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लंदन में स्मॉग से मर गए थे 4000 से ज्यादा लोग, दिल्ली में भी बने वैसे ही हालात!

कुदरत के इस कहर से अबतक लंदन में कोहराम मच चुका था। कई हादसे हुए। कई ट्रेनें आपस में टकरा गईं। लंदन ब्रिज पर दो ट्रेनों में जबर्दस्त टक्कर हुई।

Author Published on: November 10, 2017 2:47 PM
10 नवंबर 2017 को दिल्ली के आसमान पर स्मॉग की चादर (फोटो-PTI)

गैस चैंबर बन चुकी राजधानी दिल्ली में लोगों का दम घुट रहा है। धुंध और धुएं के मिश्रण से बने स्मॉग ने हवा को इस कदर जहरीला बना दिया है कि बच्चों की स्कूलें बंद करनी पड़ी। कभी ऐसे ही हालात ब्रिटेन की राजधानी लंदन में बने थे। ये वक्त था 1952 का। उस दौरान इस स्मॉग की वजह से 4 हजार लोगों की मौत हो गई थी। तब औद्योगिक क्रांति के बाद लंदन में कई फैक्ट्रियां और कारखाने चल रहे थे। इस दौरान ठंड के मौसम में धुंध और जहरीले धुएं की वजह से ऐसा खतरनाक रसायन हवा में बना कि लोगों का दम घुटने लगा और देखते ही देखते सैकड़ों लोग असमय ही काल की गाल में चले गये। लंदन की इस स्मॉग से हुई मौतों की कहानी इंसान द्वारा अपनी कब्र खुद खोदने का एक जीता जागता उदाहरण है। तब लंदन में दिसंबर का महीना था। कड़ाके की सर्दी पड़ रही थी। 4 दिसंबर 1952 को दोपहर बाद लंदन की टेम्स नदी और उसके आस-पास के आसमान में काले धुंध की गहरी चादर दिखी, पहले तो लोगों ने इसे कोहरा समझा, लेकिन वह नहीं जानते थे कि ये कोहरा नहीं लंदन के आसमान पर मंडरा रहा मौत का साया है।

जैसे ही देश के पश्चिमी किनारे से ठंडी हवा लंदन पहुंची आसमान घना हो गया। ठंड की वजह से लोगों ने अपने घरों को गर्म रखने के लिए कोयले जलाये जिससे आसमान में धुआं और भी बढ़ गया। इसके अलावा लंदन में चल रही फैक्ट्रियों से बड़े पैमाने पर प्रदूषण हो रहा था। लंदन की सड़कों पर चलने वाली कारों से भी जहरीला धुआं निकल रहा था। कुछ ही देर में धुएं, कोयले से निकलने वाला सल्फर डॉय ऑक्साइड की वजह से आसमान पर जबर्दस्त स्मॉग की चादर फैल गई। 5 दिसंबर की सुबह होते होते सैकड़ों वर्ग मील आसमान पर स्मॉग की मोटी परत बैठ गई। लंदन के आसमान में जहरीले धुएं की ये परत मोटी होती गई। 7 दिसंबर की सुबह लंदनवासी सूरज की रोशनी को नहीं देख पा रहे थे और कुछ स्थानों में विजिबिलिटी घटकर 5 से 10 मीटर रह गई थी। कुदरत के इस कहर से अबतक लंदन में कोहराम मच चुका था। कई हादसे हुए। कई ट्रेनें आपस में टकरा गईं। लंदन ब्रिज पर दो ट्रेनों में जबर्दस्त टक्कर हुई। लेकिन सबसे खतरनाक असर सांस की बीमारी झेल रहे इंसानों और जानवरों पर पड़ा। लोगों को उल्टियां होने लगी चक्कर आने लगे। लंदन के अस्पताल सांस के मरीजों से भर गये। कई लोग ऑक्सीजन की कमी की वजह से नींद में ही मर गये।

4 दिसंबर से लेकर 8 दिसंबर तक लंदन मेट्रोपोलिटन में मौतों का आधिकारिक आंकड़ा तो मिलना मुश्किल है। लेकिन रिपोर्ट्स कहते हैं कि लगभग 4 हजार लोग इस स्मॉग की वजह से मारे गये। वहीं कुछ आंकड़ों के मुताबिक मौतों की संख्या 12 हजार भी हो सकती है। लोगों राहत की सांस तब ले सके जब 9 दिसंबर को आखिरकार स्मॉग खत्म हुआ। इस हादसे के बाद लंदन सरकार ने कई कठोर उपाय लागू किये। बावजूद इसके लंदन में 10 साल बाद वैसा ही हादसा हुआ इस बार फिर से 100 लोगों की मौत हो गई। स्वास्थ्य मानकों पर आज दिल्ली में भी कमोबेश वैसी ही खतरनाक स्थिति होती जा रही है। अगर बहुत जल्द इससे निपटने के उपाय नहीं किये गये तो किसी मनहूस सुबह हमारी लापरवाही कई लोगों की मौत का इंतजार कर रही होगी।

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