ताज़ा खबर
 

एक-एक ग्रह के भाव को नृत्य से दर्शाया

युवा नृत्यांगनाओं ने अपने प्रयासों से अपनी पहचान कायम करने का प्रयास किया है।
क्लासिकल डांसर मीनू ठाकुर

युवा नृत्यांगनाओं ने अपने प्रयासों से अपनी पहचान कायम करने का प्रयास किया है। कुचिपुड़ी नृत्यांगना मीनू ठाकुर ने वरिष्ठ नृत्यांगना स्वप्नसुंदरी, वनश्री राव व जयराम राव से नृत्य सीखा। अब समय के साथ वह अपनी शिष्याओं को नृत्य में प्रशिक्षित कर रही हैं और उन्हें मंच पर भी ला रही हैं। बीते मंगलवार को उन्होंने नई नृत्य रचना नवग्रह चरितम पेश की। इसकी नृत्य परिकल्पना मीनू ने की थी। संगीत परिकल्पना सिद्धार्थ दास की थी। नृत्य रचना नवग्रह चरितम का आरंभ गणेश वंदना से हुआ। सूर्य वंदना सुवर्ण कांति सन्निभम’ पर आधारित सूर्य के अवतरण को दर्शाया। प्रस्तुति में सूर्य को सबसे बड़े ग्रह के रूप में प्रस्तुत किया।

चंद्रमा और रोहिणी के विवाह प्रसंग के जरिए चंद्रमा की कथा को दर्शाया गया। यह ‘आगच्छामि कलाधीश चंद्र’ पर आधारित था। नृत्यांगना मीनू ने मंगल ग्रह को पूथ्वी व वराहवतार के संतान के तौर पर निरूपित किया। यह अंश ‘प्रवेशामि मंगल अहम’ पर आधारित था। इसी तरह बुद्ध, वृहस्पति, शुक्र, शनि व राहू-केतु ग्रहों से जुड़े विभिन्न प्रसंगों को प्रस्तुति में चित्रित किया गया। प्रस्तुति में मीनू ठाकुर और उनकी शिष्याओं का नृत्य सहज था। हालांकि, सूत्रधार के तौर पर ऋषभ पाठक का बार-बार आना-जाना थोड़ा असहज प्रतीत हो रहा था क्योंकि यह प्रस्तुति रिकॉर्डेड म्यूजिक पर थी और संवाद भी रिकॉर्ड किया हुआ था। प्रस्तुति में नवरस का प्रयोग सहज ही दिखा। नृत्यांगना मीनू ने एक-एक ग्रह के भाव को अपनी भंगिमाओं और नृत्य के जरिए विवेचित किया।

कुचिपुड़ी नृत्य शैली में प्रस्तुत इस पेशकश में शिरकत करने वाली नृत्यांगनाएं थीं-द्विवेदिता, बबीता, विदिशा, नेहा, स्वाति, तनुश्री, दीपशिखा, जाह्नवी और सुधा। नर्तक आकाश ने छउ नृत्य शैली का प्रयोग बेहतर तरीके से किया। सूत्र स्टूडियो और कर्म मार्ग की ओर से आधुनिक नृत्य समारोह आयोजित था। इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित समारोह में नेहा गुप्ता और हिमानी शर्मा की नृत्य परिकल्पना को साकार किया गया। पहली पेशकश मजल थी। अपनी तलाश में इंसान हो या पशु या कोई और, सभी आंख और मुंह बंद कर लेते हैं। नृत्य के क्रम में बीच-बीच में ध्वनि शून्यता के प्रयोग ने बहुत मार्मिक बोध करवाया। वहीं, अगली पेशकश ‘जामा मस्जिद की सीढ़ियों’ में आध्यात्मिक और भौतिक उर्जा के संयोग को प्रभावी अंदाज में दर्शाया गया। इसके लिए बंदिश ‘याद पिया की आए’ का प्रयोग मोहक प्रतीत हुआ। वहीं नृत्यांगना नेहा गुुप्ता की एकल प्रस्तुति ‘बर्ड इन एक्जाइल’ बेहद प्रभावकारी थी। उन्होंने राह से भटके हुए पक्षी के भाव को हथेली और एक-एक अंगुलियों की सुंदर गतियों से बखूबी दर्शाया। उन्होंने हाथ व पैर की गतियों के साथ चक्करों के जरिए भावों को सरस अंदाज में निरूपित किया। इस प्रस्तुति को प्रकाश प्रभाव ने और अधिक जानदार बना दिया। इस काम को लाइट डिजाइनर मुरली ने बखूबी निभाया। इस कार्यक्रम का समापन ‘जस्ट लाइक दैट’ से हुआ।
एक कलाकार अपनी रचनात्मकता के जरिए अपने भावों और स्थान का कलात्मक प्रयोग करता है। इस पेशकश में इन्हीं भावों को विवेचित किया गया। नेहा और हिमानी के अलावा, शिरकत करने वाले अन्य कलाकार थे-अनीश, शामा, तारा, बबली, पूजा, काजल और टीना।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.