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2009 जिगिषा हत्याकांड में दो को मौत की सजा, एक को उम्रकैद

अदालत ने कहा कि दोषियों ने जो क्रूरता और बेरहमी दिखाई, उससे यह मामला ‘दुर्लभतम’ बन जाता है और इसलिए रवि कपूर और अमित शुक्ला को मौत की सजा सुनाई जाती है।

Author नई दिल्ली | August 23, 2016 1:03 AM
(चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रतीक के तौर पर किया गया है)

साल 2009 के जिगिषा घोष हत्याकांड में दोषी करार दिए गए दो लोगों को सोमवार (22 अगस्त) को एक स्थानीय अदालत ने मौत की सजा जबकि एक को उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि 28 साल की आईटी पेशेवर की ‘सुनियोजित, अमानवीय और क्रूर तरीके’ से हत्या की गई थी। अदालत ने कहा कि दोषियों ने जो क्रूरता और बेरहमी दिखाई, उससे यह मामला ‘दुर्लभतम’ बन जाता है और इसलिए रवि कपूर और अमित शुक्ला को मौत की सजा सुनाई जाती है। तीसरे दोषी बलजीत मलिक को जेल में अच्छे बर्ताव के कारण मौत की सजा न सुनाकर उम्रकैद की सजा सुनाई गई।

अदालत ने कपूर पर 1.2 लाख, शुक्ला पर 2.8 लाख और मलिक पर 5.8 लाख रुपए का जुर्माना लगाया। कपूर पर महज 1.2 लाख रुपए का जुर्माना इसलिए लगाया गया क्योंकि वह बहुत बड़ी रकम देने में सक्षम नहीं है। कपूर, शुक्ला और मलिक पर टीवी पत्रकार सौम्या विश्वनाथन की हत्या के मामले में भी मुकदमा चल रहा है। सौम्या की हत्या 2008 में हुई थी। कपूर और शुक्ला को मौत की सजा सुनाते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संदीप यादव ने कहा, ‘वे समाज के लिए खतरा हैं’ और दोषियों ने जो क्रूरता और बेरहमी दिखाई, उससे यह मामला ‘दुर्लभतम’ बन गया है।

खचाखच भरी अदालत में अपना फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश ने कहा, ‘सुनियोजित, अमानवीय और कू्रर तरीके से अपराध को अंजाम दिया गया । मासूम, असहाय और कमजोर पीड़िता दोषियों के चंगुल में घंटों तक फंसी रही। उसने दोषियों से अपनी जान बख्श देने की गुहार लगाई, अपने बचाव की कोशिश की, अपना डेबिट कार्ड और अन्य सामान भी दे दिया। पीड़िता ने दोषियों को अपने डेबिट कार्ड का पिन नंबर भी बता दिया।’ अदालत ने कहा, ‘बहरहाल, जब उन्होंने उसकी हत्या कर दी तभी उन्हें चैन मिला। दूसरे शब्दों में, दोषियों ने एक असहाय लड़की के साथ असभ्य और बर्बर तरीके से बर्ताव किया।’ न्यायाधीश ने कहा कि इन दोषियों के प्रति नरमी नहीं दिखाई जा सकती, क्योंकि महिलाओं के खिलाफ बढ़ते जघन्य अपराधों पर लगाम लगाने के लिए उचित सजा देना जरूरी है।

अदालत ने तीनों दोषियों पर लगाए गए कुल 9.8 लाख रुपए के जुर्माने में से छह लाख रूपए पीड़िता के परिवार को मुआवजे के तौर पर देने का आदेश दिया। अदालत ने यह भी कहा कि यह राशि पर्याप्त नहीं है। उन्होंने जिला विधिक सेवा प्राधिकार (दक्षिण) से पीड़िता के परिवार के लिए उपयुक्त मुआवजे का निर्धारण करने के लिए कहा। मुआवजे का आदेश देते हुए अदालत ने कहा कि जिगिषा अपने परिवार में एकमात्र कमाने वाली सदस्य थी। वह एक कंपनी में ऑपरेशनल मैनेजर के तौर पर 45,000 रुपए कमा रही थी और अब तक उसने अपने करियर में काफी ऊंचा मुकाम हासिल कर लिया होता।

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