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सीढ़ी के सहारे खिड़की काटकर लोगों को बचाया

कारखाना में काम करने वाले मुशर्रफ ने अपने चाचा को सुबह करीब 5 बजे फोन किया था। उसने अपने चाचा से कहा कि चाचा यहां आग लग गई है। सब जगह पर धुंआ ही भरा हुआ है। वह फोन पर रोते-रोते बस एक बात बोल रहा था कि चाचा मुझे बचा लो।

Author Published on: December 9, 2019 4:10 AM
दिल्ली के आज मंडी में आग से 43 की मौत हो गई। फोटो- इंडियन एक्सप्रेस

रानी झांसी रोड पर घटनास्थल से कुछ दूरी पर रहने वाले मोहम्मद फरोज और आलम ने बताया कि ने बताया कि सुबह करीब पौने 5 बजे वह नमाज पढ़ने के लिए उठे। वह नमाज पढ़ने के लिए अपने घर से निकले ही थे कि उन्हें शोर और चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। वे दोनों भागकर मौके पर पहुंचे तो देखा कि इमारत से धुआं निकल रहा था। दोनों ने तुुरंत ही अपने कुछ साथियों को बुलाया, ये लोग भी नमाज पढ़ने जा रहे थे। आग के कारण ऊपर जाने का रास्ता नहीं मिला। वे लोग पड़ोस के घरों की छत पर चढ़े। उसके बाद उन्होंने दूसरे मकान से सीढ़ी मंगवाई और कटर मशीन से खिड़की काट कर दो मजदूरों को बाहर निकाला।

वहीं, इमारत के ठीम समाने वाले कारखाना में काम करने वाले मोहम्मद तौकीर ने बताया कि सुबह करीब 5 बजकर 15 मिनट पर वह मशीन पर काम कर रहा था। तभी तेजी से चिल्लाने की आवाज सुनाई दी। मशीन बंद कर बाहर निकाला तो देखा इमारत से धुंआ निकल रहा था। उसने भी शोर मचाकर आसपास के लोगों को मदद के लिए बुलाया। तुरंत ही भीड़ जमा हो गई। चारों तरफ अफरा-तफरी में लोग खुद को बचाने के लिए भाग रहे थे। उसने बताया कि अधिकतर लोग पानी डाल कर आग पर काबू पाने की कोशिश कर रहे थे। इसी बीच दमकल कर्मी भी पहुंच गए थे।

चाचा आग लग गई है, मुझे बचा लो
कारखाना में काम करने वाले मुशर्रफ ने अपने चाचा को सुबह करीब 5 बजे फोन किया था। उसने अपने चाचा से कहा कि चाचा यहां आग लग गई है। सब जगह पर धुंआ ही भरा हुआ है। वह फोन पर रोते-रोते बस एक बात बोल रहा था कि चाचा मुझे बचा लो। चाचा ने उसे कूदने के लिए कहा तो उसने कहा कि चाचा मैं बहुत ऊपर हूं और नीचे काफी बिजली के तार हैं। मुझे डर लग रहा है, मुझे बचा लो। उसके बाद उसका फोन बंद हो गया। इसके बाद वह अस्पताल गए, जहां उन्होंने मुशर्रफ की शिनाख्त की। वह करीब चार साल से यह पर काम कर रहा था। मुशर्रफ परिवार में इकलौता था। जिसपर परिवार को पालने का जिम्मा था।

ससुर और साले का कुछ पता नहीं
खानपुर निवासी ताज अहमद ने बताया कि कारखाना में ससुर जसिमुद्दिन और पत्नी का भाई फैजल भी काम करते थे। उसे सुबह छह बजे बिहार के रहने वाले शहनवाज से फोन पर हादसे की सूचना दी। सूचना मिलते ही वह तुरंत घटनास्थल पर पहुंचा। उन्होंने लोगों से अपने ससुर और साले के बारे में पूछा, लेकिन उन्हें उनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। आगे उन्होंने बताया कि हर रविवार को उनके ससुर जसिमुद्दीन घर आते थे। दो दिन पहले ही जसिमुद्दीन की उनकी बेटी से बात हुई थी और उन्होंने कहा था कि मैं घर आऊंगा। उन्होंने बोला था कि 15 दिसंबर काम खत्म हो जाएगा उसके बाद ठेकेदार जुबैर से हिसाब कर वह आ जाएगा।

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