनेशनल कमेटी के साथ पिंजरा तोड़ संगठन के भी सदस्य हैं। इस पर फारूक के वकील ने कहा कि जिस आदमी का पुलिस ने जिक्र किया है, वह फारूक का चचेरा भाई है। पिंजरा तोड़ के सदस्य के तौर पर जिसका नाम बताया गया है, वह एक महिला पत्रकार है। कोचर ने कहा कि पुलिस के पास अपने दावों को साबित करने के लिए कोई सबूत ही नहीं हैं।

अदालत पहले ही दे चुकी है फारूक को जमानत:  पूर्वोत्तर दिल्ली में दंगों के मामलों में गिरफ्तार हुए फारूक को दिल्ली की एक अदालत पहले ही जमानत दे चुकी है। कोर्ट ने पाया था कि पुलिस ने आरोपी के खिलाफ चार्जशीट में उसके पीएफआई, पिंजरा तोड़ ग्रुप और मुस्लिम मौलवियों से लिंक के जो साक्ष्य पेश किए वो अलग हैं। कोर्ट ने कहा कि पहली नजर में इसकी पुष्टि नहीं होती कि शख्स घटना के वक्त घटनास्थल पर मौजूद था। बता दें कि राजधानी स्कूल के मालिक फैसल फारूक उन आठ लोगों में शामिल हैं जिन्हें 24 फरवरी को शिव विहार में स्कूल के बाहर दंगा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

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