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महंगी मशीनों के अभाव में जा रही मजदूरों की जान

अदालत और सिविक एजंसियों के निर्देश के बावजूद दिल्ली में मजदूरों से सेप्टिक टैंक और बंद नालों को सफाई करा के उनकी जान से खिलवाड़ किया जा रहा है।

Author नई दिल्ली, 27 अक्तूबर। | October 28, 2018 4:18 AM
अच्छा होगा कि जल बोर्ड कुछ रकम लेकर निजी क्षेत्रों को महंगी मशीन उपलब्ध कराए, जिससे मजदूरों की जान बच सके।

अदालत और सिविक एजंसियों के निर्देश के बावजूद दिल्ली में मजदूरों से सेप्टिक टैंक और बंद नालों को सफाई करा के उनकी जान से खिलवाड़ किया जा रहा है। इसकी बड़ी वजह सफाई करने वाली संस्थाओं द्वारा महंगी मशीनों से दूरी बनाए रखने को बताया जा रहा है। सफाई की शुरुआती सक्शन मशीन और जेटकिंग सात लाख रुपए से शुरू होती है जबकि सुपर सॉकर मशीन की कीमत दो करोड़ रुपए के करीब है। दिल्ली जल बोर्ड और नगर निगम के अलावा निजी होटलों और व्यावसायिक परिसरों के साथ-साथ हाउसिंग कॉलोनियों में इतनी मंहगी सफाई मशीनें न होने से दुर्घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। दिल्ली नगर निगम के पर्यावरण व प्रबंधन सेवाएं (डेम्स) के अधिकारी का कहना है कि सिविक एजंसियां कानून के मुताबिक चलती हैं, जबकि निजी क्षेत्रों के लिए कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है लिहाजा इस तरह की घटनाएं आए दिन सामने आती हैं। अच्छा होगा कि जल बोर्ड कुछ रकम लेकर निजी क्षेत्रों को महंगी मशीन उपलब्ध कराए, जिससे मजदूरों की जान बच सके।

रविवार को जहांगीरपुरी में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान फिर एक मजदूर की मौत हो गई। इससे पहले डाबरी, मोतीनगर, घिटोरनी, लाजपतनगर, लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल, मांडी गांव व मोतीनगर सहित कई इलाकों में सीवर की सफाई करने उतरे मजदूरों की जान जा चुकी है। दिल्ली नगर निगम के अधिशासी अभियंता एसडी तोमर कहते हैं कि बिना सुरक्षा उपकरणों के कोई भी कर्मचारी नाले और सेप्टिक टैंक की सफाई नहीं करेगा।

सेप्टिक टैंक की सफाई में एहतियात जरूरी

डेम्स क्षेत्र में लंबे समय से काम करने वाले तोमर कहतें हैं कि सुरक्षा उपकरण के बिना कोई भी आदमी सेप्टिक टैंक में नहीं उतर सकता। इस दौरान दो आदमी ऊपर तैनात रहते हैं और एक आदमी गैस मास्क, कमर की बेल्ट व दस्ताने पहनकर टॉर्च के साथ नीचे उतरता है। जिस टैंक की सफाई होती है उसके आगे और पीछे के ढक्कन को खोलना होता है। इसके बाद टैंक के अंदर गैस की जांच होती है और बीड़ी, सिगरेट सहित किसी भी ज्वलनशील पदार्थ को अंदर नहीं ले जाने के निर्देश होते हैं। निगम कर्मचारियों को टैंक में नहीं उतरने के सख्त निर्देश हैं, सिर्फ दिल्ली जल बोर्ड के कर्मी ही सुरक्षा उपकरणों के साथ इसमें उतर सकते हैं।

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